2019 का लोकसभा चुनाव अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल के नेता इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए क्षेत्र में भरपूर मेहनत भी कर रहे हैं। वहीं कुछ राज्यों में जहां चुनाव सम्पन्न हो गए हैं वहां के नेताओं की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई है। अब देखना ये है कि जब 23 मई को लोकसभा चुनाव परिणामों की घोषणा होगी तो किन-किन नेताओं का किस्मत साथ देगा। इसके अलावा कुछ नेतागण ऐसे हैं जो धर्म-अध्यात्म में अपनी गहरी आस्था और विश्वास रखते हैं और यही कारण है कि ये अपनी अर्जी-विनती करने के लिए मंदिरों में जा रहे हैं। परंतु शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि ऐसे कौन-कौन से मंदिर हैं जहां इस चुनावी मौसम नेता लोग अपनी अर्जी लगाते हैं। आगे हम इसे जानते हैं।
मध्यप्रदेश के उज्जैन का महकाल मंदिर नेताओं का सबसे भरोसेमंद तीर्थ स्थान रहा है। इस प्रसिद्ध शिव मंदिर की मान्यता है कि जो भी यहां पूजा-अर्चना करता है उन्हें जीत का आशीर्वाद मिलता है। वहीं उत्तर भारत के विंध्यावासिनी मंदिर में भी नेताओं की गहरी आस्था है। कहते हैं कि देवी माता के इस मंदिर में नेता अपनी अर्जी लेकर पहुंचते हैं और चुनाव में जीत के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लेते हैं। साथ ही देवी मां से जीत का आशीर्वाद लेता हैं। बता दें कि विंध्यावासिनी मंदिर को जागृत शक्तिपीठ माना जाता है। ऐसे में नेता यहां आने से चूकते नहीं हैं।
इसके अलावा मध्यप्रदेश के दतिया में भी मां पीतांबरा के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में नेतागण पहुंचते हैं। बता दें कि मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसलिए नेता यहां अपनी अर्जी लगाने के लिए जरूर पहुंचते हैं और जीत के लिए गुप्त पूजा-अर्चना भी करते हैं। मां पीतांबरा के बारे में मान्यता है कि जो भी यहां आता है वह खाली हाथ नहीं लौटता! इसके अलावा 51 शक्तिपीठों में मां कामाख्या की पूजा-पाठ को नेता जीत की गारंटी मानते हैं। मान्यता यह भी है कि चुनावी मैदान में कूदने से पहले नेता मां कामाख्या की पूजा-अर्चना करना नहीं भूलते हैं। यहां यह बताना जरूरी होगा कि पूर्वोत्तर राज्यों में चुनाव से पहले अमित शाह ने कामाख्या मंदिर में अपनी अर्जी लगाई थी।

