अशोक वाजपेयी मुंबई की एशियाटिक सोसायटी के दरबार हॉल में जब दो खंडों में प्रकाशित पुस्तक ‘कालजयी कुमार गंधर्व’ (राजहंस…
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रमेश दवे प्राय: हर कलाकार अपने अंदर प्रतियोगिता जीता है। यह प्रतियोगिता वह समकालीनों से तो करता ही है, अतीत…
अनिल पुष्कर उर्मिला जैन के संग्रह गुनगुनी धूप का एक कतरा की कविताएं स्त्री वेदना को स्वर देती हैं। यहां…
अनंत विजय उन्नीस सौ सत्तावन में नई कहानी पर टिप्पणी करते हुए हरिशंकर परसाई ने कहा था- ‘जहां तक कहानी…

अपूर्वानंद हिंदुओं को आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है। अपने भीतर झांकने की, खुद को टटोलने की। यह बात अधिकतर हिंदुओं को…

कुलदीप कुमार जिन लोगों को यह मुगालता था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और…

असीम सत्यदेव अरुण माहेश्वरी के लेख ‘अवाम से क्यों दूर हुआ वाम’ (26 नवंबर) में रोग से ज्यादा दवा की…

महेंद्र राजा जैन शंकर शरण की टिप्पणी ‘पाठक से दूरी का सच’ (26 अक्तूबर) पुस्तकें ‘बिकने’ और ‘न बिकने’ की…

अशोक वाजपेयी नया निजाम जब से आया है, तब से किसी न किसी रूप में भाषा का मुद्दा उठता रहता…

प्रमोद मीणा भारत में राजनीतिक फिल्मों के निर्माण और वैकल्पिक सिनेमा का नाभिनाल संबंध रहा है। इसलिए अगर वर्तमान परिदृश्य…

कृष्णा शर्मा शमशेर बहादुर सिंह से प्रेरणा लेकर काव्य-लेखन में पदार्पण करने वाली शोभा सिंह की उनचास कविताओं का संग्रह…

केदार प्रसाद मीणा रणेंद्र का उपन्यास गायब होता देश उनके पहले उपन्यास ‘ग्लोबल गांव के देवता’ की तरह विस्थापित होते,…