मानस मनोहर

राजमा-चावल की बात चले तो स्वादेंद्रियां स्वत: सक्रिय हो जाती हैं। राजमा न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में बड़े चाव से खाया जाता है। दरअसल, यह पौष्टिकता और स्वाद दोनों की दृष्टि से सर्वप्रिय दलहन है।

मूल

राजमा का जन्म अमेरिका में माना जाता है। वहां से यह दुनिया के दूसरे देशों में फैला। इसे अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। कई देशों में इसे किडनी बीन्स या रेड बीन्स के नाम से पहचाना जाता है। वैसे इसका वैज्ञानिक नाम फैजियोलस बल्गेरिस है। इसे अमेरिका के अलावा अफ्रीका और यूरोप के देशों में भी उगाया जाता है। एशिया के ज्यादातर देशों में इसकी पैदावार होती है। भारत में कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के अलावा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसकी अच्छी पैदावार होती है।

प्रकार

राजमा आमतौर पर तीन तरह का होता है- गेहुआं रंग का, चित्रा और गहरा बादामी, जिसे काला राजमा भी कहते हैं। काला राजमा आकार में छोटा होता है और कश्मीर के इलाके में अधिक पैदा होता है।

गुण

दलहनी फसलों में राजमा प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें करीब सत्ताईस फीसद प्रोटीन की मात्रा होती है। इसके अलावा इसमें आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और विटामिन बी-9 भी खूब पाया जाता है। इसमें मौजूद मैगनीज, एंटी-आॅक्सीडेंट का काम करता है। इसमें मौजूद विटामिन ‘के’ बाहरी त्वचा को ऐसे नुकसानदेह तत्त्वों से सुरक्षा प्रदान करता है, जो कैंसर जैसे रोगों का कारण बनते हैं। यह दिमाग और स्नायु तंत्र (नर्वस सिस्टम) को सक्रिय बनाए रखता है। अल्जाइमर जैसी बिमारी से दूर रखता है। यह माइग्रेन की समस्या को दूर कर सकता है। राजमा में मौजूद घुलनशील फाइबर शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम करते हैं। चूंकि राजमा प्रोटीन का भी बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसलिए दोनों मिल कर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।

उपयोग

भारत में आमतौर पर इसका इस्तेमाल दाल और सब्जी के रूप में किया जाता है। दरअसल, राजमा दाल भी है और सब्जी भी। इसे दल कर दाल की तरह भी खाया जाता है और उबाल कर टमाटर-प्याज वगैरह मिला कर सब्जी के रूप में भी उपभोग किया जाता है। इसकी कच्ची फलियों की सब्जी हर जगह बड़े चाव से खाई जाती है। इसकी कच्ची फलियों को भारत में फ्रेंच बीन्स के नाम से जाना-पहचाना जाता है। इस तरह चने के बाद राजमा सबसे बहुपयोगी और गुणकारी खाद्य है।

क्या बनाएं, कैसे बनाएं

भारत में आमतौर पर राजमा उबाल कर, प्याज-टमाटर के साथ मसाले मिला कर खाने का चलन है। इसे बनाने का तरीका भी प्राय: रूढ़ है। पहले राजमा को रात भर भिगोएं, उबाल कर नरम कर लें, फिर टमाटर-प्याज और मसाले भूम कर उसमें राजमा को मिला दें। कुछ लोग प्याज-टमाटर को मिक्सी में पीस कर पहले पेस्ट बना लेते हैं, फिर उसे भूनते हैं। प्राय: यही तरकीब सभी अपनाते हैं। मगर यह थोड़ा समय अधिक लेता है। अब आप राजमा पकाने का एक आसान तरीका अपनाएं और उसका स्वाद देखें। ’राजमा को रात भर भीगने दें। सुबह उसका पानी निथार लें। चाहें तो उस पानी का बाद में उपयोग कर सकते हैं। राजमा को पतले कपड़े में लपेट कर दिन भर के लिए रख दें। अगर उसमें हल्का अंकुरण हो जाए तो बेहतर।

