जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जेआरडी टाटा भारत के वायुयान उद्योग और अन्य उद्योगों के अग्रणी थे। वे दशकों तक टाटा समूह के निदेशक रहे और इस्पात, इंजीनीयरींग, होटल, वायुयान और अन्य उद्योगों का भारत में विकास किया। 1932 में उन्होंने टाटा एयरलाइंस शुरू की। भारत के लिए महान इंजीनियरिंग कंपनी खोलने के सपने के साथ उन्होंने 1945 में टेल्को की शुरुआत की, जो मूलत: इंजीनियरिंग और लोकोमोटिव के लिए थी।
व्यावसायिक जीवन
’10 फरवरी, 1929 को टाटा ने भारत में जारी किया गया पहला पायलट लाइसेंस प्राप्त किया। सन 1932 में उन्होंने भारत की पहली वाणिज्यिक एयरलाइन, टाटा एयरलाइंस की स्थापना की, जो बाद में वर्ष 1946 में भारत की राष्ट्रीय एयरलाइन, एयर इंडिया बनी।
’सन 1925 में वे एक अवैतनिक प्रशिक्षु के रूप में टाटा ऐंड संस में शामिल हुए। 1938 में उन्हें भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा ऐंड संस का अध्यक्ष चुना गया। दशकों तक उन्होंने स्टील, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, रसायन और आतिथ्य के क्षेत्र में कार्यरत विशाल टाटा समूह की कंपनियों का निर्देशन किया।
’उनकी अध्यक्षता में टाटा समूह की संपत्ति एक हजार लाख से बढ़ कर पांच अरब अमेरिकी डॉलर हो गई। उन्होंने अपने नेतृत्व में चौदह उद्यमों के साथ शुरुआत की थी, जो 26 जुलाई, 1988 को उनके पद छोड़ने के समय, बढ़ कर पंचानबे उद्यमों का एक विशाल समूह बन गया। उन्होंने 1968 में टाटा कंप्यूटर सेंटर (अब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) और 1979 में टाटा स्टील की स्थापना की।
’वे पचास वर्ष से अधिक समय तक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। उनके मार्गदर्शन में इस ट्रस्ट ने राष्ट्रीय महत्त्व के कई संस्थानों की स्थापना की, जैसे टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआइएसएस, 1936), टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टीआईएफआर, 1945), एशिया का पहला कैंसर अस्पताल, टाटा मेमोरियल सेंटर और प्रदर्शन कला के लिए राष्ट्रीय केंद्र।
’1945 में उन्होंने टाटा मोटर्स की स्थापना की। जेआरडी टाटा ने 1948 में भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के रूप में एयर इंडिया इंटरनेशनल का शुभारंभ किया। सन् 1953 में भारत सरकार ने उन्हें एयर इंडिया का अध्यक्ष और इंडियन एयरलाइंस के बोर्ड का निर्देशक नियुक्त किया। वे इस पद पर पच्चीस साल तक बने रहे।
’जेआरडी टाटा ने अपनी कंपनी के कर्मचारियों के हित के लिए कई नीतियां अपनाई। 1956 में उन्होंने कंपनी के मामलों में श्रमिकों को एक मजबूत आवाज देने के लिए प्रबंधन के साथ कर्मचारी एसोसिएशन कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने प्रति दिन आठ घंटे काम, निश्शुल्क चिकित्सा सहायता, कामगार दुर्घटना क्षतिपूर्ति जैसी योजनाओं को अपनाया।
पुरस्कार और सम्मान
जेआरडी टाटा को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारतीय वायु सेना ने उन्हें ग्रुप कैप्टन के मानद पद से सम्मानित किया था और बाद में उन्हें एयर कमोडोर पद पर पदोन्नत किया गया और फिर 1 अप्रैल, 1974 को एयर वाइस मार्शल पद दिया गया। विमानन के लिए उनको कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। 1955 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनके निस्वार्थ मानवीय प्रयासों के लिए 1992 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
निधन
29 नवंबर, 1993 को गुर्दे में संक्रमण के कारण जिनेवा में नवासी वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु पर भारतीय संसद उनकी स्मृति में स्थगित कर दी गई थी।

