राजेश मेहरा

राजू स्कूल से छुट्टी के बाद घर की तरफ चल दिया। उसका घर स्कूल से थोड़ी दूरी पर था। रास्ते में उसने देखा की सड़क किनारे एक मोबाइल फोन पड़ा है। उसने उठा कर उसे झट से अपनी जेब में रख लिया। उसने देखा आसपास कोई नहीं था। फोन पाकर वह बड़ा खुश था। वह घर पहुंचा और जल्दी से फोन को साइलेंट मोड पर कर दिया, क्योंकि वह अब भी बार-बार बज रहा था। शायद उसका मालिक उस पर कॉल कर रहा था। एक बार तो उसका मन हुआ कि उसे फोन उठा कर उसके मालिक को फोन के बारे में बता देना चाहिए, लेकिन फिर उसने सोचा कि छोड़ो न यार, कौन-सा मैंने चुराया है। यह तो सड़क पर पड़ा मिला था।

फोन को उसने छत के स्टोर रूम में छिपा दिया। राजू खुश था कि उसे अब अपने पापा के फोन को हाथ नहीं लगाना पड़ेगा। उसके पापा उसे अपना फोन लेने पर डांटते रहते थे। जैसे ही फोन को हाथ लगाओ तो कहते कि अभी तुम्हारी पढ़ाई की उम्र है, फोन चलाने की नहीं। राजू ने उस मोबाइल फोन में अपने दोस्त से मांग कर नया सिम डाल लिया और पुराने सिम को निकाल कर स्टोर में ही छिपा दिया। अपनी पॉकेट मनी से उसका डाटा रिचार्ज करवा लिया। राजू अब रोज अपने मम्मी पापा से छिपकर स्टोर में इंटरनेट का इस्तेमाल करता। फोन पर वह ज्यादा समय बिताने लगा। इस कारण वह पढ़ाई में भी ध्यान नहीं दे पाता था।

उधर उस फोन के मालिक ने पुलिस स्टेशन में अपने फोन के गुम होने की शिकायत कर दी। पुलिस उस फोन को तलाशने लगी। एक दिन राजू के पापा के पास उसके अध्यापक का फोन आया। उन्होंने बताया कि राजू आजकल पढ़ाई में कम ध्यान दे रहा है, कुछ समस्या है क्या? राजू के पापा ने किसी भी समस्या से मना किया। पर अध्यापक की बातें सुन कर राजू के पापा परेशान हो गए। शाम को उन्होंने राजू से पूछा तो वह बोला- ‘नहीं पापा में पढ़ाई में ठीक हूं, बस थोड़ी तबियत खराब है इसलिए पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा हूं। अब कोई शिकायत नहींं मिलेगी।’ पापा संतुष्ट नहीं हुए, उन्हें राजू का व्यवहार कुछ अजीब लगा। अब वे राजू पर नजर रखने लगे। शाम को दफ्तर से आकर वे उसकी मां से उसके बारे मे पूछते तो वे बतातीं कि आजकल वह ऊपर स्टोर में ज्यादा समय बिताता है, मेरे पूछने पर वह कह देता है कि पढ़ाई कर रहा हूं। मेरे पास इतना वक्त नहीं घर के काम की वजह से कि ऊपर देख कर आऊं।

राजू के पापा को दाल में कुछ काला लगा। उधर पुलिस को फोन की लोकेशन पता लग गई, क्योंकि राजू उसको रोज इंटरनेट और गेम के लिए इस्तेमाल करता था। पापा ने राजू से एक दिन फिर पूछा कि तुम ऊपर स्टोर में कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहे हो। देखो, मुझे सच बता देना कहीं बाद मे पछताना न पड़ जाए। मगर राजू ने अपने पापा से झूठ कह दिया कि वह तो स्टोर में पढ़ाई करने जाता है। एक दिन दोपहर के समय पुलिस राजू के घर आई। पुलिस देख राजू और उसकी मां घबरा गए। राजू की मां ने उसके पापा को फोन करके बुलवा लिया। पापा ने पुलिस अफसर से आने का कारण पूछा तो उन्होंने फोन के बारे में बताया और कहा कि उनके आईटी सेल की टीम उस फोन की लोकेशन आपके घर में बता रही है, इसलिए उस फोन को तुरंत उनके हवाले किया जाए। राजू के पापा आश्चर्य से बोले- ‘मुझे तो कोई फोन नहीं मिला। हमारे घर में तो केवल मेरा और मेरी पत्नी का फोन है।’ राजू के पापा ने दोनों फोन उनको दिखा दिए। पर पुलिस अफसर गुस्सा हो गया और राजू के पापा से बोला- ‘वह फोन लाओ, जो तुमने चोरी किया है, वरना पुलिस स्टेशन चलो।’

राजू पुलिस स्टेशन चलने के नाम से घबरा गया। वह तुरंत स्टोर में गया और फोन और उसका सिम लाकर पुलिस अफसर को दे दिया। राजू के पापा फोन को देख चौंक गए। राजू बोला- ‘यह फोन मुझे सड़क पर मिला था। मैंने चोरी नहीं की है। मेरे पापा को पुलिस स्टेशन मत लेकर जाओ।’ वह अब अपने मम्मी-पापा की तरफ मुड़ा और रोते हुए बोला- ‘मुझे माफ कर दो, मुझे नहीं पता था कि जिस फोन को उठा कर लाया था उसकी वजह से पापा को पुलिस स्टेशन जाना पड़ेगा।’ पुलिस अफसर राजू की मासूमियत देख हंस दिया- ‘राजू, आगे से प्रण करो कि कोई भी चीज तुम्हें लावारिस मिले, तो उसे तुरंत पुलिस स्टेशन में दो। हो सकता है, वह वस्तु बम हो या फिर हो सकता है वह किसी आतंकवादी की हो, जिससे कि खतरा हो सकता है।’ राजू ने आंसू पोंछते हुए सहमति में सिर हिलाया।

पुलिस अफसर फोन लेकर और उसके पापा से कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करा कर चला गया। पर राजू अब भी गर्दन झुकाए खड़ा था। उसके पापा ने कहा- ‘राजू अगर तुम मुझे पहले बता देते, तो शायद यह सब नहीं होता।’ इतना सुन कर राजू रोने लगा। उसके पापा बोले- ‘लेकिन फिर भी तुमने सच बता कर अच्छा किया। अब आगे से ध्यान रखना और अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगाना।’ राजू ने आंसू पोंछे और अपनी मां से लिपट गया।