कीर्ति
कुछ पौधों की जड़ें भोज्य पदार्थ के एकत्रित हो जाने से फूल जाती हैं तब ये सब्जियों की तरह खाई जा सकती हैं। जिन पौधों की जड़ें ऐसी होती हैं, उन्हें कंदमूल कहा जाता है। कंदमूल हजारों वर्षों से खाने के काम आते रहे हैं। ये पौधे धरती से विभिन्न पदार्थ खींच लेते हैं। इसलिए ये उत्पादन चक्र को सुव्यवस्थित करने में भी उपयोगी सिद्ध होते हैं। चुकंदर एक ऐसी ही जड़ है, जिसे मुख्य रूप से पकाकर खाया जाता है। यह मुख्य भोजन के साथ या सूप के रूप में परोसा जाता है। चुकंदर का पाउडर चटनियों को लाल रंग देने के काम आता है। गाजर भी एक महत्त्वपूर्ण जड़ है। यह कई रंगों की होती है। इनमें बहुत अधिक मात्रा में कैरोटीन होता है। यह कच्ची तो खाई ही जाती है और इसकी सब्जी भी बनती है। कहीं-कहीं इसको सुखा कर भी खाया जाता है।
आजकल गाजर के दर्जनों व्यंजन और अचार आदि बनाए जाते हैं। मूली बहुत स्वादिष्ट मूल है। सफेद या लाल मूली पाचन तंत्र ठीक रखने के लिए कच्ची ही खाई जाती है और इसका सलाद भी बनता है। शलजम लाल और सफेद दोनों प्रकार का होता है। इसके स्वाद में कोई अंतर नहीं होता। इसकी एक किस्म बिल्कुल गोल होती है, पर दूसरी थोड़ी चपटी और लंबी। दोनों की सब्जी बनती है और सलाद के काम भी आती है। मीठे आलू (रतालू) का गूदा पीलापन लिए होता है और यह अपनी मिठास के कारण पसंद किया जाता है, इनकी सब्जी बनती है और ये सुखा कर भी खाए जाते हैं।
जमीन के अंदर पैदा होने वाले कुछ अन्य कंद भी सब्जियों के काम आते हैं। आलू, टैरो, रतालू, जमीकंद इनमें प्रमुख हैं। जमीन के अंदर ही कुछ कंद भी पैदा होते हैं। लहसुन, प्याज या लीक खाने के काम आती हैं। लहसुन सूप, चटनियों, अचारों और सलाद में स्वाद पैदा करने के काम आता है। लीक सब्जियों को स्वादिष्ट बनाती है। प्याज का उपयोग सलाद और सब्जियों में किया जाता है। कंदमूल बहुत उपयोगी भोज्य पदार्थ हैं। ये हमें बहुत से खनिज और विटामिन देते हैं।

