संजीव शर्मा
एक समय था जब शादी-विवाह के मौकों पर लोग सुरक्षा के मद्देनजर हथियार लेकर चलते थे, लेकिन अब हथियारों का यह शौक लोगों की जान की दुश्मन बनता जा रहा है। हरियाणा और पंजाब में आए दिन शादी समारोहों के दौरान गोली चलने से बेगुनाह लोगों की मौत हो रही है और राज्य सरकारों द्वारा इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। विचित्र बात यह है कि शादी समारोह के दौरान गोली चलाने वाले और गोली का शिकार होने वाले लोग आपस में करीबी रिश्तेदार होते हैं, जिसके चलते ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्रवाई भी कई बार अपने आप ठंडे बस्ते में चली जाती है।
पिछले करीब एक वर्ष के दौरान हरियाणा और पंजाब में एक दर्जन से अधिक ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें शादी-विवाह के अवसर पर लोगों द्वारा शौकिया तौर पर चलाई गई गोली किसी बेगुनाह की जान जाने का कारण बन चुकी है। शादी समारोह में हथियार लेकर जाने की परंपरा वैसे तो वर्षों पुरानी है। पहले राजा-महाराजाओं के जमाने में शादी समारोहों में सुरक्षा की दृष्टि से हथियार रखे जाते थे। पर अब बदले समय में हथियार सुरक्षा के बजाय झूठी शान का सहारा बन गए। आलम यह है कि लोग अब शादी-विवाह ही नहीं, भगवती जागरण आदि जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में भी हथियार अपने साथ लेकर चलते हैं।
वैवाहिक समारोहों में गोलियां दागना भले उन लोगों का शौक रहा है, जिनके पास लाइसेंसी हथियार हैं, लेकिन अनेक मौतों के बाद भी जोश में होश गंवाने की ये घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में इस समय करीब एक लाख बयालीस हजार लाइसेंसी हथियार धारक हैं। बंदूकों के लाइसेंस लोगों को निजी सुरक्षा के लिए जारी किए जाते हैं, पर वास्तव में बहुत सारे लोग अपनी शानो-शौकत और दबंगई दिखाने की गरज से इन्हें लेकर चलते हैं। शादियों में बंदूक से गोली दागना शान समझा जाता है, इसलिए बहुत सारे लोग ऐसे लोगों से खास आग्रह करते हैं कि वे बंदूक लेकर जरूर आएं। कई जगह तो होड़ में गोली दागी जाती है। अगर लड़की वालों की तरफ से एक गोली दागी गई, तो लड़के वालों की तरफ से दो दागी जाती है। इसी होड़ और हड़बड़ी में अक्सर लोग मारे जाते हैं।
जागरूकता कहीं भी नजर नहीं आ रही। पिछले साल हरियाणा के गुल्हा-चीका के एक विवाह समारोह में गोली लगने से दूल्हे की मौत हो गई, जो स्विट्जरलैंड से सात फेरे लेने आया था। इस घटना में न सिर्फ दूल्हे की मौत हुई थी, बल्कि उसका भाई भी गोली लगने से घायल हो गया था। इस मामले में पीड़ितों के परिजनों ने प्रारंभिक कार्रवाई तो की, लेकिन बाद में मामला धीरे-धीरे शांत हो गया, क्योंकि गोली चलाने वाला उन्हीं का रिश्तेदार था। जांच में कहा गया कि दूल्हा विदेश से आया था और खुशी में चलाई गई गोली से उसकी जान चली गई। पिछले साल ही पानीपत के कृष्णा गार्डन में एक शादी समारोह में चली गोली से वहां का चौकीदार गंभीर रूप से घायल हो गया था। वहां गांव मच्छरौली से बारात आई हुई थी। समारोह के दौरान शराब के नशे में धुत दूल्हे के भाई ने डीजे बंद करने को लेकर हुए विवाद में गोली चला दी, जो वहां तैनात चौकीदार की जांघ में लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उस चौकीदार का कसूर केवल इतना था कि देर रात बारह बजे वह डीजे बंद कराने के लिए स्टेज पर गया था, जहां दूल्हे के भाई ने उस पर गोली चला दी।
हरियाणा में पानीपत ही नहीं, 2016 में करनाल जिले में एक ऐसा कांड हो गया था, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी। वहां एक शादी समारोह में भाग लेने पहुंची एक साध्वी ने गोली चला दी थी। साध्वी ने मस्ती में डांस करते हुए गोली चलाई थी। इस तरह उनका संतुलन बिगड़ गया था, जिससे एक महिला की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए थे। इस मामले में साध्वी कई माह तक जेल में भी रहीं। शादी समारोह में गोली चलने से होने वाली मौत की घटनाओं के मामले में हरियाणा ही नहीं, पंजाब भी काफी आगे है। पंजाब में इस समय करीब तीन लाख साठ हजार लाइसेंसी बंदूक धारक हैं। पंजाब के कोटकपुरा में पिछले साल शादी समारोह के दौरान कुछ लोगों ने गोली चलाई और एक बच्चे की मौत हो गई और एक अन्य बच्चा घायल हो गया।
