जिन्हें बोलना था, वे बोले नहीं
जिन्हें बचना था, वे बचे नहीं
और जिन्हें बचना नहीं चाहिए था
वे बच गए हर हाल
बचा मैं भी बेशर्म।
जिन्हें लड़ना था, वे लड़े नहीं
और जिन्हें लड़ना नहीं चाहिए था
वे लड़ गए हर हाल
लड़ा मैं भी बेशर्म।
जिन्हें हारना था, वे हारे नहीं
और जिन्हें हारना नहीं चाहिए था
वे हार गए हर हाल
हारा मैं भी बेशर्म।
जिन्हें बोलना था, वे बोले नहीं
और जिन्हें बोलना नहीं चाहिए था
कभी करते हुए रूदन तो कभी करते हुए अट्टहास
वे बोल गए हर हाल
बोला मैं भी बेशर्म।
जिन्हें खुलना था, वे खुले नहीं
और जिन्हें खुलना नहीं चाहिए था
वे खुल गए हर हाल
खुला मैं भी बेशर्म।
जिन्हें रहना था, वे रहे नहीं
और जिन्हें रहना नहीं चाहिए था
वे रह गए हर हाल
रहा मैं भी बेशर्म।
जिन्हें बहना था, वे बहे नहीं
और जिन्हें बहना नहीं चाहिए था
वे बह गए हर हाल
बहा मैं भी बेशर्म।
जीवन मिथ्या है
जीवन मिथ्या है
जरूरी है कि मिलने का मन बनाओ
जो हो न सका पिता से संभव
उसे संभव बनाओ
और करो यकीन भरपूर-भरपूर
कि जो कह रहा है कवि
भरोसा करो कवि की संवेदनाओं पर
जीवन मिथ्या है।
जीवन तब कठिन लगता है
जीवन तब कठिन लगता है
जब अपने ही लोगों के बीच रहने से
मुझे रोज-रोज, पल-पल डर बना रहता है
एक बात बताता हूं, खबर मत बनाना
मेरा कवि, उन्हीं-उन्हीं लोगों से बनता है
और कुछ-कुछ गाहे-बगाहे सच कहता है
सच कहने का साहस उठाते हुए। ०

