विधान चंद्र राय भारतीय चिकित्सक, शिक्षाविद, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे। उनके जन्मदिन यानी एक जुलाई को देश में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के रूप में मनाया जाता है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
बिधान चंद्र राय का जन्म पटना के बांकीपुर में हुआ। उनके पिता प्रकाश चंद्र राय एक्साइज इंस्पेक्टर थे। उनकी माता एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। बिधान पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनका प्रारंभिक जीवन अभावों में बीता। उन्होंने पटना कॉलेजिएट स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। इंटरमीडिएट की पढ़ाई कोलकाता से और पटना विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की।
डिग्री लेने के बाद उन्होंने मेडिकल की प्रवेश परीक्षा पास की और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। एमबीबीएस डिग्री के बाद बिधान इंग्लैंड के सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल से मेडिसिन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त करना चाहते थे। एशियाई मूल का होने के कारण प्रवेश के लिए उनका आवेदन तीस बार अस्वीकृत हुआ। बड़ी कठिनाई से उन्होंने न सिर्फ सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल में दाखिला लिया, बल्कि दो साल तीन महीने में ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
करिअर
इंग्लैंड से लौटने के बाद उन्होंने सबसे पहले कलकत्ता मेडिकल कॉलेज, बाद में कैंपबेल मेडिकल स्कूल और फिर कारमाइकल मेडिकल कॉलेज में पढ़ाया। वे इस कॉलेज के अध्यक्ष एवं जीवन पर्यंत ‘प्रोफेसर आॅफ मेडिसिन’ रहे। कलकत्ता और इलाहबाद विश्वविद्यालयों ने डॉ राय को डीएस-सी. की सम्मानित उपाधि प्रदान की थी।
समाज सेवा और राजनीति
बिधान चंद्र राय का मानना था कि स्वराज एक सपना ही रहेगा, जब तक कि लोग स्वस्थ और मजबूत नहीं होंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने कई अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज की नींव रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। महिलाओं को नर्सिंग और सोशल वर्क में प्रशिक्षण देने के लिए ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की। इसके अलावा उन्होंने लोकहित में अनेक कार्य किए।
डॉ राय ने 1925 में राजनीति में प्रवेश किया। वे बंगाल विधान परिषद के चुनाव में बैरकपुर निर्वाचन क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए और सुरेंद्रनाथ बनर्जी जैसे दिग्गज राजनेता को पराजित किया। 1928 में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के लिए चुना गया। डॉ. राय ने 1929 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य के रूप में सविनय अवज्ञा आंदोलन में जेल यात्रा भी की। वे सालों तक कलकत्ता कॉर्पोरेशन के सदस्य रहे तथा 1931 से 1933 तक कलकत्ता के मेयर के रूप में कार्य किया। मेयर के पद पर रहते हुए उन्होंने मुफ्त शिक्षा, मुफ्त चिकित्सा सहायता, बेहतर सड़कें, रोशनी और जल आपूर्ति के लिए काफी काम किया। 23 जनवरी, 1948 को वे बंगाल के मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए और जीवन पर्यंत इस पद पर बने रहे।
उपलब्धियां और सम्मान
डॉ. बिधान चंद्र राय राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के सदस्य और अध्यक्ष पद पर रहे। देश के औद्योगिक विकास, चिकित्सा जगत और शिक्षा की उन्नति में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। 1961 में चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी महान उपलब्धियों और देश को प्रदत्त महती सेवाओं के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया गया। यही नहीं, 1962 में बीसी राय राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना भी की गई। यह पुरस्कार चिकित्सा, राजनीति, विज्ञान, दर्शन, साहित्य और कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।