इसी साल फरवरी में पंजाब के होशियारपुर स्थित छत्ता बाजार में शादी समारोह के जश्न के दौरान चली गोली से एक युवती की मौत हो गई। मृतका जालंधर के एक कॉलेज में एमबीए की छात्रा थी। वह शादी वाले घर के पड़ोस में रहती थी। शादी के चलते वहां जागो निकाली गई थी। पड़ोस में रहने वाली लड़की और उसके परिवार वाले अपनी छत से कार्यक्रम देख रहे थे। डांस के दौरान शराब के नशे में दुल्हन के पिता और उसके दोस्त ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली लड़की के माथे में लगी और उसकी मौत हो गई। इससे पहले राज्य के बठिंडा में भी शादी समारोह के दौरान नशे में धुत युवकों द्वारा गोली चलाए जाने से आरकेस्ट्रा गु्रप की एक नर्तकी की मौत हो गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा और पंजाब सरकारों द्वारा जिला उपायुक्तों के माध्यम से अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में यह निर्देश जारी किए गए हैं कि रात दस बजे के बाद ऊंची आवाज में डीजे नहीं चलाया जाएगा। इस संबंध में सभी मैरिज पैलेसों के बाहर बकायदा चेतावनी बोर्ड भी लगे हुए हैं। इसके बावजूद अधिकतर स्थानों पर रात दस बजे के बाद ही महफिल सजती है और यही चूक हादसों का कारण बनती है। इस प्रकरण में संबंधित जिला प्रशासन द्वारा आदेश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल कराने का कोई प्रयास नहीं किया जाता है। पिछले तीन वर्षों के दौरान हरियाणा और पंजाब में शादी समारोह के दौरान गोली चलने से मौत की घटनाएं तो बहुत हुई हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रात दस बजे के बाद डीजे चलाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पहले हुई घटनाओं के मद्देनजर हरियाणा के पूर्व गृहसचिव रामनिवास ने बाकायदा एक आदेश जारी करके पुलिस को निर्देश दिए थे कि पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि शादियों में ऐसे हथियार न पहुंचें। अगर कोई मिले, तो समुचित कार्रवाई हो और हथियार जब्त किए जाएं, पर इन आदेशों का आज तक अनुपालन नहीं हुआ। नियमानुसार अगर शादी विवाह के अवसर पर किसी भी हथियार द्वारा हवाई फायर किया जाता है तो यह भी एक अपराध है और इस अपराध के लिए छह महीने तक की सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद न तो इन हादसों में जान गंवा चुके लोगों के परिजन और रिश्तेदार गंभीर हुए हैं और न ही सरकार ऐसे मामलों को लेकर संजीदा है।
हरियाणा फोटोग्राफर संघ के प्रांतीय प्रवक्ता संजीव कुमार के अनुसार इस फैसले को सख्ती से लागू किया जाना बेहद जरूरी है। फोटोग्राफर संघ ने करीब एक साल पहले मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर शादी समारोहों में हथियारों पर पाबंदी लगाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने पंजाब के बठिंडा में शादी के अवसर पर एक डांसर की गोली लगने से हुई मौत के बाद यह आदेश जारी किए हैं, जबकि इससे पहले हरियाणा में भी इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं। इसी प्रकार का एक हादसा भिवानी में एक फोटोग्राफर के साथ भी हुआ। उसके बाद फोटोग्राफर संघ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात करके ज्ञापन सौंपा था, जिसमें यह मांग की गई थी कि शादी समारोह में हथियार ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब सरकार यह आदेश सख्ती से प्रभावशाली ढंग से लागू करवाए।
