विकलांगता प्रमाण-पत्र के सच पर एडवोकेट अनुजा बताती हैं कि नाल्सा ने 2018 में तेजाब पीड़ितों के लिए योजना बनाई कि अगर चेहरे की क्षति होती है, तो सात से आठ लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। पचास फीसद क्षति पर पांच से आठ लाख रुपए मुआवजा। पचास फीसद से नीचे तीन से पांच लाख, बीस फीसद पर तीन से चार लाख के बीच में मुआवजा देने का प्रावधान है। यह मुआवजा तब मिलता है जब विकलांगता प्रमाण-पत्र बना हो।

अनुजा कहती हैं कि समस्या यही है कि जब विकलांगता प्रमाण-पत्र बनाने की बात आती है, तब पीड़ित लगभग तैंतालीस से सैंतालीस फीसद तक जली होनी चाहिए। अब अगर कोई व्यक्ति चौदह फीसद जल गया हो तो उसे प्रमाण-पत्र नहीं मिलेगा। अनुजा कहती हैं कि हर स्तर पर लड़कियां सताई जाती हैं। पीड़ितों के लिए कोई पुनर्वास की सुविधा नहीं है। और न ही पेंशन की योजना नहीं है। अगर है भी तो मिलती नहीं है। अनुजा की मांग है कि पीड़ितों को बेरोजगारी भत्ता और पेंशन मिलनी चाहिए। यही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाने चाहिए।

प्राथमिक उपाय

सरकार की ओर से कोई ऐसी प्रभावी कोशिश नहीं की जा रही है, जिससे लोग तेजाब को लेकर जागरूक हों। एक तरफ लोग संवेदनशील नहीं होते, दूसरी तरफ अब भी लोगों को नहीं मालूम है कि अगर किसी पर तेजाब फेंक दिया गया है तो शुरुआती उपचार क्या करना चाहिए। सिविल मेडिकल हॉस्पिटल कटक में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अरुण कुमार चौधरी बताते हैं कि अभी तक हमने देखा है कि तेजाब की जो ज्यादातर घटनाएं आती हैं वे चेहरे पर डालने की आती हैं। जब किसी पर कोई तेजाब फेंकता है, तो तेजाब आंख में नहीं जाना चाहिए। पानी डालें और पूरे तेजाब को साफ करें। कम से कम आधे घंटे से एक घंटे तक।

तेजाब साफ करने पर सिल्वर क्रीम लगाना चाहिए। ये क्रीम मेडिकल स्टोर पर मिल जाती है। फिर तुरंत अस्पताल में ले जाना चाहिए। डॉक्टर बताते हैं कि साल में लगभग दस मरीज तेजाब के आ जाते हैं। साथ ही वे कहते हैं कि देश में सेंटर फॉर एक्सीलेंस हर राज्य में होना चाहिए। अच्छे आॅपरेशन थियेटर, आइसीयू, एनेस्थिसिया सुविधाएं, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर होने चाहिए। तब जाकर पीड़ितों का बेहतर इलाज हो पाएगा। आज कानून, न्यायपालिका, सरकार सब हैं, लेकिन फिर भी लड़कियां इंसाफ के लिए अधजली हालत में गुहार लगा रही हैं।