रोचिका शर्मा
नया सवेरा
बीता बरस विदा ले रहा
नया सवेरा द्वार खड़ा
कुछ कड़वी कुछ खट्टी-मीठी
यादें ये भी छोड़ चला
छूट गए कुछ हाथ सफर में
संग नए हमराह चले
पतझड़ पीले पात ले गई
खिला बसंत सौगात लिए
लेखा-जोखा विगत पलों का
क्या खोया क्या पाया है
अवसर जो पहचान सका ना
वक्त गए पछताया है
आना-जाना नया-पुराना
सदियों से है रीति यही
इस पल को जी ले जी भर
सदा सयाना शख्स वही
१आशा शर्मा
नव किरणें घर लाएं
नए साल में नई सुबह की नव किरणें घर लाएं
दृढ़ निश्चय कुछ नया करें हम मिल कर
कसम उठाएं
करें तरक्की की हम बातें या वैज्ञानिक खोजें
छोड़ पुरानी बातें कल की नए विषय पर सोचें
जहां कहीं भी रही कमी हो उस को पूरा कर दें
गीत कभी जो नहीं सुने हों उनको हम नवस्वर दें
भरा जोश हो और उमंगें मन गुब्बारा फूले
धरती से ऊंचा उठ कर वह आसमान को छू ले
गूंज उठे फिर दसों दिशाएं बजे नाम का डंका
सूरज की तरह चमकेंगे नहीं रहे कोई शंका