पंजाब के चिंतक और एक्टीविस्ट राजबीर सिंह लालडू का मानना है कि शादी विवाह के दौरान हथियारों के इस्तेमाल का चलन पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ गया है। इस मामले में सरकारों को सख्त कानून बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस जारी करते समय प्रशासन को यह शर्त रखनी चाहिए कि अगर कोई व्यक्ति अपने हथियार का इस्तेमाल शादी-विवाह में करता है और किसी घटना का कारण बनता है, तो उसका बिना किसी देरी के लाइसेंस रद्द होना चाहिए। यही नहीं, असलाह बेचने वाले डीलरों को भी चाहिए कि वे संबंधित व्यक्ति से शपथ पत्र लें, जिसमें वह इस बात का विश्वास दिलाए कि वह गोली, कारतूस आदि का इस्तेमाल इस तरह के कार्यक्रमों में नहीं करेगा। सरकार ने अगर कोई ठोस कानून नहीं बनाया तो इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ती रहेंगी।
हरियाणा कॉडर के पूर्व आइपीएस आइजी रणबीर सिंह शर्मा यह चलन पिछले पांच से सात वर्षों के दौरान ज्यादा बढ़ा है। उसे पहले इस तरह की घटनाएं नहीं होती थी। इसके लिए पुलिस प्रशासन, हथियारों की खरीद-फरोख्त करने वाले और आम लोग सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। शर्मा का तर्क है कि पहले की हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश आदि में हुई घटनाओं में यह बात भी सामने आई है कि लोग शादी-विवाह को रंजिश निकालने का माध्यम बनाने लगे हैं। कुछ समय पहले दिल्ली में एक कुख्यात बदमाश शादी समारोह के दौरान हुए गैंगवार में मारा गया था। इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति समाज को गलत दिशा में लेकर जा रही है। यह गंभीर चिंता का विषय है।
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक बीएस संधू का दावा है कि हरियाणा के सभी जिलों में पुलिस को ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस की सजगता के चलते पिछले कुछ समय से ऐसे मामलों में कमी आई है। उधर पंजाब के पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा का दावा है कि सभी जिला उपायुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मैरिज पैलसों पर नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस मामले में हथियार कारोबारियों को भी निर्देश जारी किए जा रहे हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए लोगों को न केवल जागरूक होना पड़ेगा, बल्कि शादी-विवाह के अवसरों पर हथियार लेकर जाने से भी गुरेज करना होगा। १
हथियार विक्रेता कर रहे मनमानी
शादी विवाह के अवसरों पर होने वाली गोलीबारी की घटनाओं में जहां आम लोगों को दोषी माना जा रहा है, वहीं हथियार विक्रेता भी नियम-कायदों के पालन में मनमानी कर रहे हैं। नियमानुसार एक लाइसेंसधारी केवल पच्चीस कारतूस खरीद सकता है, पर शस्त्र बेचने वाली दुकानों पर कारतूस खरीदने को लेकर कोई रोक-टोक नहीं। मनचाहे तरीके से वे कारतूस बेच रहे हैं, जिसके चलते कारतूसों का मनमाना उपयोग हो रहा है और हादसे घटित हो रहे हैं।
पंशादी समारोह में हुई थी गैंगवार
जाब में शादी समारोह के दौरान अक्सर गोली चलने की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पंजाब में सक्रिय कई कुख्यात अपराधी अपने विरोधी से बदला लेने के लिए शादी समारोह को चुनते हैं। पंजाब में एक शादी समारोह के दौरान हुई गैंगवार की घटना आज भी चर्चा का विषय है। पिछले साल ही भारत-पाकिस्तान के सीमावर्ती जिला अमृतसर के गांव घरिंडा के एसबी रिसॉर्ट में शादी के दौरान उस वक्त हाहाकार मच गया, जब दो प्रतिद्वंद्वी गुटों में जम कर गोलीबारी होने लगी। इस गोलीबारी के दौरान दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार लोग जख्मी हो गए।
गांव खापड़ खेड़ी में आयोजित उस दौरान जब सभी लोग शादी की खुशियां मनाने में व्यस्त थे, तभी अचानक कुछ हथियारबंद लोग समारोह में आए और ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी। गोलियां लगने से दो लोगों की मौत हो गई और चार लोग घायल हो गए। जिस व्यक्ति को निशाना बना कर गोलीबारी शुरू हुई थी, उसके साथियों ने भी बचाव के लिए फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना का खमियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ा, जिनकी किसी के साथ कोई दुश्मनी नहीं थी।
