आज जिस तेजी से संचार तकनीक का विस्तार हो रहा है, लोगों की उस पर निर्भरता बढ़ रही है और उसके चलते बहुत सारे काम आसान हुए हैं, उसमें खासकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ा है। जब भी किसी उपकरण का नया संस्करण बाजार में आता है, उसे खरीदने-बरतने की होड़-सी शुरू हो जाती है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या फिर रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली घरेलू मशीनों की खरीद में सावधानी की जरूरत होती है। उपकरणों की खरीद और उनके इस्तेमाल में किन बातों का और क्या-क्या ध्यान रखना चाहिए, बता रही हैं मीना।
जरा सोचें, अगर उपकरण यानी जिन्हें आज की भाषा में गैजेट कहा जाता है, हमारी जिंदगी में न होते तो क्या होता? दरअसल, उपकरणों ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है। अब हम किसी भी काम को मिनटों में निपटा सकते हैं। किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था में जरूरी होता है कि वहां के नागरिक अपने काम तेजी से करें। इक्कीसवीं सदी में मोबाइल, टेलीफोन, कार, एसी, फ्रिज, घड़ी आदि के बिना अपने दिन की कल्पना करना असंभव-सा लगने लगा है। गैजेट वह तकनीकी मशीन है, जिससे हमारे रोजमर्रा के काम आसान हो जाते हैं। ये इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर दोनों तरह के होते हैं। सुबह की शुरुआत से लेकर अगली सुबह तक हम अनेक गैजेटों का इस्तेमाल करते हैं। मसलन जब आप सुबह उठते हैं तो मोबाइल अलार्म घड़ी की आवाज से आपकी आंखें खुलती हैं। इसके बाद कॉफी मेकर में कॉफी बनाते हैं। इसी तरह आप पूरे दिन में कई उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं।
इस भागती-दौड़ती जिंदगी और प्रतिस्पर्धा भरी दुनिया में अगर हम काम तेजी से नहीं करते तो बाकियों के मुकाबले पिछड़ जाएंगे। हम प्रतिस्पर्धा के युग में जी रहे हैं, जहां अंधी दौड़ मची हुई है। इस प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के लिए हमारे रोजमर्रा के उपकरण बहुत सहायता करते हैं। इन्होंने हमारे समय को बचाया है। मसलन, पहले हम जिस काम को घंटो में कर पाते थे, उसे आज मिनटों में कर सकते हैं। आज हमारे पास कपड़े धोने के लिए मशीन, बाल सुखाने के लिए हेयर ड्रायर, आटा गूंथने की मशीन, बर्तन धोने की मशीन से लेकर कमरे का तापमान कम ज्यादा करने तक की मशीनें हैं। गैजेट मशीन की तरह ही काम करते हैं। आज चिकित्सा विज्ञान ने भी कई उपकरण बनाए हैं और अब उनके बिना हम जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकते। जैसे बुखार देखने के लिए थर्मामीटर, शुगर मापने के लिए मशीन। सब कुछ हमारी मुट्ठी में मिल जाता है। इसी वजह से आज मृत्यु दर घटी है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में शिशु मृत्यु दर में नौ फीसद की गिरावट दर्ज की गई है और इस गिरावट में चिकित्सा विज्ञान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों का ही असर है।
आज उपकरणों जरिए हम अपना मनोरंजन कर पाते हैं। हमारे पास मोबाइल, लैपटॉप, कैमरा आदि ऐसे उपकरण हैं, जिनसे हम जब चाहें, जिससे चाहें बातें कर सकते हैं। संचार करना सुगम हो गया है। मोबाइल ने तो दुनिया में क्रांति कर दी है। आज मोबाइल फोन केवल मोबाइल न रह कर हमारी बुनियादी जरूरत बन गया है। इसके अलावा सीसीटीवी, जीपीएस आदि ऐसे उपकरण हैं, जिनकी वजह से हमारी जिंदगी सुरक्षित हुई है। इतना ही नहीं, गैजेट परिवारों को जोड़ने की एक विधि भी है। आज संचार माध्यमों ने परिवारों को जोड़ा है। ये उपकरण हमारा समय और पैसा दोनों बचाते और जिदंगी को आरामदायक बनाते हैं।
केपीएमजी के एक सर्वेक्षण के मुताबिक इक्यावन फीसद मोबाइल उपभोक्ता हर दस मिनट में मोबाइल को देखते हैं। इसके अलावा मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या 2013 से लगातार बढ़ रही है। 2013 में 11, 2014 में 15.9, 2015 में 21.3, 2016 में 23.6, 2017 में 31.4 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता बढ़े हैं। यह आंकड़ा केवल मोबाइल उपभोक्ताओं का है। अगर हम अन्य उपकरणों की बात करें तो बाकियों का आंकड़ा भी इसी तरह तेजी से बढ़ा है।
