अक्सर हम लोग उम्र को एक बहाने की तरह इस्तेमाल करते हैं कि अरे, अब यह कैसे होगा। यह भी कोई उम्र है यह सब करने की। औरतें तो ऐसे बहाने और अधिक ढूंढ़ती हैं। खासतौर से व्यायाम के मामले में। कनेक्टीकट अमेरिका में रहने वाली लारेन ब्रूजेन पेशे से वकील रही हैं। अभी बहत्तर साल की हैं। मगर जिम में जाकर वे ऐसी एक्सरसाइज करती हैं, जिन्हें देख कर बड़े से बड़े युवा भी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। वहां वह लोगों को एक्सरसाइज करवाती भी हैं। जिम के मालिक कहते हैं कि ब्रूजेन उनकी भी प्रेरणा हैं।
हाल ही में चौहत्तर साल की एक महिला ने भारत में बच्चे को जन्म दिया था। उसका कहना था कि जीवन भर लोगों ने बांझ कह कर उसे चिढ़ाया है। अब कोई कुछ नहीं कहेगा। हालांकि इस उम्र में बच्चे का जन्म यह चिंता पैदा करता है कि वह पलेगा कैसे। मगर इस मां को इस बात की चिंता नहीं है। वह कहती है कि अपने बच्चे को पाल लेगी।
अमेरिका नवादा की मारिया क्रिस्टीना तिहत्तर साल की हैं। उन्होंने तिरसठ साल की उम्र में व्यायाम करना शुरू किया था और अब उन्हें बिकनी बॉडी चैंपियन का खिताब दिया गया है। उन्होंने यह खिताब अपनी से आधी उम्र की महिलाओं को हरा कर पाया। मरीना का कहना है कि बहुत से आदमी अस्सी वर्ष तक की उम्र में भी अपने को फिट रखने की कोशिश करते हैं, और व्यायाम करते हैं। मगर औरतें तो पचास की होते ही उम्मीद छोड़ देती हैं। वे मुझे देख कर सोच सकती हैं कि जब तिहत्तर साल की उम्र में मैं ऐसा कर सकती हूं, तो वे क्यों नहीं। मरीना का कहना है कि सत्तर साल की औरतों लिए जो बूढ़े होने का स्टीरियो टाइप बना दिया गया है, उन्हें देखकर उसे तोड़ा जा सकता है।
तिहत्तर साल की जापान की तामे वातानवे ने मई 2012 में एवरेस्ट फतह की थी। और एवरेस्ट फतह करने वाली वे दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला बन गईं। दस साल पहले बनाया गया अपना ही रिकार्ड उन्होंने तोड़ दिया। 2002 में जब वह तिरसठ साल की थीं, तब भी उन्होंने एवरेस्ट पर सफलता पूर्वक चढ़ाई की थी।
त्रिसूर, केरल के वृद्धाश्रम में रहते हैं, सड़सठ साल के कोचनियां मेनन। वहीं रहती थीं छियासठ साल की पीवी लक्ष्मी। दोनों एक-दूसरे को अरसे से जानते थे। दोनों वृद्धाश्रम में रहते हैं। मेनन बीमार रहते हैं। लक्ष्मी चाहती थीं कि उनकी देखभाल कर सकें। इसलिए उन्होंने तय किया कि वे मेनन से विवाह करेंगी। अधिकारियों ने उनकी मदद की और दोनों का विवाह हो गया। इस अवसर पर बहुत से लोग मौजूद थे।
कुछ साल पहले मुम्बई में अड़सठ साल की एक महिला ने दोबारा विवाह किया था। अरसा पहले जब मशहूर अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर ने तिरसठ साल की उम्र में, उनतालीस साल के आदमी से विवाह किया था, तब उनकी न केवल आलोचना हुई, बल्कि खूब मजाक भी उड़ाया गया था। लेकिन अब यह नया चलन है। कुछ साल पहले मशहूर अभिनेत्री सुहासिनी मुले ने बासठ साल की उम्र में विवाह किया था। उन्होंने बताया कि जब वे पंडित के पास पहुंचीं तो पंडित ने कहा कि दूल्हा-दुलहिन को बुलाइए। जब उन्होंने कहा कि वे ही दुलहिन हैं, तो पंडित भी चकित रह गया था।
