प्रेरणा मालवीया
हरिया रोज की तरह स्कूल से वापस अपने घर जा रहा था कि रास्ते में उसे एक चमकीली वस्तु दिखाई दी। उसने अपनी साइकिल सड़क के एक ओर खड़ी की और उस वस्तु के नजदीक जाने लगा। जैसे-जैसे वह उस चमकीली वस्तु के नजदीक जा रहा था उसकी रोशनी और तेज होती जा रही थी। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। साथ ही उसको यह डर भी लग रहा था कि कहीं कोई उसको देख न ले। जैसे ही वह नजदीक पहुंच कर उसको छूने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया, वैसे ही वह एकदम से गायब हो गई। हरिया ने घबराकर झट से अपना हाथ पीछे कर लिया। डर के मारे उसका पूरा शरीर पसीने से भीग गया। जल्दी से साइकिल पर बैठकर वह सरपट अपने घर की ओर भागा। घर पर मां उसके आने की राह रोज की तरह देख रही थी। हरिया को देखते ही उसने कहा बेटा- खाना खाकर खेत पर चले जाओ। फसल कटाई का काम चल रहा था। इतना कहकर वह अपने पति का दोपहर का खाना लेकर खेत पर चली गई। मगर हरिया का मन तो उस चमकीली चीज में ही अटका हुआ था। वह हर हाल में यह जानना चाहता था कि आखिर वह क्या है ? उसके मन में डर और आश्चर्य दोनों की अनुभूति एक साथ हो रही थी।
हरिया भी बेमन से खाना खाकर मां के कहे अनुसार खेत पर चला गया। और अपने पिता द्वारा बताए गए काम में लग गया। खेत में काम करते हुए उसने वहां पर लोगों को कुछ फुसफुसाते हुए सुना। अपना काम छोड़कर उसने भी उस बात की ओर अपने कान लगा लिए। वे लोग भी किसी चमकीली वस्तु की ही बात कर रहे थे। यह सुनकर हरिया को बहुत आश्चर्य हुआ कि अरे, यह क्या माजरा है। उसे लगा कि सिर्फ उसने ही उस चमकीली चीज को देखा होगा। मगर और भी लोग इस बारे में जानते हैं। लेकिन डर के मारे उसने किसी से कुछ नहीं कहा। चुपचाप वह अपने काम में लगा रहा। खेत पर काम करके वह शाम को अपने माता-पिता के साथ वापस घर आ गया। लेकिन वह बात उसको लगातार परेशान कर रही थी। उसको कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है ?
रात में हरिया की मां सभी के लिए चूल्हे पर खाना बना रही थी और पास में ही बैठे उसके पिता से कुछ बात कर रही थी। उस दौरान हरिया भी पानी पीने के लिए रसोईघर में गया। अपने माता-पिता को भी यही बात करते हुए सुना तो उसके होश उड़ गए। वह कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि यह सब क्या हो रहा है? पानी पीकर वह भी वहीं चूल्हे के पास बैठ गया। और मां-पिता की बात ध्यान से सुनने लगा। वह भी उसी चमकीली चीज के बारे में बात कर रहे थे कि आजकल गांव में कोई चमकीली सी चीज दिखाई दे रही है। बहुत से लोगों ने उसे देखा है। अपने रामकिशन का लड़का जब उस दिन फसल बेचने शहर जा रहा था तो उसको भी वह दिखाई दी है। मगर जब उन लोगों ने भी उसको करीब से जाकर देखना चाहा तो वह गायब हो गई । सब सिर पर पैर रखकर भागे थे वहां से।
यह सुनकर हरिया को भी अपनी दोहपर की घटना याद आ गई। यही सब तो उसके साथ भी हुआ था। मगर वह किसी से कुछ नहीं कह पाया। खाना-खाकर सभी लोग सोने चले गए। आज हरिया घर के अंदर सोया। वैसे तो वह रोज रात में खाट पर बाहर ही सोता था क्योंकि उसको नीले आसमान में तारे देखना बहुत अच्छा लगता था। उन्हें देखे बिना उसे नींद नहीं आती थी। मगर आज तो वह बहुत डरा हुआ था। बाहर सोने के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकता था। इस कारण उसने घर के अंदर ही सोने का निर्णय लिया।मगर आज नींद तो उसकी आंखों से कोसों दूर थी। मन में अजीब-अजीब से ख्याल आ रहे थे। काफी देर तक वह इधर-उधर करवट बदलता रहा। और इसी उधेड़बुन में कब उसकी आंख लग गई, उसको पता ही नहीं चला। और जैसे ही वह गहरी नींद में गया, उसको सपने में वही चमकीली चीज दिखाई देने लगी। और वह जैसे ही उसके पास गया…अरे, उठ बेटा कब तक सोएगा? स्कूल के लिए देर हो जाएगी। मां की आवाज से हरिया की नींद खुली, मगर उसका सपना टूट गया। वह आंख मलते हुए धीरे-धीरे उठा। उसने देखा कि अरे यहां तो कुछ नहीं है। सब कुछ सामान्य है। और वह सब तो सपना देख रहा था और सपने में भी सपना। मतलब दो-दो सपने एक साथ । उसे अपने सपने पर बहुत हंसी आई। वह जल्दी से जल्दी अपने दोस्तों को भी यह सारी बात बताना चाहता था। इसलिए जल्दी से उठकर नहाने चला गया। स्कूल जाते समय साइकिल पर भी वह अपने सपने के बारे में सोच रहा था, सपना एक चमकीला सपना। १

