मानस मनोहर
साबूदाना खिचड़ी
व्रत उपवास में भी साबूदाना खाया जा सकता है। इसलिए जो लोग अन्न का त्याग करते हैं, वे भी साबूदाने की बनी चीजें खाते हैं। यों भी अगर आप व्रत-उपवास नहीं रखते, तो साबूदाने की खिचड़ी उत्तम नाश्ता है। इससे न सिर्फ पेट भर जाता है, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी यह उत्तम होता है। यह दक्षिण भारत में उगने वाले शकरकंद जैसे एक प्रकार के कंद से बनता है। बहुत सुपाच्य और स्वादष्टि होता है।
साबूदाने की खिचड़ी कई प्रकार से बनती है। कुछ लोग इसे दाल और सब्जियों के साथ पतली खिचड़ी की तरह बनाते हैं। इसकी खीर भी बहुत बढ़िया बनती है। मगर साबूदाने की खिचड़ी ऐसी बने, जिसमें दाना-दाना अलग हो, तो उसे खाने का मजा ही अलग होता है। कई लोगों को शिकायत रहती है कि जब वे साबूदाने की खिचड़ी बनाते हैं तो दाना-दाना अलग नहीं रह पाता। वे चिपक कर हलवा जैसे बन जाते हैं। मगर इसके लिए थोड़ी सावधानी बरतें, तो कभी साबूदाने आपस में चिपकेंगे नहीं। जब भी साबूदाने की खिचड़ी बनानी हो, साबूदाना अच्छी गुणवत्ता का और बड़े दानों वाला लें। पैकेट वाला साबूदाना ही खरीदें। खुले साबूदाने में अक्सर मिलावट का खतरा रहता है और जब आप उन्हें भिगोते हैं, तो वे गल जाते हैं। फिर पकाने पर चिपक कर वह हलवा जैसा बन जाता है।
खिचड़ी बनाने से कम से कम एक-दो घंटे पहले साबूदाने को भिगो दें। भिगोते समय ध्यान रखें कि पानी उतना ही रहे, जितने से साबूदाना पूरी तरह डूब जाए। जैसे ही साबूदाना के ऊपर पानी नजर आने लगे पानी न डालें। इतनी मात्रा में पानी को पूरी तरह सोख कर साबूदाने अच्छी तरह फूल जाएंगे। पकाने से पहले एक बार देख लें कि पानी पूरी तरह सूख गया है या नहीं। अगर पानी कुछ बचा रह गया है, तो उसे निथार लें और साबूदाने को एक बर्तन में फैला कर रख दें, ताकि पानी बिल्कुल सूख जाए।
अब साबूदाने की आधी मात्रा में मूंगफली लें। बाजार में भुनी, बिना छिलके वाली मूंगफली मिल जाती है। अगर वह न हो तो कच्ची मूंगफली को तवे पर सेंक कर उसका छिलका उतार लें। पंद्रह-बीस मूंगफली के दानों को अलग करके बाकी को ग्राइंडर में अच्छी तरह पीस लें। इस पिसी मूंगफली को साबूदाने में डालें।
ऊपर से जरूरत भर का काला नमक, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर और एक चम्मच धनिया पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिलाएं, ताकि सारी सामग्री सारे साबूदाने में चिपक जाए। पांच-दस मिनट के लिए छोड़ दें। इतनी देर में साबूदाने की ऊपरी सतह की बची हुई नमी को मूंगफली और मसाले सोख लेंगे। कई लोग इसमें आलू खाना पसंद करते हैं। अगर आप भी ऐसा पसंद करते हैं, तो एक-दो उबले हुए आलू को छोटे टुकड़ों में काट कर साबूदाने में डाल दें। अब एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच घी गरम करें। उसमें जीरा और कढ़ी पत्ते का तड़का दें। तड़का तैयार हो जाए तो आंच को धीमी कर दें और उसमें पहले मूंगफली के बचा कर रखे दाने डालें और फिर साबूदाना डाल कर हल्के हाथों से पलटते हुए पकाएं।
पांच मिनट पकाने के बाद कड़ाही पर ढक्कन लगा दें और कड़ाही की गरमी से साबूदानों को पकने दें। पांच-सात मिनट बाद ढक्कन खोलें और एक बार फिर साबूदाने को अच्छी तरह उलट-पलट कर चलाएं। साबूदाने पक कर पारदर्शी हो चुके होंगे। सारे दाने अलग-अलग और चमकदार। गरम-गरम साबूदाना खाने को तैयार है। इसे छाछ के साथ खाएं, यह व्रत-उपवास के समय का भी अच्छा नाश्ता है। यों भी सामान्य दिनों में इसे बना कर खाएं और आनंद लें।
सात्विक मुंगौड़ी
मुंगौड़ी मूंगदाल से बनी वड़ियों को कहते हैं। यों दूसरी दालों की बनने वाली वड़ियों को भी आम चलन में मुंगौड़ी बोल दिया जाता है। वड़ियां हमारे देश के अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग प्रकार से बनती हैं। मुंगौड़ी बनाने के लिए बहुत तैयारी करने की जरूरत नहीं होती। इसके लिए कुछ खड़े और कुछ पिसे मसालों की जरूरत होती है। थोड़ी-सी कुटी अदरक भी। मुंगौड़ी बनाने के लिए एक कुकर में दो-तीन चम्मच तेल गरम करें। उसमें जीरा, सौंफ और अजवाइन का तड़का दें। तड़के में दो चुटकी हींग भी डाल दें। फिर कुटी हुई अदरक डाल कर पांच-सात सेकंड के लिए भूनें और फिर मुंगौड़ियों को डाल कर अच्छी तरह सेंक लें।
ध्यान रखें कि मुगौड़ियां जलने न पाएं। आंच धीमी रखें और उन्हें चलाते रहें। जब मुंगौड़ियां सिंक जाएं, तो उसमें एक चम्मच कुटी लाल मिर्च, एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच सब्जी मसाला डाल कर चलाएं और एक से डेढ़ गिलास पानी और जरूरत भर नमक डाल कर कुकर का ढक्कन लगा दें। मध्यम आंच पर पांच से सात मिनट तक पकने दें। इस बीच दो सीटी आ जाएंगी। इतना पकाना पर्याप्त है।
वड़ियां नरम हो चुकी होंगी। जब कुकर की भाप शांत हो जाए, तो ढक्कन खोलें और उसमें मूंग दाल के दो कच्चे पापड़ छोटे-छोटे टुकड़े करके डाल दें और अच्छी तरह मिला कर एक बार फिर ढक्कन लगा दें। सब्जी की गरमी से ही पापड़ पक जाएंगे। बिना लहसुन-प्याज वाली मुंगौड़ी की सब्जी तैयार है। इसे रोटी, परांठे या चावल किसी के भी साथ खा सकते हैं। यह राजस्थान की लोकप्रिय सब्जी है।
>नोट : अगर आपको मुंगौड़ी की सब्जी पसंद नहीं है, तो इसमें हरे वाले दो-तीन बैगन भी काट कर डाल सकते हैं। जब वड़ियां भुन जाएं तब कटे हुए बैगन डालें और थोड़ा चलाने के बाद कुकर का ढक्कन लगा दें। बैगन वड़ियों की ग्रेवी को गाढ़ा कर देंगे और उनका स्वाद और बढ़ जाएगा।

