Google Trends: दिल्ली में सर्द सुबह के साथ एक बार फिर वही पुरानी चिंता लौट आई है, सांस लेना तक मुश्किल। शनिवार को एक्यूआई 332 दर्ज हुआ, जो साफ बताता है कि हवा “बहुत खराब” से बस एक कदम नीचे, “बेहद खराब” की कगार पर है। यह गिरावट जरूर है, लेकिन राहत बिल्कुल नहीं। शुक्रवार को एक्यूआई 369 था, यानी हालात लगातार खतरनाक सीमा पर बने हुए हैं।
धुंध का ‘नवंबर स्पेशल’: 15 दिन से एक जैसी जहरीली हवा
नवंबर का आधा महीना बीत चुका है और लगातार 15 दिन से दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में अटकी हुई है। पिछले पूरे सप्ताह के आंकड़े डराने वाले हैं-
- सोमवार: 382
- मंगलवार: 352
- बुधवार: 327
- गुरुवार: 377
- शुक्रवार: 369
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, हालात इतने बिगड़े कि सुबह 39 में से 18 मॉनिटरिंग स्टेशन ‘गंभीर’ श्रेणी (401-500) में पहुंच गए। द्वारका सेक्टर-8 में एक्यूआई 414 रिकॉर्ड हुआ – यानी सांस लेना ही स्वास्थ्य के लिए खतरा।
प्रदूषण का असली गुनहगार कौन?
पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के विश्लेषण के मुताबिक:
- वाहनों का योगदान शुक्रवार को 18% था, जो शनिवार को बढ़कर 18.4% तक जा सकता है।
- पराली का योगदान शुक्रवार को 1.2% रहा, शनिवार को 1.7% रहने का अनुमान है।
यानी दिल्ली की हवा में जहर का सबसे बड़ा स्रोत इस समय सड़क पर दौड़ते वाहन हैं।
मौसम भी बना ‘साइलेंट पार्टनर’
आईएमडी के मुताबिक:
- न्यूनतम तापमान: 10.4°C
- अधिकतम तापमान: 25°C
- सुबह की नमी: 90%
उच्च आर्द्रता और ठंडी हवा – ये दोनों मिलकर प्रदूषण को जमीन के पास फंसा देती हैं, जिससे धुंध और घनी होकर शहर को ढक लेती है।
आने वाला सप्ताह भी मुश्किल
दिल्ली की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली ने साफ कर दिया है कि अगले सप्ताह भी हवा में सुधार की उम्मीद बेहद कम है। आरके पुरम, पंजाबी बाग, नेहरू नगर, रोहिणी और जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में एक्यूआई लगातार 400 के ऊपर बना रहने का खतरा है।
क्या अब भी हल संभव है?
दिल्ली में हालात याद दिलाते हैं कि यह सिर्फ मौसमी संकट नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म शहरी स्वास्थ्य आपातकाल है। वाहनों पर नियंत्रण, साफ ऊर्जा को बढ़ावा और कचरा प्रबंधन जैसे कदम तत्काल और बेहद सख्त स्तर पर लागू करने की ज़रूरत है। प्रदूषण अब सिर्फ हवा का मुद्दा नहीं – दिल्ली की जीवनशैली, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा हमला है।
