प्रगति मैदान के अंदर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला के साथ बाहर भी एक मेला लगता है। छोटे-छोटे दुकानदार खाने-पीने की चीजों से लेकर किताबें, छोटे-मोटे आभूषण, खिलौने आदि बेचते आसानी से दिख जाएंगे। पापड़ बेचने वाले एक शख्स ने बताया कि व्यापार मेले के दौरान उनकी कुछ अच्छी आमदनी हो जाती है। इसलिए वे हर साल मेले के बाहर पापड़ बेचने आते हैं। इसी तरह बच्चों के छोटे खिलौने और गुब्बारे आदि यहां कम दाम पर मिल जाते हैं, जिन्हें पाकर बच्चे भी खुश हो जाते हैं। हर साल मेला देखने आने वाले संजय ने बताया कि मैं मेले के बाहर से जरूर कुछ न कुछ खरीदता हूं। उन्होंने बताया कि बाहर चीजें बेचने वालों के पास यदि पर्याप्त धन होता तो वे बाहर की जगह अंदर अपना सामान बेचते, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं है। उन्होंने कहा कि वे मदद के भाव से बाहर से भी खरीदारी करते हैं।
पूरे साल करते हैं इंतजार
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का दिल्लीवालों के साथ आसपास के शहरों में रहने वाले लोग पूरे साल इंतजार करते हैं। कुछ लोग सूखे मेवे, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ों आदि की खरीदारी व्यापार मेले से ही करते हैं। राजू पार्क में रहने वालीं पिंकी बताती हैं कि यदि आपको किसी राज्य विशेष का कोई कपड़ा या अन्य सामान लेना है, तो उसके लिए आपको व्यापार मेले का इंतजार करना ही पड़ता है। उन्होंने बताया कि यदि आप लखनऊ की चिकनकारी के कपड़े या बिहार की मधुबनी पेंटिंग लेना चाहते हैं तो सबसे बेहतर है कि आप व्यापार मेले का इंतजार करें और यहीं से उचित दामों में इन्हें खरीदें। शाहदरा में रहने वाले सचिन बताते हैं कि वे हर साल अफगानिस्तान से आने वाले सूखे मेवे खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि बिना मेले के यदि हम इन सूखे मेवों को मंगवाएंगे तो इनकी कीमत बहुत अधिक होती है। इसलिए मैं पूरे साल के लिए व्यापार मेले से ही सूखे मेवे खरीद लेता हूं।
अगले साल से मेले का रंग
अगले साल व्यापार मेला अपनी पुरानी रंगत में नजर आएगा। 2020 में जहां चार नए हॉल शुरू हो जाएंगे, वहीं सांस्कृति सभागार की व्यवस्था भी हो जाएगी। पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त कर चुके अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का रूप पिछले तीन सालों से छोटा हो चुका है जिसका खमियाजा जहां एक ओर प्रदर्शकों को उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, मेला देखने के लिए आने वाले दर्शक भी इससे खुश नहीं हैं। इसकी वजह से ना तो मेला देखने में मजा आ रहा है और ना ही मेले में अपने सामान की बिक्री करने के लिए आने वालों को। प्रगति मैदान का पुननिर्माण किया जा रहा है। इसके चलते मैदान के कई हॉलों को तोड़ा गया था, जिसकी जगह नए हॉल बनाए गए हैं। फिलहाल मेला 7 से 12 नंबर हॉल में लगाया जा रहा है। अगले साल से मैदान में चार नए हॉल तैयार हो जाएंगे, जिससे मेले को बढ़ाने में आसानी होगी। इसके साथ प्रदर्शकों की संख्या में अधिक बढ़ जाएगी और हैंगर का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। वहीं, जबसे मेला छोटा हुआ है, सांस्कृतिक कार्यक्रम कम आयोजित हो रहे हैं। जगह बढ़ने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संख्या में भी इजाफा होगा।

