पूरी कॉलोनी में बस एक यही पेड़ बचा है हमारे लिए।’ नीतू गौरिया ने चुलबुल तोते से कहा। ‘मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है कि सब लोग पेड़ कटवा क्यों रहे है?’ चुलबुल ने दुखी होते हुए कहा। ‘अरे, तुम दोनों कहां चले गए थे?’ पेड़ के झुरमुट से टिन्नू गिलहरी की आवाज आई। नीतू चहकते हुए बोली- ‘टिन्नू, हम सामने वाले पार्क में पानी पीने के लिए गए थे।’ ‘सच! मुझे भी बताओ न, प्यास से मेरा गला सूखा जा रहा है।’ टिन्नू ने अपनी झबरीली पंूछ हिलाते हुए कहा।
‘वो देखो, सामने बगीचे वाला पाइप बीच से फटा है न, वहीं से पानी निकल रहा है।’ नीतू बोली। ‘मैं अभी पीकर आती हूं।’ कहते हुए टिन्नू झट से पेड़ से नीचे उतर गई। टिन्नू को देख कर थोड़ी ही देर बाद वहां पर कई कौए, बुलबुल ओर मैना आ गर्इं।’ सभी पक्षी बहुत खुश थे और पानी पीने के बाद ठंडी बौछारों में खेल रहे थे। गौरैयां तो खुशी के मारे पानी में फुदक-फुदक कर खेलने लगीं। उधर माली अपने सिर पर हाथ रखे परेशान खड़ा था। वह पानी की बर्बादी देख कर बहुत दुखी हो रहा था। थोड़ी देर सोचने के बाद वह सामने वाली किराने की दुकान से सेलो टेप लेकर आया और पाइप के पास आकर खड़ा हो गया।

उसे देख कर डर के मारे सभी पक्षी वहां से तुरंत उड़ गए। माली ने पाइप के छेद पर स्लो टेप कस कर लपेट दिया। देखते ही देखते पाइप से पानी बहना बंद हो गया। सभी पक्षियों ने एक-दूसरे की तरफ दुखी होते हुए देखा और वहां से उड़ गए। माली अपनी अक्लमंदी पर खुश होता हुआ सामने वाली दुकान पर वापस पहुंचा और दुकानदार से बोला- ‘तुम लोगों ने देखा कि मैंने पानी की कितनी बर्बादी रोक दी!’ सभी लोगों ने माली की तरफ प्रशंसा भरी नजरों से देखा।
माली फूल कर कुप्पा हो गया। तभी उसकी नजर दो छोटे बच्चों पर पड़ी, जो गुस्से से उसे देख रहे थे। माली को समझ नहीं आया कि भला बच्चे उससे क्यों नाराज हैं। उसने बच्चों के पास जाकर बड़े ही प्यार से पूछा- ‘तुम दोनों क्या मुझसे नाराज हो?’ पहला बच्चा बोला- ‘इतने मोटे पाइप में हमने कितनी मेहनत से छेद किया था और आपने हमारी सारी मेहनत खराब कर दी।’

यह सुनते ही माली आश्चर्य से बोला- ‘पर भला तुम लोगों ने ऐसा क्यों किया था?’ दूसरा बच्चा तुरंत बोला- ‘अंकल, जैसे आपको और हमें प्यास लगती है न, वैसे ही इन पक्षियों को भी लगती है। पाइप से जो फुहार निकलती है उसी से ये सब पानी पीते हैं और आपके पानी की कोई बर्बादी नहीं हो रही है। वह पानी आपके बगीचे में ही तो जा रहा है।’ ‘हां, देखिए तो, वहां पर लगे फूलों के पेड़ कितने हरे-भरे हैं।’ दूसरे बच्चे ने खुश होते हुए कहा। बच्चों की बात सुन कर माली के साथ-साथ वहां खड़े लोग भी सन्न रह गए। तभी दुकानदार बोला- ‘हम सब लोग इन पक्षियों के लिए दाना-पानी रखेंगे, ताकि इन्हें पाइप से पानी गिरने का इंतजार न करना पड़े और ये जब चाहे तब खा-पी सकें। माली काका ने प्यार से बच्चों के सिर पर हाथ फेरा और बोला- ‘अब हमें कोई पेड़ काटने को कहेगा तो हम उसे बताएंगे कि यह पक्षियों का घर है और हम किसी का घर नहीं तोड़ेंगे।’
बच्चों के चेहरों पर मुस्कान छा गई और माली काका चल दिए बगीचे की ओर, पाइप से टेप हटाने के लिए…

मंजरी शुक्ला