Ganesh Chaturthi 2025 Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Mantra, Aarti, Katha in Hindi: शास्त्रों में गणेश चतुर्थी का विशिष्ट महत्व है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है। इस साल भाद्र मास की सिद्धि विनायक चतुर्थी 27 अगस्त को है। आपको बता दें गणेश चतुर्थी से 11 दिनों तक गणेश उत्सव मनाया जाता है। और गणेश चतुर्थी पर गणपति का आगमन किया जाता है और गणेश प्रतिमा की स्थापना करके उनका पूजा विधि विधान सहित किया जाता है।
इस बार गणेश चतुर्थी पर प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि, रवि के साथ इंद्र-ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। वहीं नवपंचम और शोभन राजयोग भी बन रहा है। आइए जानते हैं तिथि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती…
गणेश चतुर्थी तिथि 2025 (Ganesh Chaturthi 2025 Tithi)
वैदिक पंचांग अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर होगी। इसका समापन 27 अगस्त की दोपहर 3 बजकर 43 मिनट पर हो रहा है। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा।
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गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2025 Shubh Muhurat)
ज्योतिषियों के मुताबिक गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना के लिए 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 04 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। आप इस अवधि में गणपति जी की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।
3 दिन बाद बनने जा रहा बुध और केतु का दुर्लभ संयोग, इन राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन, नई नौकरी के साथ अपार धनलाभ के योग
गणेश चतुर्थी चौघड़िया मुहूर्त (Ganesh Chaturthi Choghadiya Muhurat 2025)
लाभ – उन्नति – 05:12 पी एम से 06:48 पी एम
लाभ – उन्नति – 05:57 ए एम से 07:33 ए एम
अमृत – सर्वोत्तम – 07:33 ए एम से 09:09 ए एम
शुभ – उत्तम – 10:46 ए एम से 12:22 पी एम
गणपति स्थापना के समय भगवान गणेश के 21 नामों का भी करें जप (Ganesh Chaturthi 2025)
ओम गणञ्जयाय नमः, ओम गं गणपतये नमः , ओम गं हेरम्बाय नमः, ओम गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः, ओम गं महागणपतये नमः, ओम गं चिंतामणये नमः, ओम गं मंत्राय नमः, ओम गं काश्यपाय नमः, ओम गं आशापूरकाय नमः, ओम गं धरणीधराय नमः, ओम गं लक्षप्रदाय नमः ,ओम गं नन्दनाय नमः, ओम गं वाचासिद्धाय नमः, ओम गं सुमङ्गलाय नमः, ओम गं शिवाय नमः, ओम गं ढुण्ढिविनायकाय नमः ,ओम गं वरदाय नमः, ओम गं अमृताय नमः , ओम गं बीजाय नमः, ओम गं अमोघसिद्धये नमः, ओम गं निधये नमः
कब मनाई जाती है गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2025 LIVE)
हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। आपको बता दें कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जिसकी खुशी में देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। वहीं इस दौरान भक्तजन घरों, दफ्तरों, दुकानों और मंदिरों में गणपति जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी विधिनुसार उपासना करते हैं।
गणेश चतुर्थी पर ऐसे दें शुभकामनाएं (Ganesh Chaturthi Wishes)
आखिर सबसे पहले आकर
हमारे दिलों में बस जाते हैं गणपति जी।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
दिल से जो भी मांगोगे मिलेगा
ये गणेश जी का दरबार है
देवों के देव वक्रतुंडा महाकाया को
अपने हर भक्त से प्यार है।
Happy Ganesh Chaturthi 2025
वर दो हमको मिटे क्लेश
सुखी हो संसार और हमारा देश
दुख संकट ना रहे कोई शेष
हे देवो के देव गणेश
वर दो हमको मिटे क्लेश
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
जाते बड़े धूम-धाम से गणपति जी
आखिर सबसे पहले आकर
हमारे दिलों में बस जाते हैं गणपति जी।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
आज चंद्रोदय और चन्द्रास्त का समय (Ganesh Chaturthi 2025 LIVE)
चंद्रोदय- सुबह 09 बजकर 28 मिनट पर
चंद्रास्त- 27 अगस्त को रात 9 बजकर 8 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 28 मिनट से 05 बजकर 12 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त-शाम 06 बजकर 48 मिनट से 07 बजकर 10 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- रात 12 बजे 12 बजकर 45 मिनट तक
रवि योग- 05:57 ए एम से 06:04 ए एम
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2025 LIVE)
ज्योतिषियों के मुताबिक गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना के लिए 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 04 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। आप इस अवधि में गणपति जी की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।
गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि (Ganesh Chaturthi 2025 Date)
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 26 अगस्त 2025 को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर होगा। वहीं, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन अगले दिन यानी 27 अगस्त को शाम 4 बजकर 32 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। आपको बता दें कि इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से शुरू होकर 6 सितंबर 2025 तक चलेगा।
भगवान श्री गणेश स्तुति मंत्र (Ganesh Stuti Mantra)
अगर समय के अभाव के कारण इस स्तुति मंत्र का पाठ करना संभव न हो तो इस छोटे से मंत्र द्वारा उनकी आराधना की जा सकती है-
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् ।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणाम् ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिःसीदसादनम्
ॐ महागणाधिपतये नमः ॥
भगवान श्री गणेश स्तुति मंत्र (Ganesh Stuti Mantra)
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय!
