अवसाद भी एक बीमारी है और यह जानलेवा साबित हो सकती है, इस बात को हाल तक लोग गंभीरता से नहीं लेते थे। पर अब कई ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिसमें अवसाद के कारण लोग इस कदर अंदर ही अंदर टूट जाते हैं कि उनकी जिंदगी में सब कुछ असामान्य होता चला जाता है। अवसादग्रस्त लोगों की आत्महत्या की खबरें भी अब आपवादिक नहीं रहीं, लिहाजा इसके बारे में जानना चाहिए।
दरअसल, अवसाद को बीमारी न मानने की भूल वे लोग ही करते हैं जो उदासी और अवसाद को एक मान लेते हैं जबकि ऐसा है नहीं। अवसाद यानी ‘डिप्रेशन’ एक मानसिक बीमारी है, जिसका संबंध मनोविज्ञान में किसी व्यक्ति की भावनाओं से जुड़े दुख या निराशा से होता है। अवसाद को ‘मूड डिसआर्डर’ के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। हर व्यक्ति समय-समय पर उदासी का अनुभव करता है। मगर जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार नकारात्मक सोच, हताश मनोदशा में घिर जाए और अपनी पसंदीदा गतिविधियों में भी दिलचस्पी न ले, तो इस तरह के लक्षण अवसाद के हो सकते हैं।
अवसाद और उदासी में फर्क
उदासी भावनात्मक स्थिति है, जो तनाव, जिंदगी की बड़ी घटनाएं (अच्छी और बुरी दोनों) और यहां तक कि मौसम के असर से भी पैदा होती है। उदासी और अवसाद में फर्क इसके लक्षणों की तीव्रता और इसके बार-बार लौट आने से किया जा सकता है। यदि ये लक्षण दो हफ्ते तक रहते हैं, तो डिप्रेशन हो सकता है।
अवसाद की वजह
बार-बार नाकामयाबी, नुकसान या किसी प्रियजन की मृत्यु आदि से भी ऐसा हो सकता है। किसी बड़ी और लंबी बीमारी के कारण भी व्यक्ति अवसाद में जा सकता है। परिवार में माता-पिता या कोई अन्य सदस्य अवसाद से पीड़ित है तो बच्चों में ऐसा होने का खतरा रहता है।
अवसाद का इलाज
डॉक्टर अवसादग्रस्त व्यक्ति की काउंसलिंग करके रोग की वजह समझने का प्रयास करते हैं। इसके बाद आवश्यकता के अनुरूप 6-8 माह तक एंटीडिप्रेसेंट दवाएं देते हैं। दवाओं के साथ-साथ मनोचिकित्सा व व्यवहारिक चिकित्सा द्वारा रोगी की निराशाजनक सोच को बदलने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान मरीज को पारिवारिक सहयोग जरूरी होता है।
कुछ जरूरी सलाह
’बात करें, मदद मांगें : अवसाद से गुजर रहे लोगों के लिए इससे उबरने के लिए नियमित तौर पर ऐसे व्यक्ति से बात करना जिन पर वे भरोसा करते हों या अपने प्रियजनों के संपर्क में रहना रामबाण साबित हो सकता है। इसमें शर्म या संकोच जैसी कोई बात नहीं है। अपनी परेशानी किसी के साथ साझा करना, उसे दूर करने का सामान्य तरीका है और इसे कोई भी बुरा नहीं मानता है।
’नकारात्मक लोगों से रहेंं दूर : अवसाद में लोगों से कटने की जरूरत नहीं है। आप अपने दोस्तों और प्रियजनों के साथ जितना ज्यादा जुड़े रहेंगे, उतना अच्छा होगा। पर दोस्तों-प्रियजनों से जुड़ने के साथ-साथ आप उन लोगों से जरूर खुद को दूर कर लें, जो नकारात्मकता से भरे होते हैं। ऐसे लोग हमेशा दूसरों का मनोबल गिराते हैं।
’अच्छी नींद : रोजाना सात से आठ घंटे सोने वाले लोगों में अवसाद के लक्षण कम देखे जाते हैं।
’संगीत सुनें : अवसाद में भी संगीत सुनना अच्छा लगता है। यह तथ्य कई वैज्ञानिक शोधों से भी प्रमाणित हो चुका है।
’पुरानी दुनिया से निकलें : अपनी पुरानी भूलों और गलतियों का शिकवा करना आपको पूरी तरह से अवसाद के चंगुल में फंसा सकता है। पुरानी बातों के बारे में सोचने के बजाय वर्तमान और भविष्य के बारें में सोचें।
’संतुलित खानपान और व्यायाम : सेहतमंद और संतुलित खानपान से शरीर और मन दोनों ही संतुलित रहते हैं। इसी तरह कई वैज्ञानिक शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि व्यायाम अवसाद को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। जब हम व्यायाम करते हैं तब सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो दिमाग को स्थिर करते हैं।

