मानस मनोहर

साबूदाने की खिचड़ी: साबूदाने की खिचड़ी सामान्य नाश्ते के तौर पर आम घरों में खाई जाती है। इसे बनाने का तरीका बहुत सारे लोग जानते हैं। पर सूखी और भुरभुरी खिचड़ी बनाना थोड़ा कौशल की मांग करता है। साबूदाने की खिचड़ी आलू के साथ बनाएं, तो इसका स्वाद बढ़ जाता है। इसके लिए खिचड़ी बनाने से करीब दो घंटा पहले साबूदाना भिगो दें। पानी इतना ही डालें, जिससे बस साबूदाने की सतह तक पानी आए। अधिक पानी डालने से साबूदाने चिपचिपे हो जाएंगे। कुकर में दो आलू उबाल लें और उन्हें छील कर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर एक तवा गरम करें और उस पर कच्ची मूंगफली के दाने सुनहरा होने तक भून लें। मूंगफली को रगड़ कर उसका छिलका उतार लें और फिर ठंडा होने पर कुछ दानों को साबुत अलग रखें और बाकी को मिक्सर में डाल कर पीस लें।

भीगे हुए साबूदाने को देखें, उसने सारा पानी सोख लिया होगा। अगर फिर भी पानी बचा रह गया है, तो छन्नी में छान कर साबूदाने का सारा पानी सुखा लें। साबूदाने का सारा पानी निचुड़ जाना चाहिए। उसकी बाहरी सतह पर पानी नहीं दिखना चाहिए। चाहें, तो थोड़ी देर हवा में फैला कर रख दें, पानी सूख जाएगा।
अब इसमें कटा हुआ आलू डालें। इसके साथ ही धनिया पाउडर, काली मिर्च पाउडर और अगर चाहें, तो आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च डालें। फिर पिसी हुई मूंगफली डाल कर ठीक से मिला लें। इस तरह साबूदाने की सतह पर जो बची हुई नमी होगी, वह सूख जाएगी। इसी के साथ जरूरत भर का काला या सेंधा नमक मिला लें। फिर एक कड़ाही में एक चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें राई, जीरा और कढ़ी पत्ते का तड़का दें और फिर साबूदाना डाल कर मद्धिम आंच पर चलाते हुए थोड़ी देर के लिए पकाएं। पानी बिल्कुल न डालें, नहीं तो साबूदाने भुरभुरे नहीं रहेंगे, आपस में चिपक जाएंगे। थोड़ी देर बाद आंच बंद कर दें और कड़ाही को ढंक कर छोड़ दें। दस मिनट बाद ढक्कन खोलें और उसमें साबुत भुने हुए मूंगफली के दाने डालें और सावधानी से चलाते हुए साबूदाने के दाने-दाने को अलग करते हुए मिलाएं। साबूदाने पक कर तैयार हैं। इस पर हरा धनिया पत्ता और अदरक के लच्छे से डाल कर सजाएं और गरमागरम परोसें। इसके साथ चाहें तो मिठी लस्सी भी ले सकते हैं।

आलू का हलवा: आलू हर घर में सहजता से उपलब्ध रहने वाला खाद्य है। जब अनाज न खा रहे हों, तब आलू पोषण संबंधी कई जरूरतें पूरी कर देता है। व्रत में अगर उचित मात्रा में नमक और चीनी न लिया जाए, तो थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है। ऐसे में आलू का हलवा पेट भरने और शरीर को ऐआवश्यक ऊर्जा देने- दोनों दृष्टियों से उपयुक्त खाद्य है। आलू का हलवा बनाना बहुत आसान है। इसमें बहुत विशेषज्ञता की आवश्यकता नहीं होती। अगर इसमें पड़ने वाली सामग्री की मात्रा कुछ असंतुलित भी हो जाए, तो इसके बिगड़ने का खतरा नहीं होता। आलू का हलवा बनाने के लिए पहले आलुओं को उबाल लें। छिलका उतार कर उन्हें कद्दूकस कर लें। इससे गांठे रहने का खतरा नहीं रहता। फिर चम्मच से दबाते हुए मसल लें।

फिर एक कड़ाही में डेढ़-दो चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें मसले हुए आलुओं को डाल कर चलाएं। फिर जितना आलू लिया है उसकी तिहाई मात्रा चीनी लें और फिर उसमें एक या डेढ़ कप दूध डाल कर चलाते रहें। दूध की मात्रा इतनी ही रखें, जिससे चीनी ठीक से घुल जाए और हलवा नरम रहे, सख्त न बने। हलवा में रंग अच्छा आए, इसके लिए चाहें, तो थोड़ी देर पहले दूध में केसर के कुछ दाने डाल कर छोड़ दें। इससे रंग बहुत सुंदर आता है, स्वाद भी बढ़ जाता है। दूध डालने के बाद हलवा को मद्धिम आंच पर लगातार चलाते रहें। जब हलवा सूख जाए, तो उसमें कुटे हुए कुछ इलाइची के दाने और अपनी पसंद के सूखे मेवे डालें और सब कुछ को ठीक से मिला लें। आंच बंद कर दें। ऊपर से एक चम्मच देसी घी डाल कर मिलाएं। इससे हलवा में चमक आ जाती है। गरमा-गरम खाने को परोसें। आलू का हलवा ठंडा होने के बाद खाने में उतना अच्छा नहीं लगता, जितना गरम खाने पर लगता है। इसलिए अगर हलवा ठंडा हो गया है, तो उसे गरम करके ही खाएं।