मानस मनोहर
दालपूड़ी और पूरनपोली
भारतीय घरों में चने की दाल से अनेक प्रकार के व्यंजन बनते हैं। दालपूड़ी और पूरनपोली भी उन्हीं में से हैं। दालपूड़ी नमकीन होती है, जिसे कई लोग परांठे के तौर पर बनाते और खाते हैं, तो बहुत सारे लोग पूड़ी के तौर पर। पूरनपोली भी एक प्रकार का पराठा ही है, पर वह मीठा होता है और मुख्य रूप से महाराष्ट्र में खाया जाता है। ये दोनों खाद्य ऐसे हैं, जिन्हें बासी भी खाएं, तो स्वाद खराब नहीं होता।
दालपूड़ी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि में खूब खाई जाती है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे शुभ अवसरों पर बनाया जाता है। शहरी इलाकों में इसे नाश्ते के तौर पर पराठे की जगह खाया जाता है। इसे बनाना बहुत आसान है।
चने की दाल को रात भर के लिए या कम से कम चार घंटे के लिए भिगो दें। फिर छान कर हल्के पानी के साथ कुकर में डालें। उसमें जरूरत भर का नमक, चुटकी भर हींग और थोड़ी हल्दी पाउडर डाल कर दो से तीन सीटी तक पका लें। भाप खत्म हो जाए, तो बाहर निकाल लें। अगर उसमें पानी बचा है, तो छन्नी से छान कर निकाल लें। दाल को थोड़ा ठंडा हो जाने दें। तब तक हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक को बारीक-बारीक काट लें।
एक कटोरे में रखें। अब उबली हुई दाल को चौकी या सब्जी काटने वाले फट्टे पर थोड़ा-थोड़ा करके रखें और बेलन से दबा कर अच्छी तरह मसल लें। इसे कटे हुए हरा धनिया, मिर्च वगैरह के साथ रखें। अब इसमें आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च, आधा चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच जीरा पाउडर, आधा चम्मच अमचूर और एक चम्मच अजवाइन और आधा चम्मच कलौंजी डालें और सारी चीजों को हाथ से अच्छी तरह मिलाते हुए पिट्ठी तैयार कर लें।
अब आटा गूंथ कर तैयार कर लें। इसकी छोटी-छोटी लोइयां लेकर कटोरीनुमा बनाएं और उसमें दाल की पिट्ठी अच्छी तरह दबा कर भरें और परांठे की तरह बेल लें। गरम तवे पर डाल कर दोनों तरफ से पलटते हुए घी लगा कर अच्छी तरह सेंक लें। इसे पूड़ी की तरह गरम तेल में तल कर भी पकाया जाता है। इसमें सावधानी यह बरतनी होती है कि पिट्ठी भरते और बेलते समय ध्यान रखें कि कहीं से भी फटने न पाए, नहीं तो इसमें तेल घुस कर सारा मजा खराब कर देता है। फिर गरम तेल में जैसे पूड़ी तलते हैं, वैसे ही तल लें।
पूरनपोली बनाने के लिए पिट्ठी थोड़ी अलग तरह से तैयार करनी पड़ती है। उबली हुई दाल को बेलन से दबा कर अच्छी तरह मसल लें। फिर एक कड़ाही में दो चम्मच देसी घी गरम करें और उसमें सिर्फ सौंफ का तड़का दें। सौंफ काली न पड़े, इसका ध्यान रखें। फिर उसमें मसली हुई दाल डालें, आंच धीमी रखें। इसके साथ ही दाल की मात्रा की चौथाई मात्रा गुड़ की लें और उसे कूट या घिस कर महीन कर लें। यह गुड़ भी उसी दाल में डालें और अच्छी तरह चलाते हुए सारी चीजों को मिलाएं। अब इसमें एक चम्मच सोंठ का पाउडर, चुटकी भर इलाइची पाउडर डालें और अच्छी तरह पका लें।
पिट्ठी भरने लायक बन जाए तो आंच बंद कर दें। अब जिस तरह दालपूड़ी के लिए आटे में पिट्ठी भरी थी, उसी तरह भर कर लोइयां तैयार करें। ध्यान रखें कि पिट्ठी की मात्रा भरपूर हो। अब इन्हें अच्छी तरह बेल कर पतले आकार में फैला लें। तवा गरम करें। उस पर घी लगा कर इसे पलटते हुए पकाएं। पूरनपोली तैयार है। इसे दो दिन तक भी खाएं, तो खराब नहीं होती। बच्चे इसे खूब पसंद करते हैं।
नारियल वाले मीठे चावल
चावल एक ऐसा खाद्य है, जो दुनिया भर में पसंद किया जाता है। अगर यह बच जाए, तो उससे तरह-तरह के व्यंजन बनाए जा सकते हैं। आपमें से बहुत सारे लोग फ्राइड राइस के रूप में इसे बनाते और खाते हैं। अमतौर पर लोग सब्जियों के साथ पकाते हैं। कुछ लोग इमली का गूदा डाल कर पकाते हैं, तो कुछ लोग नींबू का रस डाल कर। कुछ लोग दही के साथ मिला कर तड़का देते और कर्ड राइस के रूप में खाते हैं, तो कई लोग सिर्फ जीरे के तड़के के साथ नमक डाल कर खा लेते हैं। पर कच्चे घिसे नारियल के साथ इसका स्वाद लाजवाब होता है।
नारियल वाले मीठे चावल बनाने के लिए रात या दिन के बचे हुए चावलों को फ्रिज में रख दें। इस तरह यह थोड़ा सख्त हो जाता है और फ्राई करते समय ठीक रहता है। इसके लिए कच्चे नारियल की गिरी को कद्दूकस कर लें। जितना चावल लिया है, उसकी आधा मात्रा घिसे हुए नारियल की रखें। इतनी ही मात्रा में कूटा हुआ या घिसा हुआ गुड़ या फिर खांड़ लें। एक कड़ाही में एक से दो चम्मच देसी घी गरम करें।
उसमें सौंफ, एक हरी इलाइची के दाने डालें और हल्की चटक आते ही घिसे हुए नारियल डाल कर दो मिनट के लिए चलाते हुए सेंकें। अब कुछ किशमिश, बादाम और काजू के टुकड़े डालें और फिर पके हुए चावल डालें। इसके साथ ही गुड़ या खांड़ डाल कर अच्छी तरह मिला लें। कड़ाही पर ढक्कन लगा दें। आंच धीमी रखें। जैसे ही गुड़ पिघल जाए, ढक्कन खोल कर सारी चीजों को चलाते हुए मिलाएं। ऊपर से दो चम्मच घी और डालें। अच्छी तरह मिलाते हुए चलाएं। पानी सूख जाए तो आंच बंद कर दें। भोजन के बाद मीठे के तौर पर परोसने के लिए यह उत्तम आहार होता है। इसे यों भी खा सकते हैं।

