पारंपरिक तरीके से बनने वाले भोजन का स्वाद सदाबहार होता है। इसे बनाने में बहुत मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती। कुछ चीजें तो ऐसी हैं, जो हर भारतीय घर में खाई जाती हैं। बनाने का तरीका भी लगभग एक-सा होता है। ऐसे व्यंजनों में कुछ मिठाइयां, जैसे लड्डू और कुछ सब्जियां, जैसे आलू शामिल हैं। लड्डू देश में हर जगह खाया जाता है, इसी तरह आलू की रसेदार तरकारी भी हर जगह खाई जाती है। इस बार इन्हीं के बारे में कुछ प्रयोग।
दम आलू
दम आलू रसेदार आलू का ही एक रूप है। यह कुछ अधिक तीखा और चटपटा बनाया जाता है, इसमें मसाले का प्रयोग सामान्य तरकारी की अपेक्षा अधिक होता है, इसलिए इसे दम आलू कहते हैं। सामान्य तौर पर दम आलू छोटे आकार के आलुओं को उबाल कर और तरी यानी ग्रेवी के साथ परोसा जाता है। दम आलू बनाने में तरी का ही महत्त्व होता है।
दम आलू की तरी बनाने में आमतौर पर टमाटर, प्याज लहसुन का उपयोग किया जाता है। मगर हमारे देश में बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं, जो प्याज लहसुन नहीं खाते। इस तरह अगर घर में ऐसा कोई मेहमान आ जाए, तो उसे दम आलू परोसना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में बिना प्याज-लहसुन के भी दम आलू बनाया जा सकता है। यों ग्रेवी यानी तरी बनाने के लिए प्याज-टमाटर-लहसुन अनिवार्य पदार्थ नहीं हैं। सोचिए कि गांवों में जहां आज भी न तो घरों में फ्रिज इस्तेमाल होता है और न शहरों की तरह बारहों महीने प्याज-टमाटर उपलब्ध होता है, वहां लोग कैसे तरी वाली सब्जियां बनाते हैं।
इस बार हम दही के उपयोग से दम आलू बनाएंगे। यह बहुत आसान तरीका है और इस तरह दम आलू बहुत लजीज बनता है।
दम आलू बनाने के लिए आलू छोटे आकार के ले सकते हैं। अगर छोटे आकार के आलू नहीं हैं, तो चिंता की बात नहीं, बड़े आकार के आलू भी ले सकते हैं। आलुओं को उबाल कर छिलका उतार लें। अगर आलू आकार में बड़े हैं, तो उन्हें चार टुकड़ों में काट लें। कुछ लोग उबले आलुओं को बीच से खोखला कर उसमें पनीर आदि का भरावन भरते हैं। ऐसा करना जरूरी नहीं। अब एक कड़ाही में तेल गरम करें और तेज आंच पर आलुओं को हल्का सुनहरा होने तक चलाते हुए तल लें।
तरी तैयार करने के लिए दो से तीन मध्यम आकार के टमाटर पीस लें। इसके अलावा एक कटोरी दही को अच्छी तरह फेंट कर रख लें। इसी दही में दो चम्मच गरम मसाला, आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च, चौथाई चम्मच खटाई और एक चम्मच चीनी डाल कर मिलाएं और रख दें।
अब कड़ाही में तीन से चार चम्मच तेल गरम करें। उसमें जीरा, अजवाइन, सौंफ, छोटा टुकड़ा दालचीनी, एक-दो इलायची और एक चकरी फूल डाल कर तड़का दें। तड़का तैयार हो जाए, तो उसमें पिसा हुआ टमाटर डालें और मध्यम आंच पर चलाते हुए पकाएं। जब टमाटर तेल छोड़ने लगे, तो उसमें दही डालें और चलाते हुए तब तक पकाएं, जब तक कि वह सूखने न ले। अब इसमें जरूरत भर का पानी डालें। ध्यान रखें कि पानी ज्यादा न हो, तरी गाढ़ी रहेगी, तो आलुओं पर चिपट जाएगी। पतली तरी न रखें।
अब इसमें तले हुए आलुओं को डालें और जरूरत भर का नमक डाल कर आठ से दस मिनट तक धीमी आंच पर ढंक कर पकने दें। आंच बंद करने से पहले दो चम्मच कसूरी मेथी रगड़ कर डालें और ढक्कन लगा कर छोड़ दें।
इस दम आलू को पूरी, रोटी, परांठे आदि के साथ खा सकते हैं।
अलसी के लड्डू
अलसी यानी फ्लेक्सी सीड इन दिनों खूब चलन में है। यह कोलेस्ट्राल घटाने में काफी मददगार होता है। इसका तेल भी मिलता है, अगर खाने में इसका उपयोग करें, तो यह भी फायदा करता है। मगर अलसी के लड््डू बना लिए जाएं, तो इससे सर्दी से भी राहत मिलती है और सेहत की दृष्टि से तो उत्तम होगा ही। मेहमान आएं, तो उन्हें भी परोसा जा सकता है।
अलसी के लड्डू बनाना बहुत आसान है। यह भारत का पारंपरिक व्यंजन है और देश के ज्यादातर इलाकों में इसे खाया जाता है। अलसी के लड्डू बनाने के लिए जितनी मात्रा में अलसी लेते हैं, उससे दोगुनी मात्रा में गेहूं का आटा लें, डेढ़ गुना गुड़ और चौथाई मात्रा गोंद और सोंठ का रखें। यानी अगर आपने दो सौ ग्राम अलसी ली है, तो चार सौ ग्राम आटा, तीन से साढ़े तीन सौ ग्राम गुड़ और पचास ग्राम गोंद और सोंठ लें। इतनी मात्रा में लड्डू बनाने के लिए ढाई से तीन सौ ग्राम देसी घी की जरूरत पड़ेगी।
अब एक कड़ाही गरम करें। उसमें अलसी डाल कर धीमी आंच पर रंग बदलने और महक उठने तक चलाते हुए सेंकें। उसे निकाल कर ठंडा होने दें। इसी तरह थोड़ा-सा घी डाल कर आटे को चलाते हुए सुनहरा होने तक भूनें। इसे भी ठंडा होने के लिए अलग रख दें। फिर घी गरम करके उसमें गोंद को तल लें और फिर बाहर निकाल कर कूट लें।
अब अलसी को ग्राइंडर में दरदरा पीस लें। इसे आटे में डालें। उसमें कुटा हुआ गोंद और सोंठ भी डालें। गुड़ को मसल कर डालें और ऊपर से गरम घी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। अगर चाहें तो कुछ मेवे भी काट कर डाल सकते हैं। अब गरमागरम मनचाहे आकार में लड्डू बना लें। अगर लड्डू ठीक से नहीं बंध रहे, तो थोड़ा गुड़ और मिला सकते हैं।
मानस मनोहर