वैसे भी इन दिनों बुजुर्गों की उम्र बढ़ गई है। चिकित्सा सुविधाओं के कारण वे स्वस्थ भी रहते हैं। ऐसे में अगर जीवन साथी चला जाए, तो अकेलापन काटे नहीं कटता। पहले जैसे संयुक्त परिवार नहीं हैं। जो बाल-बच्चे हैं, वे अपने-अपने कामों में इतने व्यस्त हैं कि समय नहीं। पुरानी आपसदारियां, मेल-मिलाप भी तकनीक ने खत्म कर दिया है। गांवों में भी चबूतरा और चौपाल संस्कृति अपनी आखिरी सांसें गिन रही है। इन सब बातों ने बुजुर्गों को और अकेला किया है। ‘हेल्प एज’ संस्था का कहना है कि बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेलेपन के कारण अवसाद का शिकार हैं।
सरकारें चाहे कह रही हैं, कोर्ट फैसले दे रहे हैं कि जो बच्चे अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उन्हें सजा मिलेगी। मगर इससे होता क्या है। जब तक संवेदनाएं न हों, तो केवल कनून किसी की देखभाल के लिए मजबूर नहीं कर सकता। इसलिए बहुत से बुजुर्ग अपने लिए जीवन साथी खोजते हैं। अखबरों, मेट्रीमोनियल साइटों पर इस तरह के विज्ञापन भी देते हैं। यही नहीं, बुजुर्गों के आपसी मेल-मिलाप के लिए सम्मेलन भी किए जाने लगे हैं। अमदाबाद का संगठन है- बिना मूल्य अमूल्य सेवा। यह जगह-जगह ऐसे सम्मेलन कराता है। इनमें वे बुजुर्ग भाग लेते हैं, जिन्हें किसी साथी की तलाश है। बहुत से बच्चे भी चाहते हैं कि उनके माता-पिता का अकेलापन दूर हो, इसलिए यहां वे अपने माता-पिता को लेकर आते हैं।
’इस्राइल की हैं वैज्ञानिक डा. एडा ई योनाथ। अस्सी वर्ष की हैं। हाल ही में बंगलुरु में 107वीं विज्ञान कांग्रेस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि विकसित देशों की तरह भारतीय भी अस्सी साल तक जी सकें।
’ कोयंबतूर में रहती हैं नानाअम्माल। 2017 में एक मशहूर अखबर ने इनके बारे में छापा था। अट्ठानवे साल की थीं, अब सौ की होंगी। वे योग सिखाती हैं। कठिन से कठिन आसन भी कर सकती हैं। लेकिन कोई थकान नहीं दिखती है। योग के कारण अब भी उनकी याददाश्त, नजर और सुनने की क्षमता बिल्कुल ठीक है। उनके छात्र चीन, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड आदि देशों में हुई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उन्हें कर्नाटक सरकार का योगरत्न पुरस्कार और राष्ट्रपति से नारी शक्ति पुरस्कार भी मिल चुका है। उन्हें आज तक कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई है।
’चीन में साठ-सत्तर वर्ष के लोग नए सिरे से जीवन साथी की तलाश कर रहे हैं। जो लोग जीवन साथी के न रहने या तलाक के कारण अकेले पड़ गए हैं, उनके लिए जीवन साथी खोजने के लिए विशेष पार्क बनाए गए हैं। इसे वहां मीडिया ने व्टिलाइट लव का नाम दिया।
’ अल्मोड़ा के सिया घाना ब्लाक के खाटवे गांव में एक राजकीय इंटर कॉलेज है। वहां के स्कूल में शिक्षक नहीं थे। शिक्षकों की मांग के लिए वहां के छात्र कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे रहे थे। जब उसी इलाके की अट्ठानवे साल की खष्टी देवी ने यह सुना, तो वह छात्रों के साथ धरने पर बैठ गर्इं। उन्हें लोग देखने आने लगे। अंत में वहां के सांसद आए। प्रशासन के लोग आए। उन्होंने वायदा किया जल्दी ही शिक्षकों की नियुक्ति करेंगे।

