राजेंद्र श्रीवास्तव
मच्छर भाई
मच्छर भाई राम-राम
हाथ जोड़ कर तुम्हें प्रणाम
बड़े बड़े तुमसे डरते हैं
कहने को छोटा है नाम।
तुम कितने दुबले पतले हो
हड््डी का न नाम निशान
लेकिन बड़े पहलवानों की
कर देते आफत में जान।
रोटी दाल-भात ना खाते
मीठा देख नहीं ललचाते
धीमे से भी फूंक दिया तो
पूरे पांच फीट उड़ जाते।
पास हमारे जब भी आते
सारे रोम खड़े हो जाते
नानी याद हमें आ जाती
जब तुम भन-भन भन्नाते।
जहां है कीचड़, पानी, घास
वही तुम्हारा प्रिय आवास
जो स्वच्छ रखते घर अपना
उनके नहीं फटकते पास।
दिल्ली हो या देहरादून
जब आता है तुम्हें जुनून
होकर मस्त रात-दिन गाते
चूस चूस कर सबका खून।
केवल खून चूसकर भी तो
तुमको आता नहीं है चैन
फैलाते हो रोग मलेरिया
खानी पड़ती हमें कुनैन।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
कांची / कांजी
कमर में पहने जाने वाला एक प्रकार के जेवर को कांची कहते हैं। कांची यानी करधनी, मेखला। कांची हिंदुओं की सात पुरियों में से एक पुरी का भी नाम है। जबकि कांजी एक प्रकार के खट्टे शर्बत को कहते हैं, जो राई आदि घोल कर बनाया जाता है।
चपल / चप्पल
जो स्थिर या शांत न रहता हो, उसे चपल कहते हैं। चपल का अर्थ है चंचल, चुलबुल, उतावला, जल्दबाज, चतुर। जबकि चप्पल पांव में पहने जाने वाले खुले जूते के एक प्रकार को कहते हैं। चप्पल तो आप भी पहनते हैं।
