नागेश पांडेय ‘संजय’
कविता: पास हुए हम
पास हुए, पास हुए,
पास हुए हम।
मेहनत से साल भर,
पढ़ते रहे।
रुके नहीं, थके नहीं,
बढ़ते रहे।
आलस के नहीं कभी
दास हुए हम।
ढेर से नंबर हैं,
हमको मिले।
इसीलिए खुशियों से,
चेहरे खिले।
खास हुए, खास हुए,
खास हुए हम।

पढ़ना है, बढ़ना है,
रुकना नहीं।
बाधाओं के आगे,
झुकना नहीं।
अपने तो मन के अब
बॉस हुए हम।
पास हुए, पास हुए,
पास हुए हम।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
अंगड़ाई / अंगनाई: शरीर की वह क्रिया, जिसमें धड़ और बाहों को ताना जाता है, उसे अंगड़ाई कहते हैं। सोकर उठने के बाद प्राय: ऐसा होता है। जबकि अंगनाई आंगन को कहते हैं। प्राय: छोटे आंगन को अंगनाई कहते हैं।
अभ्यास / अध्यास: पूर्णता या दक्षता प्राप्त करने के लिए एक ही काम को बार-बार करने को अभ्यास कहते हैं। अंग्रेजी में इसे प्रैक्टिस कहते हैं। जबकि अध्यास का अर्थ भ्रम, मिथ्या ज्ञान है। अंग्रेजी में इसे इल्यूजन कहते हैं।

