सभी मेलों में दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाला भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आइआइटीएफ) सबसे अलग है। हर साल 14 से 28 नवंबर के बीच आयोजित होने वाले इस मेले का संबंध न तो किसी धार्मिक आयोजन से है और न ही यह किसी नदी के नट पर आयोजित होता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह मेला मुख्य रूप से व्यापार के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इस साल मेले में आठ सौ से अधिक देसी-विदेशी कंपनियां भाग ले रही हैं। ये कंपनियां अपने उत्पाद लेकर मेले में आई हैं और उन्हें ऐसे व्यापारियों का इंतजार है, जो उनके साथ बड़े सौदे करें। हर साल ये कंपनियां यहां से करोड़ों रुपए के सौदे करके जाती हैं।
इसके अलावा आम दिनों में दिल्ली और आसपास के शहरों के लोग बड़ी संख्या में मेले में पहुंचते हैं। ये लोग खरीदारी करने के साथ मेले का भरपूर आनंद उठाते हैं। फिर चाहे ये विभिन्न राज्यों के व्यंजनों को चखें या मेले में आए नए उत्पादों के बारे में जानकारी लें। मेले में कई बार नए उत्पाद लांच होते हैं, ऐसे में दर्शकों के पास ऐसे उत्पादों को सबसे पहले खरीदने का विकल्प भी होता है। इसके अलावा मेले में विभिन्न उत्पादों पर छूट भी होती है। खरीदारी के समय लोग छूट का भरपूर फायदा उठाते हैं। मेले में कई तरह की छोटी-मोटी प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं। इनमें भाग लेकर दर्शक मनोरंजन के साथ इनाम भी जीतते हैं। मेले में आॅस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, भूटान, चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया सहित कई देश हर साल की तरह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। अफगानिस्तान को इस साल के आइआइटीएफ में भागीदार देश और दक्षिण कोरिया को फोकस देश बनाया गया है। वहीं बिहार और झारखंड को फोकस राज्य का दर्जा दिया गया है।
इंडिया ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन (आइटीपीओ) की ओर से आयोजित इस मेले में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा कुछ अन्य देशों की संस्कृति की झलक दिखाई देती है। इतना ही नहीं, यहां सभी राज्यों के मशहूर पकवानों का भी लुत्फ उठाया जा सकता है। इनमें बिहार का लिट्टी चोखा सबसे आगे है। इसके अलावा राजस्थान की गजक, तिलपट्टी और खोए के लड्डू भी लोगों को खूब भा रही है। आप यहां महाराष्ट्र का वडा पाव, मध्यप्रदेश के पोहे और नमकीन, पश्चिम बंगाल की मीठी दही, गुजरात का ढोकला, तेलंगाना की बिरयानी, गोवा की फिश करी, पूर्वोत्तर राज्यों के पकवान आदि का स्वाद चखा जा सकता है।
अफगानिस्तान के मेवे
यहां आपको अफगानिस्तान के सूखे मेवे मिलेंगे, तो कोरिया से आया तकनीकी समान भी आसानी से मिल जाएगा। अफगास्तिान के स्टॉल पर बादाम, अंजीर, अखरोट, किशमिश आदि उपलब्ध हैं। अफगास्तिान के स्टाल से सफेद शहद भी खरीदा जा सकता है, जिसमें औषधीय गुण हैं। यहां के करीब एक-एक किलो के अनार भी दर्शकों को खूब लुभा रहे हैं। सूखे मेवे के अलावा यहां से कालीन और संगमरमर का सामाना भी खरीदा जा सकता है। अगर आपको कतर के कपड़े पसंद हैं तो आप व्यापार मेले से कतर से आए कपड़ों की खरीदारी भी कर सकते हैं। कतर से विशेष रूप से महिलाओं के कपड़े मेले में आए हैं। इतना ही नहीं, भूटान के अचार का जायका भी व्यापार मेले में लिया जा सकता है। इसके अलावा पापड़, कॉर्न फ्लेक्स, टोमैटो प्यूरे आदि खरीद सकते हैं। थाईलैंड के स्टॉल से महिलाओं के बैग, मेकअप का सामान, आभूषण आदि खरीदे जा सकते हैं।
कलाओं का जीवंत प्रदर्शन
बिहार मंडप को मधुबनी पेंटिंग से सजाया गया है, जिसके लिए विशेष रूप से बिहार से कलाकारों को बुलाया गया था। मंडप में बिहार की चार प्रमुख शिल्प कलाओं का जीवंत प्रदर्शन (लाइव डेमो) किया जा रहा है। टेराकोटा शिल्क का लाइव डेमो राज्य पुरस्कार विजेता पटना की नीतू सिन्हा, टीकुली कला का लाइव डेमो राज्य पुरस्कार विजेता सबीना इमाम, सिक्की कला की जीवंत प्रदर्शन रैयाम मधुबनी की राज्य पुरस्कार विजेता मुन्नी देवी और कैमूर से राज्य पुरस्कार विजेता संतोष कुमार गुप्ता स्टोन क्राफ्ट का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बार बिहार मंडप में हथकरघा और हस्तकला के सोलह स्टॉल हैं। इन स्टॉलों पर बिहार के पारंपरिक हस्तकलाओं एवं हस्तकरघा उत्पाद जिनमें नालंदा का बाबन बूटी, भागलपुर का सिल्क, मिथिलांचल का मधुबनी पेंटिंग, पटना की टीकुली कला इत्यादि को स्थान दिया गया है।
