आ जाओ
चंदा मामा बड़े सलोने
बच्चों के तुम खेल खिलौने
दूर देश में बसे हो जाकर
देखो कभी यहां पर आकर
चंदा मामा हो तुम तो क्यों
घर पर कभी न आते हो
आकर राखी पर मम्मी से
क्यों राखी न बंधवाते हो
मां कहती है- तुम सोते हो
एक बादल के बिस्तर पर
मखमल जैसा एक बिछौना
रखा है हमने घर ला कर
आसमान से ज्यादा सुंदर
और प्यारी यह धरती है
सतरंगी है इसकी काया
सबको आकर्षित करती है
रोज साथ में हम मिल कर
हलवा-पूरी खाएंगे
साथ-साथ हम सैर करेंगे
नाचेंगे और गाएंगे
देखो अब छुटकी भी तुमको
अपने पास बुलाती है
चंदामामा आ जाओ
याद तुम्हारी आती है

