मानस मनोहर
सर्दी के मौसम में अक्सर गले और छाती में बलगम जमा होने लगता है। कई लोगों को खांसी-जुकाम की समस्या रहती है। कुछ लोगों को हर समय हाथ-पौरों में ठंड लगती रहती है। ऐसे में कुछ पेय बहुत फायदेमंद होते हैं। पूरी सर्दी अगर रोज नहीं तो हफ्ते में दो-तीन बार भी पी लिया जाए तो छाती और गले का बलगम साफ हो जाता है। खांसी-जुकाम की समस्या से निजात मिलती है। यों चाय-कॉफी पीने से भी तत्काल राहत मिलती है, पर कहवा और रसम जैसे पेय ऐसे हैं, जो सर्दी में कफ संबंधी समस्याओं में दवा का काम करते हैं। इस बार यही दो पेय बनाने के बारे में बात करते हैं।
कहवा
कहवा कश्मीर का लोकप्रिय पेय है। वहां लोग समोअर में कहवा भर कर रख लेते हैं और बीच-बीच में पीते रहते हैं। इस तरह बर्फबारी के इस मौसम में वहां लोगों को बहुत आराम मिलता है। कश्मीर में बर्फबारी के दिनों में घर से निकलना मुश्किल होता है। ज्यादातर समय लोग घरों में ही बंद रहते हैं। ऐसे में बहुत सारे लोग घरों में बैठे दस्तकारी के काम करते रहते हैं। मगर हाथों में गरमी न बनी रहे, तो दस्तकारी के काम भी कठिन हो जाते हैं। ऐसे में कहवा बहुत मदद करता है। कहवा एक प्रकार का चाय-कॉफी जैसा ही पेय है, पर यह चाय-कॉफी जैसा कोई उत्पाद नहीं होता। बहुत सारे लोगों को लगता है कि कहवा भी किसी वनस्पति से तैयार होता होगा, पर हकीकत यह है कि इस नाम की कोई वनस्पति नहीं होती। बहुत सारे लोग कश्मीर घूमने जाते हैं, तो वहां कहवा का पाउडर डिब्बाबंद मिलता है। वह सैलानियों को बेचने के मकसद से तैयार किया गया होता है। जबकि कश्मीरी लोग जो कहवा पीते हैं, वह कई गरम तासीर वाली चीजों के मेल से बनता है।
कहवा दरअसर केसर और दालचीनी से बनता है। इसमें कुछ दाने अखरोट और बादाम के भी कुतर कर डाल दिए जाते हैं। इन सबकी तासीर गरम होती है, जो शरीर को तो गरम रखते ही हैं, कफ संबंधी समस्या से भी दूर रखते हैं। पानी में उबल कर इनका स्वाद निराला हो जाता है। केसर न सिर्फ शरीर में गरमी बनाए रखता है, रक्त संचार को सुचारु रखता है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता, स्फूर्ति बढ़ाता और बल प्रदान करता है। इसी तरह दालचीनी रक्त संचार को बढ़ाती है, पेट में वायु संबंधी विकार का नाश करती और कफ संबंधी समस्याओं से राहत प्रदान करती है। कहवा एक ऐसा पेय है, जिसे हर उम्र का व्यक्ति पी सकता है। बच्चों को चाय-कॉफी नहीं पीने दिया जाता, मगर उन्हें कहवा पिलाया जा सकता है। बल्कि अगर बच्चों को केसर बचपन से ही देना शुरू करें, तो उनके शरीर में अनेक समस्याएं पैदा ही नहीं होंगी। इसलिए बच्चों को भी कहवा पीने को दिया जा सकता है। यह एक प्रकार का औषधीय पेय है।
