पारुल शर्मा
दीया और टीया दो बहनें हैं। दोनों में उम्र का कोई सात साल का अंतर है। दीया बड़ी और टीया छोटी है। इनका परिवार बहुमंजिला अपार्टमेंट में रहता है। माता-पिता काम पर चले जाते तो दीया, टीया का पूरा ध्यान रखती। एक दिन की बात है, स्कूल से जब दीया लौटी तब बहुत गर्मी पड़ रही थी। उस ने सोचा चलो शाम को सोसायटी के स्वींमिग पूल में नहाया जाए। वह शाम होने का इंतजार करने लगी। तभी उसे स्कूल से मिले होमवर्क की याद आई। वह बड़े बेमन से अपना बस्ता खोला कर किताबें निकालने लगी। यह सब देख कर टीया कैसे चुप रह सकती थी। वह भी अपनी कलर बुक यानी ऐसी किताब जिस में पशु-पक्षियों की आकृतियां बनी थी, ले आई। लेकिन होमवर्क करने के लिए दीया को कंप्यूटर भी खोलना था।
उसकी टीचर सारा होमवर्क कंप्यूटर पर ही तो भेजती थी। उसकी निगाह पास बैठी छोटी बहन पर गई। टीया बेफ्रिकी से कलर बुक में बने हाथी घोड़ों में अपनी कल्पना के रंग भर रही थी। मौका देख दीया ने कंप्यूटर खोल लिया। मम्मी ने कंप्यूटर का पासवर्ड इसी शर्त पर दीया को बताया था कि वह केवल होमवर्क देखेगी और काटर््ून नहीं देखेगी। दोनों चुपचाप अपना काम करने लगीं। लेकिन टीया ठहरी छोटी और शरारती। जब थोड़ी देर हो गई तो टीया को लगा कि दीया उस से बात नहीं कर रही है। उसने दीया की किताब अपनी तरफ खींची। दीया ने उस से धीरे से कहा,‘मत करो। मुझे काम करना है। स्कूल का होमवर्क है।’ इस पर भी टीया नहीं मानी। उसने फिर से किताब अपनी ओर खींची और अपने हाथ में पकड़ी कलर पेंसिल से उसकी किताब पर लंबी -लंबी लाइनें बना डाली। और यह क्या ,कंप्यूटर खुला देख झटपट जा चढ़ी दीया की कुर्सी पर और लगी माउस को पकड़ने। दीया ने माउस को अपनी तरफ लपकना चाह और इसी छीनाझपटी में कुर्सी पलट गई। माउस दीया के हाथ में तो आया पर उसका तार अलग हो गया था। टीया भी नीचे गिर गई।
दीया को बहुत गुस्सा आया। उस ने टीया की पिटाई कर दी। दोनों बहनें रोने लगीं। दीया माउस के टूटने और किताब के खराब होने के डर से और टीया पिटाई से। दोनों की देखरेख को लिए एक नौकरानी थी। उसने किसी तरह बीच- बचाव कर के दोनों को समझाया। दोनों सुबकते-सुबकते सो गर्इं। शाम को मम्मी लौटीं तो दोनों के मुंह लटके हुए थे। पूछने पर सारा मामला पता चला। लेकिन दीया ने मम्मी के सामने टूटा माउस और किताब ला कर रख दी। सारी गलती छोटी बहन की बता कर उस ने अपना बचाव किया। और इस सबके बदले स्वीमिंग पूल में नहाने की इच्छा जताई। मम्मी ने स्थिति को भांपते हुए उसे इजाजत भी दे दी। इतना सुनते ही टीया मचलने लगी। दोनों को मनाने के लिए उनकी मम्मी सोसायटी के स्वीमिंग पूल ले गर्इं।
वहां काफी चहल-पहल थी। छोटे-बड़े ,पतले-मोटे कई आकार-प्रकार के बच्चों से स्वीमिंग पूल अटा पड़ा था। दीया और टीया भी अपनी तैराकी के कपड़े पहन पानी में छलांग लगाने को तैयार थीं। टीया छोटी थी इसलिए उसको सुरक्षा के लिए ‘सेफ्टी रिंग’ भी पहनाया जाता था। जिससे पहनना उस को कभी अच्छा नहीं लगाता था। वह बड़ी बहन से दोपहर की बात से अब तक नाराज थी। इसलिए उसने पिटाई के विरोध में ‘सेफ्टी रिंग’ नहीं पहना। दीया ने मौका देखा और लगा दी छलांग। वह जलपरी की तरह तैरने लगी। तैराकी में उसे कई इनाम भी मिल चुके थे। पानी से उसकी अच्छी दोस्ती थी। पानी के भीतर उतरती-बाहर निकलती दीया को उसकी मम्मी और टीया किनारे खड़ी देख रही थी। टीया ने बहन को देख ताली बजानी शुरू की और यह क्या तेज छपाक की आवाज आई। मम्मी ने मुड़ कर देखा तो टीया नहीं थी। वह तो पानी के भीतर जा चुकी थी। मम्मी की चीख निकल पड़ी ,‘बचाओ। कोई टीया को बचाओ।’ पास खड़े सभी लोग परेशान हो गए। कुछ बच्चे जो तैर रहे थे उस को ढूंढ़ने स्वीमिंग पूल की तलहटी में पहुंचने लगे।
इतने में किसी की नजर पानी से लड़ती,अपने को बचाने के लिए हाथ -पांव चलाती टीया पर पड़ी। दीया अब तक बहन की चिंता में पूरे स्वीमिंग पूल के भीतर चक्कर लगा चुकी थी। लेकिन आवाज सुन कर चौकन्नी हो गई। वह तेजी से तैरती हुई टीया के पास पहुंचना चाहती थी। पानी का बहाव उलटी तरफ था। इसी बीच पूल के गार्ड भी पानी में उतर चुके थे। मम्मी की चिंता बढ़ रही थी। तभी टीया का हाथ थामे पानी से तरबतर दीया किसी विजेता की तरह पूल से बाहर निकली। मम्मी ने दोनों को अपनी खुली बाहों में समेट सीने से लगा लिया। टीया को जल्दी-जल्दी पोंछा और उसके कपड़े बदलने लगीं। तब तक उनके पापा भी आ चुके थे। पापा और मम्मी दोनों बेटियों को सुरक्षित पा कर बेहद खुश थे स्वीमिंग पूल में तैर रहे बच्चे और उनके माता -पिता उन लोगों के पास पहुंच गए। बहन को सुरक्षित बाहर निकालने पर सब ने दीया को शाबाशी दी। स्वीमिंग पूल के गार्ड ने दीया की तारीफ करते हुए उसके पापा से कहा ,‘यह तो बहुत अच्छा तैरना जानती है।
आप इसे अच्छी ट्रेनिंग दिलवाएं। दीया गीले कपड़ों में कांप रही थी। इतना सुनते ही उछल पड़ी। बोली,‘हां ,पापा मैं तैराक बनाना चाहती हूं।’ उसकी इस बात को सुन कर सभी तालियां बजाने लगे। लेकिन मम्मी ने देखा कि टीया ने अभी तक दीया का हाथ कस कर पकड़ रखा था। उन्होंने कहा ,‘हाथ छोड़ो दीदी का।’ लेकिन अब टीया अपनी प्यारी दीदी का हाथ और साथ कभी नहीं छोड़ना चाहती। ०

