राजकुमार सिंह
मौसम गरमी का हो या सर्दी या बरसात का? हर मौसम में त्वचा को बीमारियों से बचाना जरूरी होता है। घमौरियां गरमी के मौसम की बीमारी है। गरमी के मौसम में जहां लू, हैजा, चक्कर आना और पेट संबंधी कई दिक्कतें जन्म लेती हैं और शरीर में निर्जलीकरण की समस्या पनपती है, वहीं त्वचा भी धूप की तपिश से प्रभावित होती है। घमौरियां भी इस मौसम की एक आम समस्या हैं। यों तो इससे अधिक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन जब यह लगातार बनी रहती है तो खुजली, जलन जैसी कितनी ही पेरशानियां बढ़ जाती हैं और शरीर में असहनीय चुभन होती है। घमौरियों से बचाव और इनसे निजात पाने के उपाय जानने से पहले यह समझना भी जरूरी है कि आखिर यह होती ही क्यों हैं? दरअसल, घमौरियां ज्यादा पसीना आने की वजह से होती हैं। अत्यधिक पसीने आने की वजह से त्वचा की ग्रंथियों का मुंह बंद हो जाता है और इससे शरीर से निकलने वाली गंदगी बाहर नहीं निकल पाती। ऐसे में शरीर पर छोटे-छोटे लाल रंग के दाने उभर आते हैं। इनमें खुजली और जलन होने लगती है। त्वचा संबंधी इसी समस्या को आम बोलचाल में घमौरी कहा जाता है। ज्यादातर यह समस्या उन लोगों को होती है जो धूप में अधिक समय तक रहते हैं। बच्चों को घमौरियां इसीलिए होती हैं, क्योंकि वह अक्सर धूप में खेलते रहते हैं। तेज धूप के संपर्क में अधिक समय तक रहने से माथे, पीठ व गर्दन पर छोटे-छोटे दाने निकलने लगते हैं। बाद में यही दाने लाल रंग के हो जाते हैं और पूरे बदन में फैल कर जलन करते हैं और इनमें चुभन भी महसूस होती है।

यह स्थिति असहनीय होती है। यों तो अधिकतर घमौरियां हाथ-पैर, छाती व बगल, पीठ आदि पर ही निकलती हैं। मगर चेहरे और सिर पर भी इनका प्रभाव रहता है। बरसात के दिनों में भी त्वचा पर घमौरियों का असर देखा जा सकता है, इसलिए इसके प्रति सजग रहें और इससे बचाव के उपाय करें। हालांकि आज इससे बचाव के लिए बाजार में कई तरह के पाउडर, क्रीम और दवाएं उपलब्ध हैं। मगर कुछ घरेलू नुस्खों की सहायता से भी इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।  ’ऐलोवेरा जैल त्वचा संबंधी कई समस्याओं के लिए अचूक उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। घमौरियों में भी इससे राहत मिलती है। इसलिए अगर घमौरियों से जल्दी राहत चाहिए तो ऐलोवेरा जैल को कुछ देर घमौरियों से प्रभावित त्वचा पर लगाएं। आराम मिलेगा।  ’नारियल के तेल में कपूर मिला कर लगाने से भी घमौरियों से होने वाली जलन, खुजली में आराम मिलता है।  ’एक प्लास्टिक बैग में बर्फ के टुकड़े डाल कर इससे घमौरियों वाले स्थान पर कम से कम दस मिनट प्रतिदिन सिंकाई करें। घमौरियों से आराम भी मिलेगा और यह फैलने से रुकेंगी भी।
’नीम शुरू से ही औषधि के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। नीम की पत्तियों को उबाल कर उसके पानी को घमौरियों वाली त्वचा पर लगाएं। इससे घमौरियों को भी फायदा होगा और त्वचा संबंधी अन्य समस्याएं भी दूर होंगी।  गुलाब का फूल एक तरह की दवा का काम भी करता है और ठंडक भी पहुंचाता है। गुलाब की पत्तियों को रात भर पानी में डाले रखें और सुबह इस पानी से नहा लें। इससे घमौरियों में आराम मिलता है।  ’अक्सर चेहरे की त्वचा के निखार के लिए मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाया जाता है। इसकी वजह यही है कि यह ठंडक भी देती है और त्वचा संबंधी कई समस्याओं से निजात भी। गर्मियों में घमौरियों से छुटकारा पाने के लिए भी मुल्तानी मिट्टी का लेप बहुत फायदेमंद होता है।
’नीम की पत्तियों में एंटीबायोटिक गुण होते हैं। इसलिए इसका लेप फायदेमंद होता है। घमौरियों में नीम और तुलसी के पत्तों का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाएं और सूखने के बाद धो दें। इससे कुछ ही दिनों में घमौरियों से आराम मिलेगा।  ’खीरा गरमी का एक ऐसा फल है जिसमें अनेक गुण होते हैं। एक गिलास पानी में नींबू के रस को निचोडेÞं और फिर इसमें खीरे के टुकड़ों को डाल दें। अब इन टुकड़ों को घमौरियों वाले स्थान पर लगाएं। इस उपाय से घमौरियां जल्दी ठीक होंगी और खुजली और जलन में भी फायदा मिलेगा।

घमौरियों से बचाव
अगर घमौरियां हो गई हैं तब तो उन्हें दूर करने के उपाय करने चाहिए, लेकिन अगर घमौरियों नहीं हुई हैं तो कुछ ऐसे उपाय अपनाने चाहिए कि जिससे कि वे हों ही न । इसके लिए जरूरी है बचाव। बचाव उन चीजों से जो गरमी में शरीर में गरमी बढ़ाती हैं और दिक्कत पैदा करती हैं। इसलिए कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है-
’अक्सर कुछ लोगों को कृत्रिम आभूषण से एलर्जी होती है, इसलिए गरमी में इस तरह के जेवर न पहनें।
’गरमी में आराहदेह और ढीले कपड़ों का चयन करें।
’गरमी में तेज मिर्च-मसालों से बना खाना या फिर तले पकवान खाने से बचें।
’धूप में निकलने से बचें। निकलना पड़े तो स्कार्फ, अंगोछा से चेहरे को अच्छी तरह ढंक कर निकलें।
’गरमी में शरीर में ठंडक रहे और पानी की कमी पूरी होती रहे ताकि त्वचा या पेट संबंधी कोई समस्या न पनपे। इसके लिए दिन में दो से तीन लीटर पानी प्रतिदिन पीना ही चाहिए। वहीं आम का पन्ना, दही की लस्सी, मट्ठा, सत्तू आदि का सेवन भी राहत पहुंचाता है।
’शरीर में गरमी की अधिकता बढ़ जाने की वजह से घमौरियां पनपती हैं। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा फलों का रस पिया जाए।
घमौरियों के अलावा भी गर्मियों में फोड़े-फुंसी की समस्या होती है। इसके लिए हो सके तो दिन में दो बार ऐंटीबैक्टीरियल साबुन से स्नान करें और शरीर को साफ और सूखा रखें।