’शाम को राजमा के अनुपात में प्याज, टमाटर, लहसुन मोटा-मोटा काट लें। बारीक काटना चाहें तो काट सकते हैं, पीसने की जरूरत नहीं। प्रेशर कुकर में भरपूर देसी घी डाल कर जीरा, साबुत सूखा धनिया, अजवायन, बड़ी इलाइची, तेजपत्ता और हींग का तड़का लगाएं और प्याज, टमाटर, लहसुन को उसमें हल्का भून लें। उसी में नमक, हल्दी और राजमा मसाला डाल कर मिला लें। प्याज-टमाटर थोड़े नरम हो जाएं तो उसमें राजमा मिला दें और बस इतना पानी मिलाएं, जिससे राजमा ढक जाए। धीमी आंच पर रख कर कम से कम आधे घंटे तक पकने दें। सात-आठ सीटी आने दें। गैस बंद करके कुकर को शांत होने दें। पूरी भाप निकल जाए तो ढक्कन खोल कर राजमा को तेज-तेज घोटें। आप देखेंगे कि प्याज और टमाटर गल कर ग्रेवी का रूप ले चुके हैं। अगर ऐसा नहीं हो रहा तो एक-दो सीटी और लगा लें। इस तरह राजमा पकाने से टमाटर-प्याज-लहसुन और मसालों का स्वाद सीधे राजमा अवशोषित कर लेगा और पहले पानी में उबालने से जो फीकापन आ जाता है, वह नहीं रहेगा। घोटने के बाद अगर पानी कम लग रहा है तो थोड़ा गरम पानी और मिला लें (ठंडा पानी न मिलाएं) और कुकर को बंद करके तेज आंच पर एक सीटी और लगा लें। उतार कर हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक के लंबे-बारीक कटे टुकड़े उसमें मिला दें।

लहसुन-प्याज-टमाटर के बगैर

जो लोग लहसुन, प्याज, टमाटर नहीं खाते वे दही के साथ राजमा पका सकते हैं। इसके लिए राजमा को भिगोने की प्रक्रिया वही रखें, जो पहले बताई गई है। फिर राजमा को पानी में नमक के साथ पांच-छह सीटी तक उबाल लें। राजमा बिल्कुल नरम हो जाना चाहिए। उबले हुए राजमा को निथार कर ठंडा करें। पानी को अलग रख लें।
ठंडा राजमा में निथरा हुआ दही मिलाएं और उसी में हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और राजमा मसाला मिला कर पंद्रह-बीस मिनट के लिए रख दें। एक कड़ाही में घी गरम करें और जीरा, राई, अजवायन, बड़ी इलाइची, तेजपत्ता और हींग का तड़का लगा लें। फिर दही मिला राजमा कड़ाही में डाल कर धीमी आंच पर लगातार चलाते रहें। जैसे कढ़ी बनाते समय चलाते रहते हैं। जब राजमा घी छोड़ने लगे तो उबालने के बाद जो पानी निथार कर रखा था, उसे उसमें मिला दें और चलाते हुए उबाल आने दें। पक जाने के बाद धनिया पत्ता, हरी मिर्च और अदरक से सजाएं और स्वाद लें।  जो लोग दही पसंद न करते हों, वे उसकी जगह कच्चे नारियल को मिक्सी में पीस कर उसके दूध का उपयोग कर सकते हैं।
वैसे भोजन लगातार प्रयोग करने से नए-नए स्वाद देता है। प्रयोग करते रहें, राजमा पकाने के और तरीके निकाले जा सकते हैं।

राजमा स्नैक्स

राजमा केवल चावल या रोटी के साथ खाने की चीज नहीं है। उसके कटलेट भी बनाए जा सकते हैं। सूप बन सकता है। सलाद के साथ खाया जा सकता है। पापड़ कोन में भर कर इसका कुरकुरा स्वाद लिया जा सकता है। बहुत सारे देशों में पास्ता के साथ इसे पका कर खाया जाता है। राजमा पुलाव बन सकता है। बीमार लोगों को इसका सूप पिलाना स्वास्थ्य वर्धक माना जाता है। अगले अंक में राजमा से बनने वाले दूसरे व्यंजनों के बारे में बात करेंगे।