बरसात में बीमारियों के खतरे अधिक होते हैं। ऐसे मौसम में खासकर बच्चों की सेहत को लेकर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। उन्हें बरसात में भीगना, कीचड़ में खेलना बहुत अच्छा लगता है, मगर इस तरह वे कई तरह की बैक्टीरिया और वायरस अपने साथ लेकर आते हैं। बच्चों को एक आदत और होती है- पशुओं के साथ खेलना, उन्हें छूना। अगर घर में पालतू जानवर हैं, तो वे ज्यादातर समय उन्हीं के साथ बिताते हैं। घर में अगर आपने कुत्ता, बिल्ली, खरगोश, चूहे वगैरह पाल रखे हैं तो उनसे आपके बच्चों को बीमारी लगने का खतरा हो सकता है। इसलिए आप खुद और बच्चों को भी इस बीमारी से दूर रखें।

इबोला, स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू जैसी खतरनाक बीमारियां जानवरों के जरिए ही फैसली हैं। बरसात के पानी में उनके कीटाणु मिले होने की आश्ंका अधिक होती है। इसके अलावा चूहे, गाय, बकरी आदि जानवरों की वजह से बीमारियां फैलती हैं और इंसान को लंबे समय तक के लिए बीमार करके चली जाती हैं। हालांकि इन बीमारियों का इलाज है, लेकिन सही समय पर सही कदम न उठाने से कई बार ये बीमारियां लोगों की जान भी ले लेती हैं। इन जानलेवा बीमारियों में से एक है लैप्टोस्पायरोसिस, जो घर में पलने वाले चूहों और तिलचट्टों की वजह से भी हो जाती है।

इन सामान्य कीटों और जानवरों की वजह से होने वाली जानलेवा बीमारी के बारे में पूरी जानकारी ही इससे बचने का सबसे सरल उपाय है। यह बीमारी लैप्टोस्पायर नाम के बैक्टीरिया की वजह से होती है, जो घरेलू पशुओं में पाए जाते हैं।

क्या है यह बीमारी

भारत के लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी होना इसलिए जरूरी है कि यहां देश की लगभग सत्तर प्रतिशत जनसंख्या आज भी गांव में रहती है और गांव में हर घर में घरेलू पशु पाले जाते हैं। हालांकि शहरों में भी इस बीमारी के कई मामले सामने आए हैं। शहरों में भी बहुत से लोग किसी न किसी रूप में पशु पालते हैं। इसलिए हर भारतीय का इस बीमारी के बारे में जानना जरूरी है। आइए, इस बीमारी के लक्षणों और उपचार के बारे में विस्तार से जानें।

लक्षण

  • इस बीमारी के कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन पर ध्यान देकर पता लगा सकते हैं कि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसके प्रमुख लक्षण हैं-
  • सिर दर्द या शरीर में दर्द
  • तेज बुखार होना
  • खांसी में खून निकलना
  • पीलिया भी इस बीमारी के कारण ही होता है
  • शरीर का लाल होना
  • शरीर में चकत्ते के रूप में दाने यानी रैशेज होना

कारण

घरेलू जानवरों के संपर्क में आना : अगर आपके घर में पालतू कुत्ता, बिल्ली, खरगोश या गाय आदि है तो आपको उनसे ये बीमारी फैल सकती है। इस बीमारी से ग्रस्त जानवर को अगर आप छूते हैं या उनके साथ खाते हैं तो बैक्टीरिया आपके शरीर में प्रवेश कर जाएंगे। दूसरी ओर अगर आपके घर में चूहों को यह बीमारी है, तो भी आपके संक्रमित होने की काफी संभावना है।

दूषित पानी : जानवरों के जूठे पानी में भी इस बीमारी के बैक्टीरियां मौजूद रहते हैं, जो हवा के द्वारा आपके शरीर में प्रवेश करते हैं। कई बार बरसात के पानी में इसके बैक्टीरिया होते हैं और जब आप उसके संपर्क में आते हैं, तो वे आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
मल-मूत्र के संपर्क में आना : घरेलू जानवरों द्वारा किए जाने वाले मल-मूत्र को छूने या उसके संपर्क में आने से भी यह बीमारी आपको हो सकती है।

उपचार और बचाव

यह कहना उचित होगा कि अभी इस बीमारी के बारे में लोगों को कम ही पता है। एक अध्ययन से पता चला है कि एक लाख लोगों में से एक में इस बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि लोग इस बीमारी को काफी कम जानते हैं।
किसी भी बीमारी से दूर रहने का सबसे अच्छा इलाज है उसके संपर्क में आने से बचाव।

  • अगर आप पहले से ही उस बीमारी से सतर्क रहते हैं तो आपको किसी भी तरह की बीमारी के होने की संभावना कम होती है।
  • अगर घरेलू जानवर बीमार पड़ गए हैं, तो उनका इलाज करवाएं और उनसे दूर रहें।
  • अगर इस बीमारी के कोई भी लक्षण दिखें तो आप अपने नजदीक के डॉक्टर के पास जाकर इलाज करवाएं। लैप्टोस्पायरोसिस के होने पर आपको एंटीबायटिक से आराम मिल सकता है। दर्द के लिए दर्द निरोधक टिकिया ली जा सकती है।
  • वैसे कई सालों के अनुसंधान से पता चला है कि एंटीबायटिक दवाएं इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक नहीं करती हैं।
  • फिर भी छह-सात दिन दवाई लेने के बाद आप इस बीमारी को लगभग खत्म कर सकते हैं।