फलों का राजा

गरमी की ऋतु में आते आम
बागों में बड़े इठलाते आम
मीठे-मीठे खूब रसीले
मनमोहक लगते पीले-पीले
गांव-शहर चाहे हाट-बाजार
जगह-जगह इनका अधिकार
राजा फलों के कहलाते आम
गरमी की ऋतु में आते आम
लगती ठेलों पर इनकी बोली
सब भर ले जाते अपनी झोली
कई किस्में और आकार अलग
मिलता इनको सबसे प्यार अलग
बड़े चाव से सभी खाते आम
गरमी की ऋतु में आते आम

गोविंद भारद्वाज

गरमी आई गरमी आई

गरमी आई गरमी आई
देखो कितनी जल्दी आई
पके-पके आमों की बरसात
तोहफे में क्या खूब लाई
सूखते गलों की प्यास बुझाने
मीठे-मीठे तरबूज लाई
गरमी आई गरमी आई
देखो कितनी जल्दी आई
सूरज चाचू हैं गुस्से में
धरती मां भी कुछ मुरझाई
स्कूलों में छुट्टियां आर्इं
बच्चों में मस्तियां छार्इं
नानी और दादी के घर
बच्चों की टोलियां आर्इं
गरमी आई गरमी आई
देखो कितनी जल्दी आई

१ साराह शम्स शब्बीर,
कक्षा -तीन, उम्र-आठ साल, वर्द्धमान शिक्षा निकेतन लक्ष्मीनगर, दिल्ली।