अगर निराशा, अरुचि, तनाव, अशांति, लाचारी जैसे मनोभाव आ रहे हैं, तो आपको संभल जाना चाहिए। मनोविज्ञान के मुताबिक ये सभी लक्षण अवसाद के हैं। इसे रोग या सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती है। यह एक ऐसा रोग है, जिसमें पीड़ित आत्महत्या तक कर लेता है। मूलत: अवसाद मानसिक बीमारी है, लेकिन इसके भौतिक कारण भी अनेक हैं। जैसे कुपोषण, आनुवंशिकता, हार्मोन की गड़बड़ी, नशे की लत आदि। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में तीस लाख लोग अवसाद से पीड़ित हैं। 2016-17 में भारत में छत्तीस फीसद लोग अवसाद से पीड़ित थे। भारत में हर एक लाख व्यक्तियों पर 10.9 औसत आत्महत्या दर है। आत्महत्या करने वालों में चौवालीस साल से कम उम्र के लोग हैं। अवसाद के मामलों में चीन की स्थिति भी भारत की तरह ही है। चीन मानसिक स्वास्थ्य पर 2.35 फीसद ही खर्च करता है।

कारण: एम्स में मनोचिकित्सक डॉक्टर राजेश सागर के मुताबिक, समाज का बदलता दौर, तनाव, बच्चों की पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक समस्याएं आदि अवसाद की वजह माने जाते हैं। राजेश सागर का कहना है कि बाइपोलर अवसाद में कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए बहुत खुश रहता है और कुछ समय के लिए बहुत निराश। इस स्थिति में मूड स्विंग्स होते हैं। वे बताते हैं कि अवसाद दो हफ्ते का होता है। यह एपिसोड में होता है। अवसाद दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी के कारण भी होता है। न्यूरोट्रांसमीटर्स दिमाग में पाए जाने वाले रसायन होते हैं, जो दिमाग और शरीर के विभिन्न हिस्सों में तारतम्यता स्थापित करते हैं। न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी की वजह से शरीर की संचार व्यवस्था में भी कमी आती है और व्यक्ति में अवसाद के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस तरह के अनुवाद को आनुवांशिक अवसाद कहते हैं। हाल के दिनों में अवसाद की एक प्रमुख वजह अधिक महत्त्वकांक्षी होना भी देखी गई है। डॉक्टर राजेश सागर के मुताबिक आजकल प्रतिस्पर्धा का दौर है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा महत्त्वकांक्षा की ओर ले जाती है। जब महत्त्वकांक्षाएं पूरी नहीं होतीं तब लोग अवसाद से ग्रस्त होते हैं। तो वहीं उपेक्षा भी अवसाद की वजह मानी जा सकती है। उपेक्षा परिवार, कामकाज की जगह आदि किसी भी स्थान पर हो सकती है।

लक्षण और समस्याएं: अवसाद को पहचानना मुश्किल नहीं है। कई बार ऐसा होता है कि आप लंबे समय तक निराश रहते हैं। परिचितों में भी रुचि नहीं दिखाते हैं। दुनिया बेमानी लगने लगती है। अकेले रहना पसंद करते हैं। किसी भी सामाजिक गतिविधि में मन नहीं लगता है। खुद को अकेला महसूस करते हैं। ये सभी परिस्थितियां अवसाद से पीड़ित व्यक्ति को झेलनी पड़ती हैं। अवसाद के कारण निर्णय लेने में अड़चन, आलस्य, सामान्य मनोरंजन की चीजों में अरुचि, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन या कुंठा व्यक्ति में दिखाई देने लगती है। अवसाद के प्रमुख कारणों में चिंता है। किसी भी विषय पर अधिक समय तक सोचना और नकारात्मक बातें सोचना अवसाद की ओर ले जाता है।

बचाव: डॉक्टर राजेश सागर के मुताबिक अवसाद से पीड़ित व्यक्ति को मानसिक बीमारी होती है। वे बताते हैं कि अवसाद को लेकर लोगों में जागरूकता कम है, लेकिन पहले के मुताबिक लोग अधिक सजग हो रहे हैं। वे बताते हैं कि अगर आप लंबे समय से अवसाद में हैं या लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो मनोचिकित्सक से मिलें। इसे छिपाएं नहीं। अवसाद से बचने के लिए योग एक सही तरीका है। बहुत से ऐसे शोध हुए हैं, जिनमें पाया गया है कि योग से निरोग हुआ जा सकता है। डॉक्टर राजेश सागर बताते हैं कि अवसाद से बचने का तरीका है कि आप पहले अपनी समस्या समझें। अगर किसी बात का तनाव है, तो उसे कम करें। हमेशा खुश रहें और सकारात्मक सोचें।