अरुणा कपूर

सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग से कौन परिचित नहीं है? सदियों से महिलाएं सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करती आ रही हैं। पुरातन काल में विविध वनस्पतियों के पत्तों और फलों का रस प्रयोग में लाया जाता था। हाथ और केश रंगने के लिए मेहंदी के सूखे या ताजे पत्तों को पीस कर पेस्ट बनाया जाता था, जो लाल या केसरिया रंग का होता था। उसी रंग को और गहरा बनाने के लिए उसमें नींबू का रस या दही मिलाया जाता था। चाय की पत्ती या कॉफी पाउडर मिलाने से भी मेहंदी का रंग और गाढ़ा बन जाता था। यह पेस्ट तीन से चार घंटों तक हाथ या केशों पर लगा रहने के बाद अपना रंग छोड़ता था, जिससे इसे पानी से साफ करने पर हाथ या केश, लाल या केसरिया रंग के नजर आते थे। यह प्रयोग, हाथों और केशों को सुंदरता प्रदान करता था। स्त्रियां इसे बहुत पसंद करती थीं। आज भी तीज-त्योहारों पर मेहंदी का खूब प्रयोग होता है। विभिन्न डिजाइनों के आविष्कार से मेहंदी के प्रयोग में बढ़ोतरी ही हुई है।

इसी तरह आंवले के ताजे फलों को पीस कर काला रंग उजागर किया जाता था। ये फल उबाल कर उसका गूदा हाथ से मसलने पर, हाथ पर काला रंग चढ़ जाता है। आंवला केशों को काला रंग प्रदान करने के लिए प्रयुक्त होता है। इससे त्वचा पर छाले, जलन, एलर्जी या अन्य किसी भी तरह का कोई बुरा असर पड़ता देखा नहीं गया है।होली में खेला जाने वाला केसरिया रंग कुछ दशक पहले तक केसूड़े के फूलों से तैयार किया जाता था, जो त्वचा के लिए बिल्कुल हानिकारक नहीं है और गांवों में आज भी इसका प्रयोग किया जाता है।
इसी तरह चेहरे पर निखार लाने के लिए हर तरह के उबटन पुरातन समय में भी बनाए जाते थे और आज भी प्रयोग में लाए जा रहे हैं। दूध, हल्दी का पाउडर, चंदन का पाउडर और दही को उचित मात्रा में मिला कर पेस्ट बनाया जाता है। इसे हाथ-पांव, चेहरे और गर्दन पर लगाया जाता है। कुछ समय बाद साफ पानी से धोकर अंग साफ किए जाते हैं, जिससे त्वचा नर्म-मुलायम बनती है, चेहरे पर निखार आता है और काले दाग-धब्बों से भी निजात पाई जा सकती है।

मगर अब सौंदर्य निखारने के पुराने तौर-तरीके पिछड़ते जा रहे हैं। बाजार में कई तरह के नए सौंदर्य प्रसाधन बिक्री के लिए मौजूद हैं। इनके लुभावने विज्ञापन आम जनता को आकर्षित करते हैं। गोरेपन की क्रीम कई कंपनियां बना रही हैं। इसमें कई तरह के केमिकल्स मिलाए गए होते हैं। खुशबू के लिए भी अप्राकृतिक वस्तुएं मिलाई गई होती हैं। रंग और चमक दिखाने के लिए भी केमिकल्स का ही प्रयोग किया जाता है। ऐसे गोरेपन की क्रीमों का इस्तेमाल कुछ समय बाद त्वचा के लिए हानिकारक सिद्ध होता है। चेहरा पहले से ज्यादा बेजान नजर आने लगता है। कुछ लोग एलर्जी से भी पीड़ित हो जाते हैं। कुछ लोगों के चेहरे पर दाग-धब्बे नजर आने लगते हैं, जो पहले नहीं थे।बाजार में बिकने वाले शैंपू भी सभी भरोसेमंद नहीं होते। विज्ञापनों में बालों को लंबा, सुंदर, काला और घना बनाने वाले शैंपू उल्टा असर भी दिखाते हैं। ऐसे उल्टा असर दिखाने वाले शैंपुओं के इस्तेमाल से बालों में असमय सफेदी और गंजेपन के शिकार भी बहुसंख्य लोग हुए हैं। यह भी शैंपू में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स, अप्राकृतिक रंग और अप्राकृतिक खूशबू की वजह से होता है।

ऐसा नहीं कि सभी सौंदर्य प्रसाधनों की निर्माता कंपनियां गलत माल ही बेचती हैं। अच्छी त्वचा और केशों के लिए हानिकारक न हो, ऐसे उत्पाद भी बनाने वाली कई कंपनियां हैं। इसलिए किसी भी सौंदर्य प्रसाधन के इस्तेमाल से पहले उसमें इस्तेमाल होने वाले घटकों के बारे में जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। अच्छे और नामी उत्पाद की आड़ में नकली माल बेचने वाली फर्जी कंपनियां भी बाजार में मौजूद हैं, जो सस्ते दामों में सौंदर्य प्रसाधन उपलब्ध कराती हैं। देखने-परखने के बाद ही वस्तुओं की खरीदारी करें। अभी कुछ दिन पहले एक सहेली का दोपहर के समय फोन आया। वह घबराई हुई थी। उसने बताया कि एक नामी कंपनी की लिपस्टिक का इस्तेमाल उसने किया और उसके होठों पर जलन पैदा होने लगी है, जो बढ़ती ही जा रही है। मैंने उसे तुरंत ठंडे पानी से होंठ अच्छी तरह धोने और साफ नरम कपड़े से सुखा कर शुद्ध देसी घी लगाने के लिए कहा। ‘ऐसा करने से उसे कुछ राहत महसूस हुई। मैंने उसे उपभोक्ता अदालत से संपर्क करने की भी सलाह दी, जिससे जांच हो और पता चल सके कि माल असली है या नकली।

मगर पत्र-पत्रिकाओं, टेलीविजन, इंटरनेट आदि पर सौंदर्य प्रसाधनों के प्रचार और उनके उपयोग का बाजार इस कदर व्याप्त है कि आमतौर पर लोग उनके दावों को सही मान लेते हैं। इन्हें जांचने-परखने का कोई विश्वसनीय और कारगर तंत्र न होने के कारण भी प्रसाधन सामग्री बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों के बारे में भ्रामक दावे करने का मौका मिलता है। ऐसे में उपभोक्ता को खुद सावधान रहने की जरूरत है। सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग में सावधानी बरतने की जरूरत है। वस्तुओं को देखने-परखने के बाद ही खरीदारी और प्रयोग करना उचित है।