मानस मनोहर

आलू का चीला

आलू एक बहुपयोगी खाद्य है। यह मुख्य रूप से तरकारी के रूप में खाया जाता है, पर नाश्ते के तौर पर बनने वाली ज्यादातर चीजों में इसका मेल बहुत आसानी से हो जाता है। आलू की टिक्की, चाट, परांठे वगैरह तो बच्चों को पसंद आते ही हैं, आलू का चीला भी उन्हें खूब भाता है। इसे बनाना बहुत आसान है। यह झटपट तैयार हो जाने वाला नाश्ता है। थोड़ा चटपटा और कुरकुरा होने की वजह से बच्चे बड़े मन से इसे खाते हैं।
चीला बनाने के लिए बड़े आकार के कुछ आलुओं को छील लें। फिर इन्हें कद्दूकस कर लें।

चीला बनाने के लिए मोटे आकार में कद्दूकस करें। महीन हिस्से की तरफ से कद्दूकस करने से चीला पिलपिला हो सकता है, कुरकुरा नहीं बनेगा। अब इसमें थोड़ा-सा नमक, थोड़ा सब्जी मसाला और थोड़ी कुटी लाल मिर्च डाल कर मिला लें। चाहें, तो थोड़ा हरा धनिया भी महीन काट कर मिला सकते हैं। जब चीले को तवे या पैन में सेंकना हो, तभी कद्दूकस करें और उसमें मसाले मिलाएं। पहले से कद्दूकस करके रखने पर आलू काला पड़ जाएगा। इसलिए हर बार नए चीले के लिए अलग से आलू कद्दूकस करें।

अब एक पैन गरम करें। इसके लिए नॉनस्टिक पैन लेना अच्छा रहता है। अगर वह न हो, तो तवे पर भी इसे बनाया जा सकता है। उस पर थोड़ा-सा तेल या देसी घी चुपड़ें और कद्दूकस किए हुए आलू डाल कर पतली परत के रूप में फैला दें। ध्यान रखें कि आलू आपस में चिपके रहें। आंच मध्यम रखें और नीचे की परत सुनहरी होने तक चीले को सेंकें। फिर पलट कर दूसरी तरफ से भी सुनहरा होने तक सेंकें।
अब इस पर चाट मसाला छिड़क कर गरमागरम परोसें। आलू का चीला टोमैटो सॉस या फिर इमली की मीठी चटनी के साथ खाने में अच्छा लगता है।

कुरकुरी कटोरी चाट

चाट की दुकानों पर आलू के लच्छों से बनी तली कटोरियां आपने देखी होंगी, खाई भी होगी। इसे बनाने के लिए थोड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है, पर खाने में इसका स्वाद लाजवाब होता है। खासकर बच्चे इसे बड़े चाव से खाते हैं। इसमें उनके लिए पोषण भी भरपूर मिलता है।

कुरकुरी कटोरी चाट बनाने के लिए कुछ तैयारियां पहले करनी होती हैं। इसके लिए सफेद चने और राजमा की बराबर-बराबर मात्रा दस-बारह घंटे पहले भिगो कर रख दें। फिर इन्हें थोड़ा नमक डाल कर कुकर में तीन-चार सीटी आने तक उबाल कर छान लें। जब चाट बनानी हो, तो इसमें हरा धनिया, पुदीने के कुछ पत्ते और अदरक बारीक काट कर मिलाएं। चाहें तो उबले हुए आलू के कुछ छोटे-छोटे टुकड़े, छोटी पापड़ी भी डाल सकते हैं।

ऊपर से निथारा हुआ दही, दो-तीन चम्मच इमली की मीठी चटनी, थोड़ी हरी चटनी, लाल मिर्च पाउडर, भुना जीरा पाउडर, जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, थोड़ा काला नमक और चाट मसाला डाल कर अच्छी तरह मिला लें और आलू के लच्छों से बनी कटोरियों में भर कर परोसें। ध्यान रखें कि चाट गाढ़ा बने, पतला होगा, तो वह कटोरी में भरने पर बाहर निकल जाएगा। अगर चाहें तो इस चाट को सोया कटोरी में भी भर कर परोस सकते हैं। सोया कटोरी बहुत आसानी से बाजार में मिल जाती है, मगर उसका आकार बहुत छोटा होता है, इसलिए उसमें आधा चम्मच से अधिक चाट एक बार में नहीं भरी जा सकती। आलू की कटोरियां आप अपने ढंग से मनचाहे आकार में बना सकते हैं।

आलू की कटोरियां बनाने के लिए भी कच्चे आलुओं के छिलके उतार कर मोटी तरफ से कद्दूकस कर लें। उसमें थोड़ा-सा नमक डालें और फिर एक छन्नी में सावधानी से परत बनाते हुए चारों तरफ फैला लें। इसे कटोरी का आकार देने के लिए बीच में एक कटोरी से दबाएं। ध्यान रखें कि आलू के छल्लों की परत न तो बहुत पतली हो और न बहुत मोटी। इसके लिए छन्नी के आकार की ही कटोरी लें। इस तरह परत अच्छी बनती है।

एक कड़ाही में तलने के लिए भरपूर तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो आंच को मध्यम कर दें। अब छन्नी को कटोरी समेत उठा कर गरम तेल में डालें और सुनहरा होने तक तलें। इसी तरह और भी कटोरियां बना लें। अब इन कटोरियों में राजमा और छोले से बनी चाट भरें और खाने के लिए परोसें। यह एक तरह से राज कचौड़ी का विकल्प होता है। इसमें अपने बच्चे के स्वाद के मुताबिक बदलाव कर सकते हैं। तीखापन या मीठापन बढ़ा-घटा सकते हैं।