छोटू बंदर जी ने सोचा
अब की मैं भी लड़ूं चुनाव
इतने दिन बस यों ही घूमा
कुछ दिन तो नेता बन जाव
यही सोचकर सबसे पहले
जा कर अपना नाम लिखाया
गत्ते पर कुत्ता बनवा कर
जंगल में हर ओर घुमाया
जिधर भी निकले हाथ जोड़कर
गूंज उठा जयकारा
चुनाव-चिह्न पर मोहर लगाओ
छोटू नेता हमारा
नुक्कड़ -नुक्कड़ सभा बुलाई
गला बिगड़ गया, सूजे पांव
लेकिन फिर भी प्रतिद्वंदीजी
मार ले गए उनका दांव
सोच रहे हैं बंदर जी अब
बेमतलब लड़ गया चुनाव।
(देशबंधु ‘शाहजहांपुरी’)

