पिछले दो साल में कोरोना संक्रमण ने लोगों को सेहत के प्रति खासा जागरूक किया है। इसी का नतीजा है कि लोग अब समझने लगे हैं कि रोग-दुख से मुकाबले के लिए संतुलित जीवनशैली और खानपान बेहद जरूरी है। यही नहीं, सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसी समस्या को अब लोग हल्के में नहीं लेते हैं। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के लक्षण के तौर पर भी इन्हीं बातों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
रोग-प्रतिरोध
इस संबंध में कुछ बुनियादी बातें समझने की हैं। जहां तक सवाल कोरोना के संक्रमण का है तो यह भी एक तरह का फ्लू ही है, जिसके लक्षण आमतौर पर सर्दी-जुकाम जैसे दिखते हैं, जैसे कफ, गले में सूजन, सिरदर्द, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ। तमाम फ्लू की तरह यह भी उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है, जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता यानी ‘इम्युनिटी’ कमजोर होती है। इसलिए सबसे जरूरी है कि हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाएं रखें।
आजकल रोग-प्रतिरोधक क्षमता के बारे में खूब चर्चा हो रही है। दवा दुकानों पर इसके लिए कई तरह के पेय और चूर्ण बेचे जा रहे हैं। पहली बात तो यह कि ऐसा कोई जादुई फार्मूला नहीं है, जिससे रातोंरात शरीर की प्रतिरोधक क्षमता सुधर जाए। हां, नियमित तौर पर कुछ कुदरती उपाय आजमाकर हम जरूर कुछ दिनों में अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी कर सकते हैं और इस तरह कोरोना संक्रमण ही नहीं, बल्कि इस प्रकार की कई अन्य बीमारियों से भी अपना बचाव कर सकते हैं।
सोना-जागना
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में संतुलित नियमित जीवनशैली की विशेष भूमिका होती है। इसमें सबसे अहम है सुबह के वक्तजल्दी उठना। जल्दी उठने का मतलब है गर्मी के दिनों में सुबह 5 से 6 बजे के बीच और सर्दी के दिनोंं में 6 से 7 बजे के बीच बिस्तर छोड़ देना। लेकिन जल्दी उठने का मतलब यह भी नहीं है कि आपको आधी-अधूरी नींद लेनी है। रोजाना कम से कम सात घंटे और अधिकतम 8 घंटे की नींद जरूरी है। कम नींद से शरीर में काटिर्सोल नामक हार्मोन के स्तर में बढ़ोतरी होती है। यह हार्मोन न केवल तनाव बढ़ाता है, बल्कि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर करता है।
सेहत की धूप
जल्दी उठने के साथ ही नियमित तौर पर पैदल चलना और कसरत या योग करना भी जरूरी है। हल्के हाथों से शरीर की मालिश भी करेंगे तो और भी बेहतर रहेगा। सुबह की सैर, मालिश और कसरत/योग से शरीर में ऐसे एंजाइम्स और हार्मोन स्रावित होते हैं जो हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कोरोना जैसे फ्लू से भी बचाव करने में सहायक होते हैं। साथ ही यह भी कोशिश करें कि सुबह की सैर और कसरत का समय ऐसा हो कि आपके शरीर को सुबह की 20 से 30 मिनट तक धूप भी मिल सके। कई शोध से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि सुबह की धूप रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार होती है।
खानपान का ध्यान
‘ रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मेटाबालिज्म का महत्व होता है। हमारा मेटाबालिज्म जितना अच्छा होगा, हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी उतनी ही बेहतर होगी। मेटाबालिज्म बढ़ाने के लिए न केवल सुबह का नाश्ता जरूरी है, बल्कि चार-चार घंटे के अंतराल पर कुछ पौष्टिक खाना भी आवश्यक है। अपनी खुराक में रोजाना दही या छाछ अथवा दूध-पनीर जैसी चीजों को भी अवश्य शामिल करें जिनके ‘गुड बैक्टीरिया’ आपको बीमार होने से बचाएंगे। लहसुन, अश्वगंधा और अदरक में भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की क्षमता होती है।
‘ रोज की खुराक में कुछ खट्टे फल भी जरूर शामिल करें। ये नींबू से लेकर संतरे, मौसमी तक कुछ भी हो सकते हैं। अगर ये न खा सकें तो रोजाना कम से कम एक आंवला खाना भी पर्याप्त होगा। खट्टे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स के असर को कम कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
‘ रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का यह सबसे आसान तरीका है कि खूब पानी पीजिए (किडनी के रोगी ऐसा न करें)। आप जितना ज्यादा पानी पिएंगे, शरीर के टाक्सिन्स उतने ही बाहर निकलेंगे और आप संक्रमण से मुक्त रहेंगे। अगर आप रोजाना दिन में एक या दो बार शहद या तुलसी का पानी पीने की आदत डाल लें तो और बेहतर होगा।
(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)