तिहाड़ के कैदियों की बनाई मिठाइयां
तिहाड़ जेल में सजा काट रहे कैदियों की बनार्इं मिठाइयां पहली बार दिल्ली मंडप में उपलब्ध हैं। यहां से बूंदी के लड्डू, रसगुल्ला सहित अन्य मिठाइयां खरीदी जा सकती हैं। इसके अलावा बिस्कुट और देसी मसाले भी उपलब्ध हैं। दिल्ली मंडप में मोहल्ला क्लीनिक भी बनाया गया है। इस क्लीनिक पर दर्शक स्वास्थ्य संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। यहां पर डॉक्टरों की एक टीम भी तैनात हैं, जो दर्शकों को प्राथमिक उपचार दे रही है। यहां पर दर्शकों को दिल्ली सरकार की इस लाभकारी सेवा के बारे में जानकारी दी जा रही है।
सरदार पोस्ट की पवित्र मिट्टी
सीआरपीएफ मंडप में रखे गए सरदार पोस्ट की पवित्र मिट्टी उन वीर जवानों के शौर्य की गाथा सुना रही है, जिन्होंने पाकिस्तान की सेना का डट कर मुकाबला किया था और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। भारतीय सीमा क्षेत्र पर अधिकार करने के लिए 9 अप्रैल, 1965 की सुबह तीन बजे पाकिस्तान की 51वीं ब्रिगेड ने अपने साढ़े तीन हजार सैनिकों के साथ रण आॅफ कच्छ की टाक और सरदार पोस्ट पर हमला किया। लेकिन हर बार की तरह पाकिस्तान को भारत के वीर जवानों ने करारा जवाब दिया। इस युद्ध में कई जवान शहीद भी हुए। सीआरपीएफ मंडप में बच्चे से लेकर बुजुर्ग अपने जवानों के शौर्य को देखने के लिए रहे हैं और सरदार पोस्ट की मिट्टी को देख भावुक भी हो रहे हैं।
साबरमती आश्रम
मेले में खादी ग्रामोद्योग के मंडप में इस बार साबरमती आश्रम बनाया गया है। यहां पर साबरमती आश्रम में मौजूद चीजों को दिखाने की कोशिश की गई है। देश ने हाल ही में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की डेढ़ सौवीं जयंती मनाई, इसी को आगे बढ़ाते हुए खादी ग्रामोद्योग ने साबरमती आश्रम को व्यापार मेले में जीवंत करने की पूरी कोशिश की है। खादी ग्रामोद्योग मंडप से दर्शक अपने पसंद के खादी वस्त्र खरीद सकते हैं। कुछ वस्त्रों पर छूट भी उपलब्ध कराई जा रही है।
बरतन-भांडे
इथियोपिया के स्टॉल पर 449 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बरतन-भांडे यानी क्रॉकरी खरीदी जा सकती है। स्टॉल संचालक के मुताबिक प्लास्टिक की प्लेट, कटोरी, डोंगे आदि को 449 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा रहा है और लोग इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावा इथियोपिया के स्टॉल से कांच और बोन चाइना की भी क्रॉकरी खरीदी जा सकती है।
सेल्फी कार्नर हैं खास
पूरे मेला क्षेत्र में कई सेल्फी कार्नर और प्वाइंट बनाए गए हैं। अर्धसैनिक बल ने पब्लिक के लिए खास सेल्फी कार्नर का इंतजाम किया है, जहां आप अपने परिवार के साथ बंदूकों और वहां मौजूद सैनिकों के साथ सेल्फी ले सकेंगे। इसके अलावा खादी ग्रामोद्योग के मंडप में हर साल की तरह गांधीजी के साथ फोटो खिंचवाने का इंतजाम किया गया है। फोटो में ऐसा लगता है जैसे गांधीजी आपसे बातचीत कर रहे हों। इसके अलावा लोगों को आकर्षित करने के लिए हर मंडप में एक-दो स्थानों में सेल्फी कार्नर या प्वाइंट बनाया गया है। इतना ही नहीं, सीआरपीएफ मंडप में जवान दर्शकों को अस्त्रों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। ज्यादातर लोग एके-47 के बारे में जानने के लिए आतुर दिखे। एके-47 की गोली तीन सौ मीटर की दूरी तय कर सकती है। इसके साथ पंद्रह किलो वजन की तोप भी आकर्षण का केंद्र बन रही है।
हस्तशिल्प की भरमार
बिहार व पश्चिम बंगाल के जूट के सामान और झारखंड के बांस के बने सजावट के सामान की लोगों के बीच बहुत अधिक मांग है। बिहार मंडप में जूट की गुड़िया, फूलदान, तस्वीरें, पंखे, झालर, लटकने वाली टोकरियां आदि उपलब्ध हैं। पश्चिम बंगाल मंडप में कई तरह के डिजाइन जूट के थैले उपलब्ध हैं। झारखंड मंडप में बांस के बॉक्स, पेंसिल रखने वाले बॉक्स, बांस का पेट्रोमैक्स के अलावा कई तरह के सजावट के सामान उपलब्ध हैं। सौ रुपए से लेकर कई हजार रुपए तक की सजावट की वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं।
