भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी और कांग्रेस प्रवक्ता के बीच एक टीवी डिबेट के दौरान सावरकर को लेकर तीखी बहस हुई। न्यूज़ 18 इंडिया के डिबेट शो ‘आर – पार’ में सुधांशु ने कहा कि जो काला पानी नहीं गए वही स्वतंत्रता के सबसे बड़े सेनानी हो गए।
उन्होंने कहा कि, ‘कपिल सिब्बल बाबरी एक्शन कमेटी के वकील थे। लेकिन कांग्रेस कहती है कि बाबर से उनको कोई मतलब नहीं था।’ सुधांशु ने सावरकर का जिक्र करते हुए पूछा, आजादी के आंदोलन में कितने कांग्रेसी नेताओं को काला पानी की सजा हुई थी।
उन्होंने कहा, ‘जो इस देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए फांसी पर नहीं चढ़े, बलिदान नहीं दिया। उन्हीं के नाम स्वतंत्रता सेनानी की लिस्ट में रखे गए हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा धर्म का नहीं है। बुल्ले शाह, सैयद इब्राहिम खान, आलम शेख, अशफाक उल्ला खान जैसे शहीदों को कांग्रेस कितना याद करती है। क्या कांग्रेसी नेता इनमें से किसी के घर गए हैं? उन्होंने कहा, कांग्रेस को बाबर, तुगलक, औरंगजेब और याकूब मेमन याद आते हैं। यही कांग्रेस की समस्या है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, इस मिट्टी में देश का इतिहास लिखा हुआ है कांग्रेस इसे कितना भी मिटाने की कोशिश करे, लेकिन यह मिटने वाला नहीं है।
बीजेपी प्रवक्ता ने इस डिबेट में मौजूद तस्लीम रहमानी से पूछा, क्या ब्रिटिश रूल क्रिश्चियन काल था? अगर ब्रिटिश रूल क्रिश्चियन काल नहीं है तो मुस्लिम रूल मुगल काल कैसे हो गया?
सुधांशु त्रिवेदी की इन बातों पर कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा, अगर देश की आजादी के बाद इतिहास को तो तोड़ा – मरोड़ा गया होता तो हल्दी रंग किया मुगलों को कहती हल्दीघाटी है.. जैसी कविता कैसे लिखी जाती। उल्लेखनीय है कि सावरकर के विषय में इस देश में चर्चा उस समय बढ़ गई जब केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक किताब के विमोचन के दौरान कहा कि सावरकर ने महात्मा गांधी के कहने पर माफी मांगी थी।
