आ ज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भोजन संबंधी अनियमितता की शिकायतें बहुत सारे लोगों में दिखाई देने लगी हैं। काम के दबाव के चलते अक्सर लोग समय पर नाश्ता और भोजन नहीं ले पाते। कई लोग बेवक्त कुछ-कुछ खाते रहते हैं। इससे उनके खानपान में अनियमितता आ जाती है और उनमें भोजन संबंधी मनोविकार पैदा होते हैं। कुछ लोगों को खाने की इतनी तीव्र इच्छा होती है कि वे खुद को रोक नहीं पाते और हर समय कुछ न कुछ खाते रहते हैं। छिप-छिप कर खाते हैं। कुछ लोग काम का दबाव अधिक होने पर खाते हैं, तो उन्हें मानसिक संतुष्टि मिलती है, तो कुछ लोग खालीपन, अकेलापन या बोरियत दूर करने के लिए भी खाते हैं। खाने से उन्हें लगता है कि बोरियत दूर हो रही है, वे तनावमुक्त हो रहे हैं। इसी तरह कुछ लोग मोटापे वगैरह को लेकर इस कदर साकांक्ष रहने लगते हैं कि खाने से हर समय परहेज करते पाए जाते हैं। खासकर युवतियों को सुंदर और आकर्षक दिखने की चाह में ऐसा करते प्राय: पाया जाता है। इस तरह की स्थितियां भोजन संबंधी विकार की वजह से पैदा होती हैं, जिन्हें चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ईटिंग डिसॉर्डर कहते हैं।
भोजन संबंधी अनियमितता या ईटिंग डिसॉर्डर के कुछ प्रमुख प्रकार हैं-
एनोरेक्सिया नरवोसा
एनोरेक्सिया से पीड़ित लोगों को वजन बढ़ने का डर सताता रहता है, इसलिए वे खुद को ज्यादातर समय भूखा रखते हैं। वे खुद मान लेते हैं कि उनका वजन अधिक है, यानी वे ओवरवेट हैं। हालांकि वास्तव में उनके साथ स्थिति इसके उलट भी हो सकती है, यानी उनका वजन जरूरत से कम हो सकता है। हो सकता है, वे अंडरवेट हों। उनका आत्मसम्मान अपने शरीर की छवि से जुड़ा होता है और शरीर को लेकर उनके जेहन में गलत और बिगड़ी हुई तस्वीर होती है और इससे उनमें हीन भावना आ जाती है और आत्मसम्मान भी कम होता है। इस तरह इस बीमारी से पीड़ित लोगों को भोजन से अरुचि हो जाती है और वे शरीर के लिए जरूरी पोषाहार नहीं ले पाते। शरीर कमजोर होता है, तो उनके मन पर भी असर पड़ता है।
बुलिमिया नरवोसा
बुलिमिया से पीड़ित लोगों में सामान्य से अधिक खाने की प्रवृत्ति होती है। ऐसे लोग या तो भोजन के प्रति अधिक आसक्त होते हैं या पोषाहार के प्रति अधिक सजग होते हैं। फिर भोजन को पचाने के लिए ये बहुत ज्यादा व्यायाम करते हैं या रेचक औषिधियां (लैक्सटिव) और मूत्रवर्धक पदार्थ (डाइयुरेटिक) लेते रहते हैं। वे वजन कम करने के लिए लंबे समय तक निराहार भी रहने लगते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उनका आत्मसम्मान, भोजन पर नियंत्रण करने की उनकी भावनाओं से पक्की तरह जुड़ा होता है।
बिंज ईटिंग डिसआॅर्डर
इस विकार से पीड़ित लोग बहुत ज्यादा मात्रा में खाते रहते हैं और उन्हें किसी तरह का नियंत्रण नहीं महसूस होता। वे खाए हुए को न तो निकालने की कोशिश करते हैं या वजन कम करना चाहते हैं, लेकिन अपने खाने की आदत से उनमें शर्म की गहरी भावना होती है। इस आदत को छिपाने के लिए वे अकेले खाने लगते हैं। कभी-कभी भूख न लगी हो तो भी खाना चाहते हैं। वे हमेशा खुद को भूखा महसूस करते हैं और थोड़ी देर भी बिना कुछ खाए रहें तो उन्हें बेचैनी महसूस होने लगती है। भोजन देखते ही उनके मुंह में पानी आ जाता है और जल्दी-जल्दी खाने लगते हैं। खाते न रहें तो काम में उनका मन नहीं लगता। बोरियत महसूस करने लगते हैं।
बचाव
भोजन संबंधी उपरोक्त अनियमितताएं एक प्रकार का मनोरोग हैं। ऐसे विकार प्राय: उन लोगों में सहज रूप से पैदा हो जाते हैं, जो कहीं न कहीं भावनात्मक रूप से आहत होते हैं। माता-पिता से उचित प्यार न मिल पाने, पत्नी या पति से मानसिक रूप से खिन्न होने, दफ्तर में काम का उचित वातावरण न मिल पाने आदि की वजह से ये विकृतियां पैदा हो सकती हैं। अगर समय रहते, इनका उपचार न किया जाए तो शरीर पर इनका गंभीर प्रभाव पड़ता है। भोजन संबंधी अनियमितता से शरीर की चयापचय प्रक्रिया यानी मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और व्यक्ति या तो अत्यधिक मोटापे का शिकार होने लगता है या फिर अत्यधिक कमजोरी का। दोनों स्तितियां स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक नहीं हैं। जो व्यक्ति इन विकारों से पीड़ित होता है, उसे खुद समझ नहीं आता कि उसमें कोई डिसआॅर्डर है, क्योंकि वह अपनी गतिविधियों को उचित मानता है। इसलिए परिवार के लोगोें और मित्रों का दायित्व बनता है कि ऐसे व्यक्ति को चिकित्सीय सलाह दिलाएं। उन पर किसी तरह का मानसिक दबाव न बनाएं या उनका उपहास न उड़ाएं, उन पर अपना फैसला न थोपें। चिकित्सीय सलाह से उनके खानपान को नियंत्रित और इन अनियमितताओं से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
देर रात तक जाग कर काम करने, देर रात को लौट कर भोजन करने, बिस्तर पर लेटे-लेटे लैपटॉप या मोबाइल पर काम करते हुए, टीवी देखते हुए कुछ न कुछ खाते रहने की प्रवृत्ति आज के युवाओं में आम हो चली है। दोपहर तक भूख न लगना और फिर थोड़े-थोड़े अंतराल पर लगातार कुछ न कुछ खाते रहना, यह सब भोजन संबंधी अनियमितताओं से पैदा विकार हैं। यह न भूलें कि भोजन शरीर को पोषण पहुंचाने के लिए जरूरी है, न कि मानसिक संतोष का जरिया। बोरियत दूर करने, तनाव से मुक्ति पाने, अकेलापन दूर करने आदि के लिए भोजन का सहारा न लें। निर्धारित समय पर भोजन करने का दृढ़ता पूर्वक समय जरूर निकालें। भूख से कम भोजन करें।
१रविवारी डेस्क

