नागेश पांडेय ‘संजय’

फ्रिज में मेढक

गरमी पड़ी जोर की तो फिर
मेढक जी घबराए।
सूखा ताल छोड़ बेचारे,
इधर-उधर मंडराए।

खुला हुआ था मौसी का फ्रिज,
आसन वहां जमाया।
खुश हो टर्र-टर्र चिल्लाए,
फौरन गया भगाया।

मेरी पीठ खुजाओ

लोट-लोट कर बुरा हुआ जब,
बंदर जी का हाल।
कहा मदारी जी से- मेरी
बात सुनो तत्काल।

नहीं तमाशा मेरे वश का,
दूजा बंदर लाओ।
या फिर बैठो, रोज शाम को
मेरी पीठ खुजाओ।

नाई लोमड़ की दुकान पर

नाई लोमड़ की दुकान पर,
लगा हुआ थी टीवी।
फिल्म आ रही थी उस पर हां
एक लड़ाकू बीवी।

एक सीन में जैसे ही बीवी
कस कर गुर्राई,
कांपा हाथ और ग्राहक की
नाक कट गई भाई।