कचालू चाट: कचालू यों तो एक अलग तरह का आलू होता है, जो मीठा नहीं होता। यह आलू, अरबी, बंडा या कचू की प्रजाति का ही कंद होता है, जो आकार में आलू की तरह ही गोल होता है। मगर वह सब जगह नहीं मिलता। इसलिए बहुत सारे लोग आलू या फिर अरबी या बंडा यानी कचू या सूरन का उपयोग करते हैं। कचालू का स्वाद भी बहुत तीखा और मुंह में पानी लाने वाला होता है। कचालू की चाट बनाना बहुत आसान है। अगर कचालू न मिले, तो उसकी जगह बंडे का इस्तेमाल करें। अगर वह भी न हो तो आलू से भी यह चाट बनाई जा सकती है।
कचालू की चाट बनाने के लिए पहले कचालू, बंडा या आलू को पहले उबाल लें। इस तरह उबालें कि पिलपिला न होने पाए, कुछ सख्त बना रहे। छिलका उतार कर मनचाहे आकार में गोल या फिर तिकोना काट लें।
अब चाट में डालने के लिए पहले मसाला तैयार करें। इसके लिए एक चम्मच सूखा साबुत धनिया, एक चम्मच जीरा, एक चम्मच अजवाइन, आधा चम्मच सौंफ, पांच-छह काली मिर्च लें और इन्हें अलग-अलग गरम तवे पर सुनहरा होने तक भून लें। फिर सबको एक साथ मिला कर ग्राइंडर में पीस लें। अगर आपको मसाला अधिक मात्रा में बनाना है, तो सारी चीजों की मात्रा इसी अनुपात में बढ़ा सकते हैं। अब इसमें डालने के लिए आधी-आधी मात्रा में काला नमक और सफेद नमक मिलाएं। चाट मसाला तैयार है। इसके साथ ही बाजार का चाट मसाला और कुटी लाल मिर्च अलग से रखें।
इस चाट में हरे धनिए की चटनी, इमली की मीठी चटनी और नीबू के रस की भी जरूरत पड़ती है। यह चाट तीखा, मीठा, खट्टा और चटपटा ही अच्छा लगता है, इसलिए इसमें ये सारी चीजें डालने की जरूरत पड़ती है। ऊपर से बारीक कतरा हुआ अदरक और धनिया पत्ते का स्वाद भी इसे निराला बनाता है।
अब कड़ाही या पैन में कुकिंग आयल डाल कर गरम करें और उसमें कटे हुए आलुओं या कचू के टुकड़े डाल कर पलटते हुए कुरकुरा होने तक तलें। फिर गरमागरम एक कटोरे में डालें और ऊपर से स्वाद के अनुसार चाट मसाला, पिसा हुआ मसाला, कुटी लाल मिर्च, हरी चटनी और इमली की चटनी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। नमक का ध्यान रखें। पहले ही चाट मसाले और पिसे हुए मसाले में नमक पड़ा हुआ है, इसलिए अलग से नमक डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर फिर भी कम लगे, तो नमक ऊपर से डाल सकते हैं। कचालू चाट तैयार है। ऊपर से कतरा हुआ अदरक और हरा धनिया पत्ता डाल कर परोसें।
कुछ लोग आलू या कचालू, कचू को तेल में तले बगैर भी चाट बनाते हैं। अगर चाहें, तो आप भी ऐसा कर सकते हैं। पर तलने से चाट का स्वाद बढ़ जाता है।
शकरकंद की चाट
शकरकंद सब जगह आसानी से मिल जाता है। इसे मीठा आलू भी कहते हैं। दक्षिण भारत में इसकी प्रजाति उत्तर भारत से कुछ अलग होती है। मगर शकरकंद कोई भी लें, इसके चाट का स्वाद निराला होता है। कचालू चाट से भिन्न इसका स्वाद होता है, क्योंकि इसका स्वाद कुछ मीठा होता है।
कचालू चाट में जो मसाले डाले थे, वही मसाले इसमें भी डाले जा सकते हैं। बस, इसमें इमली की चटनी और हरी चटनी न डालें। चाहें, तो लाल मिर्च भी छोड़ सकते हैं। इसमें खटास और तीखापन अच्छा लगता है, जिसे काली मिर्च और नीबू का रस पूरा कर देता है। नीबू का रस डालते समय कंजूसी न करें, इससे स्वाद बढ़ जाता है।
यों शकरकंद को आग में भून कर चाट बनाएं, तो स्वाद अच्छा आता है, पर चूंकि शहरों में आग में भूनने की व्यवस्था नहीं होती, इसलिए ज्यादातर लोग शकरकंद को उबाल कर ही उपयोग करते हैं। सड़कों पर शकरकंद की चाट बेचने वाले इसे उबालने के बाद भूसी या बुरादे की आग में दबा कर रखते हैं, जिससे इसमें भुने होने का स्वाद आने लगता है। पर आपके पास यह सुविधा नहीं है, तो चिंता की कोई बात नहीं। इसे उबाल कर ही चाट बनाएं। अगर अवन में भूनने की व्यवस्था है, तो उसमें भून लें।
अब शकरकंद का छिलका उतार कर मनचाहे टुकड़ों में काट लें। इसे कचालू चाट की तरह तेल में तलने का प्रयास बिल्कुल न करें। अगर तलना है, तो इसे उबालें नहीं। कच्चे शकरकंद का छिलका उतार कर मनचाहे टुकड़ों में काट लें और तेज आंच पर कुरकुरा होने तक तल लें। जब भी शकरकंद को तलना हो, तो टुकड़ों का आकार बड़ा रखें, नही तो वह सूख कर कड़ा हो जाएगा। फिर उसे बड़े कटोरे में डाल कर पिसा हुआ मसाला, चाट मसाला और खूब सारा नीबू का रस डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। गरमागरम खाने को परोसें।
मानस मनोहर