कहवा बनाना किसी भी पेय की अपेक्षा सबसे आसान होता है। इसके लिए अगर एक कप कहवा बनाना है, तो चार-पांच केसर की कलियां, आधा इंच दालचीनी और एक बादाम या फिर आधा अखरोट पर्याप्त होता है। इसमें चीनी या शहद आप अपने स्वाद के मुताबिक मिला सकते हैं। जो लोग मीठे से परहेज करते हैं, वे इसे छोड़ सकते हैं। इसी अनुपात में जितनी मात्रा में कहवा बनाना चाहें, बना सकते हैं। चाहें, तो कहवा बना कर थरमस में भर कर रख सकते हैं और जब चाहें, पी सकते हैं।
कहवा बनाने के लिए जितने कप बनाना चाहते हैं, उतना पानी उबालें। पानी उबल जाए तो उसमें पहले दालचीनी का टुकड़ा डालें फिर केसर की कलियां डालें और अंत में कुतरे हुए बादाम-अखरोट और जरूरत भर शक्कर या शहद डाल कर मिला लें। आंच बंद कर दें। कहवा परोसने से पहले दालचीनी का टुकड़ा बाहर निकाल दें। बाकी चीजें पानी में ही रहने दें और गरमागरम परोसें। कहवा पीते समय मुंह में बादाम और अखरोट का टुकड़ा आता है, तो बड़ा आनंद आता है।
रसम
सम दक्षिण भारत का लोकप्रिय पेय है। यह आमतौर पर भोजन से पहले स्टार्टर के तौर पर या फिर बाद में पापड़ के साथ परोसा जाता है। रसम भी सर्दी में कफ संबंधी समस्याओं से पार पाने में बहुत मददगार पेय है। इसे घर में बनाना बहुत आसान है। आजकल तो बाजार में रसम पाउडर भी सहज उपलब्ध होता है। दक्षिण भारतीय दुकानों पर भी इसका बना-बनाया पाउडर उपलब्ध होता है। बस कुछ सब्जियां उबालिए और पैकेट वाला रसम का पाउडर डालिए, रसम तैयार हो जाता है। यों घर में भी रसम का पाउडर बना कर रखा जा सकता है। इसका मसाला बना कर रख लें और पूरी सर्दी या सर्दी के बाद भी जब मन हो, रसम बनाएं और पीएं, फायदा करेगा। इससे पाचन भी दुरुस्त रहता है।
रसम बनाना बहुत ही आसान है। पहले रसम पाउडर बनाते हैं। इसके लिए छह साबुत लाल मिर्च, पांच चम्मच साबुत धनिया, एक चम्मच जीरा, एक चम्मच काली मिर्च, आधा चम्मच राई, आधा चम्मच मेथी दाना, दस-बारह कढ़ी पत्ता, चौथाई चम्मच कुटी हुई हल्दी लेकर अलग-अलग गरम तवे पर गंध आने तक सेंकें और ठंडा होने के बाद ग्राइंडर में पीस लें। रसम पाउडर तैयार है। अब रसम बनाने के लिए एक पैन में एक लीटर पानी लें। उसमें एक टमाटर बारीक काट कर डालें, उसी में पांच से छह चम्मच इमली का गूदा डालें, जरूरत भर का नमक और एक चम्मच चीनी भी डाल दें। इसके बाद कुछ कढ़ी पत्ते और थोड़ा हरे धनिया के पत्ते डालें और इन्हें उबलने दें। बीच-बीच में चलाते रहें।
अब जो रसम पाउडर बनाया था उसमें से एक से डेढ़ चम्मच डालें और मिला लें। ढक्कन लगा कर थोड़ी देर उबलने दें। जब रसम पक कर उसमें से अच्छी खुशबू आने लगे तो तड़के की तैयारी करें। तड़के के लिए एक पैन में एक चम्मच तेल गरम करें। उसमें दो साबुत लाल मिर्चें, आधा चम्मच राई, एक चुटकी हींग और चार-पांच कढ़ी पत्ता डाल कर तड़का तैयार करें और रसम में डाल दें। इसके साथ ही दो-तीन कलियां लहसुन की कूट कर डालें। रसम तैयार है। गरमागरम पीएं।

