कविता
शादाब आलम
माथा

माथा-मत्था-मनन-थनन-थन!
माथापच्ची करता हूं तो
लगे सिकुड़ने
सोच दौड़ती है मन के
अंबर में उड़ने।
उड़ती जाती, उड़ती जाती
सन-सन-सन-सन-सनन-सन!
माथा-मत्था-मनन-थनन-थन!
आंख,नाक,भौंहों के ऊपर
बैठा तनके
कुछ गड़बड़ होने के शक पर
फौरन ठनके।
मगर सुनाई दे ना इसकी
ठन-ठन-ठन-ठन-ठनन-ठन!
माथा-मत्था-मनन-थनन-थन!
दुखता है, तो हाथ मदद
के खातिर बढ़ते
राहत मिलती, कदम उंगलियों
के जब पड़ते।
सभी उंगलियां नाचें इस पर
तनक-धनक-धक-तनन-धन!
माथा-मत्था-मनन-थनन-थन!
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
सूचि / सूची
कपड़े सीने के लिए उपयोग की जाने वाली सुई के लिए संस्कृत में शब्द है- सूचिका। इसे सूचि भी कहते हैं। जबकि जब अनेक विवरणों को क्रमवार लगाया जाता है, विभिन्न कामों का क्रमबद्ध खाका तैयार किया जाता है, तो उसे सूची कहते हैं। सूची का एक अर्थ व्यूह भी होता है। कुछ लोग सूचि के अपभ्रंश रूप में भी सूची का उपयोग करते हैं।
सुखी / सूखी
प्रसन्न, खुशहाल का पर्याय है सुखी। जिसे किसी प्रकार का कष्ट न हो उसे सुखी कहते हैं। जबकि सूखी सूखा का स्त्रीवाची शब्द है। जैसे सूखी लकड़ी, सूखी सब्जी। सूखी यानी जिसका रस सूख चुका हो।