नए उपकरणों के प्रति बढ़ती रुचिआज बाजार में कोई भी नया गैजेट आता है, तो लोगों की रुचि उस तरफ बढ़ने लगती है। सभी चाहते हैं कि कोई नई चीज जो बाजार में आए, उसको सबसे पहले अपने घर लेकर आएं। मगर उपकरणों की खरीद में कुछ सावधानी बरतनी जरूरी होती है। जितना ही अद्यतन उपकरण आप खरीदेंगे उतना ही आपके काम पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इस साल बाजार में कई नए उपकरण आए हैं, जिन्हें खरीद कर आप खुद को अपडेट कर सकते हैं। खासकर मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियां हर साल अपने फोनों में नई-नई सुविधाएं उपलब्ध कराने, उनके काम करने में आसानी और तेजी लाने का प्रयास करती हैं। इस साल तमाम कंपनियों ने ऐसे फोन बाजार में उतारे हैं। उनका अध्ययन करने और अपनी जरूरत और बजट से मिलान करने के बाद ही फोन खरीदना चाहिए। इसी तरह कार बनाने वाली कंपनियां नई-नई सुविधाजनक गाड़ियां बाजार में उतारती और ग्राहक को लुभाने का प्रयास करती हैं। पुराने मॉडलों में नई सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं। कार खरीदते समय अपने बजट के साथ-साथ जरूरत को भी मिलान करके देखना चाहिए। इसी तरह आज बाजार में आपको कई ऐसी घड़ियां मिल जाएंगी जो आपकी कैलोरी, चलने की गति, हृदय गति आदि को गिन सकती हैं।
उपकरणों की बदलती दुनिया में यह जरूरी है कि आप जिन मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं उनकी आपको पूरी जानकारी हो। इसलिए किसी भी उपकरण को खरीदते समय उसके बारे में ठीक से अध्ययन कर लें।
बजट
किसी भी उपकरण को खरीदते समय पहले अपना बजट देख लें। उसी के अनुसार उसे खरीदें। उदाहरण के लिए अगर आप प्रिंटर खरीद रहे हैं तो यह तय करें कि आप किस तरह की स्याही इस्तेमाल करना चाहते हैं। प्रिंटर लेते समय छपाई की गुणवत्ता, छपाई की रफ्तार आदि बातों का ध्यान रखें। इस तरह हर गैजेट की अपनी खूबियां और खामियां होती हैं। उन सभी को देख लें, उसके बाद उसे खरीदें।
उपकरण का आकार
जब भी आप कोई उपकरण खरीदें, उसके आकार का विशेष ध्यान रखें। जैसे अगर आप लैपटॉप खरीदते हैं तो ध्यान रखें कि आपको छोटे आकार का लैपटॉप चाहिए या बड़े आकार का। मसलन, अगर आप यात्रा ज्यादा करते हैं तो कोशिश करें कि छोटे और हल्के आकार का लैपटॉप लें। इसी तरह स्मार्टफोन खरीदते समय प्रोसेसर, रैम, इंटरनल मेमोरी, कैमरा बैटरी और ब्रांड का भी ध्यान रखें। अन्य उपकरण खरीदते समय उनके आकार का भी ध्यान रखें।
ब्रांड
हर कंपनी की अपनी विशेषता होती है। इसी वजह से हर उपकरण के लिए अलग ब्रांड चर्चित होता है। इसलिए जिस गैजेट के लिए जो ब्रांड बाजार में मशहूर हो, उसे ही खरीदें।
वारंटी
जब भी आप कोई उपकरण लें, तो उसकी वारंटी पर भी ध्यान दें। यों तो हर कंपनी अपने उत्पाद के साथ गारंटी देती है। पर वह कुछ समय के लिए होती है। जब आपके उपकरण की गारंटी खत्म हो जाती है, तो आप किसी भी दुकान से उसे ठीक करवाते हैं, जरूरी नहीं कि वह भरोसेमंद हो। इसलिए आप कंपनी से अपने उत्पाद की वारंटी बढ़वा सकते हैं। इस बात का भी ध्यान रखें।
आॅनलाइन खरीदारी
अगर आप आॅनलाइन खरीदारी कर रहे हैं तो उन्हीं साइटों से खरीदें जो प्रचलित हों। यह सुनिश्चित करें कि जो सामान आपने खरीदा है वह ठीक है। उसकी वारंटी भी जांच लें। इसके अलावा अगर सामान खराब निकलता है, तो उसे बदलने का भी मौका दिया जाता हो, यह भी सुनिश्चित करें।
सेहत पर असर
गांधीजी मशीन के अतिशय उपयोग को भारत की जनता के मुंह का निवाला छीनने वाला कर्म मानते थे। आधुनिक होते इस विश्व में गांधी की यह बात हमें भी याद रखनी चाहिए। क्योंकि आज जिस तरह से हम मशीन के आदती बन गए हैं, उससे हमारे मानसिक और शारीरिक दोनों स्तर पर असर पड़ रहा है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान यानी एम्स के डॉक्टर नंदू का मानना है कि अगर हम ज्यादा गैजेट का इस्तेमाल करते हैं तो उससे हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। मसलन, अगर हम मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और बार-बार फोन को देखते हैं, तो आपकी स्मरण शक्ति कम होती है। इससे आपकी एकाग्रता भी कम होती है। इसी तरह से जब ज्यादा उपकरणों के इस्तेमाल पर निर्भर रहते हैं तो हमारी शारीरिक मेहनत कम होती है। जिस वजह से रक्तचाप, शुगर आदि जैसी बीमारियां हो रही हैं। जब हम मशीन पर निर्भर होने लगते हैं, तो हमारा समाज के साथ जुड़ाव कम होने लगता है और इस वजह से हमारे अंदर चिड़चिड़ापन बढ़ता है। आज अवसाद के मामले इसी वजह से बढ़ रहे हैं। ०
