
प्रेम और शृंगार भारतीय लेखकों का उपजीव्य रहा है।


भला कौन उम्मीद करेगा कि प्रेम की इतनी सघन, सांद्र, विकल, आवेगमयी, कामातुर कविता रघुवीर सहाय ने लिखी होगी!


पूरी कॉलोनी में बस एक यही पेड़ बचा है हमारे लिए।’ नीतू गौरिया ने चुलबुल तोते से कहा। ‘मुझे तो…


1951-52 में पहले लोकसभा चुनाव में कुल चौबीस महिलाएं चुनाव जीत कर आई थीं, उनमें राजकुमारी अमृत कौर भी थीं।


अकबर पदमसी की कृतियों की एक विरल विषय वस्तु बल्कि पृष्ठभूमि में भी कोई अस्पष्ट जाल-सा बुनता है।


उसने पौधे को ध्यान से देखा। बहुत ही छोटे-छोटे दिल वाला यह मनी प्लांट बिकने के लिए उतावला है।

निरंतर अभ्यास तथा वैराग्य से इस कठिन मार्ग को पार कर परमात्मा का साक्षात्कार होता है।