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते!!
भक्तार्तिनाशनपराय गनेशाश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय!
विद्याधराय विकटाय च वामनाय , भक्त प्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते!!
नमस्ते ब्रह्मरूपाय विष्णुरूपाय ते नम:!
नमस्ते रुद्राय्रुपाय करिरुपाय ते नम:!!
विश्वरूपस्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारणे!
भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक!!
लम्बोदर नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रिय!
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा!!
त्वां विघ्नशत्रुदलनेति च सुन्दरेति ,
भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेति!
विद्याप्रत्यघहरेति च ये स्तुवन्ति,
तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेव!!
गणेशपूजने कर्म यन्न्यूनमधिकं कृतम !
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोSस्तु सदा मम !!
संकटनाशन गणेश स्तोत्र (Ganesh Stotra)
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥2॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥
॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी.
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी.
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा.
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
अँधे को आँख देत, कोढ़िन को काया.
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया.
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी.
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
मूर्ति स्थापित करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान (Ganesh Chaturthi 2025 LIVE)
बाजार से गणेश जी की प्रतिमा लाने से पहले इस बात का खास ध्यान रखें कि उनकी सूंड बाई तरफ होनी चाहिए। वहीं अगर आप पहली बार गणेश चतुर्थी पर बप्पा घर ला रहे हैं तो उनकी बैठी हुई प्रतिमा ही लाएं। मान्यता है कि इससे घर में खुशहाली आती है और सुख समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा, भगवान गणेश की स्थापना ईशान कोण में करें और बप्पा को इस तरह से विराजमान करें की उनका मुख उत्तर की तरफ हो। साथ ही ध्यान रखें कि उनकी दृष्टि घर के मुख्य द्वार की ओर हो और उनकी पीठ कभी भी बाहर की ओर न हो। वहीं, भगवान गणेश की प्रतिमा में उनका वाहन मूषक भी अवश्य होना चाहिए और दूसरे हाथ में मोदक होना चाहिए। ऐसी मूर्ति को घर में स्थापित करना शुभता और समृद्धि का प्रतीक होता है।
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और स्थापना के लिए मध्याह्न मुहूर्त का समय शुभ माना जाता है। इस दिन सबसे पहले पूजा स्थल को साफ कर लें। उसके बाद एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। अब उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा पर अक्षत (चावल), हल्दी, कुमकुम और सुपारी अर्पित करें। गणपति जी के दाहिनी ओर तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल भरकर रखें। स्थापना के समय ‘अस्य प्राण प्रतिष्ठां तु, अस्य प्राणा: क्षरंतु च। श्री गणपते त्वं सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम॥’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं, उन्हें दूर्वा, पुष्प, माला, मोदक और भोग अर्पित करें। अंत में उनकी आरती करें और गणेश चतुर्थी की कथा का पाठ करें।
गणेश चतुर्थी पंचांग 2025 (Ganesh Chaturthi 2025)
सूर्योदय सुबह 05 बजकर 57 मिनट पर
सूर्यास्त शाम 06 बजकर 48 मिनट पर
चंद्रोदय सुबह 09 बजकर 28 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 28 मिनट से 05 बजकर 12 मिनट तक
विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 48 मिनट से 07 बजकर 10 मिनट तक
इस दिन निशिता मुहूर्त रात 12 बजे 12 बजकर 45 मिनट तक
गणेश चतुर्थी पंचांग 2025 (Ganesh Chaturthi 2025)
सूर्योदय सुबह 05 बजकर 57 मिनट पर
सूर्यास्त शाम 06 बजकर 48 मिनट पर
चंद्रोदय सुबह 09 बजकर 28 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 28 मिनट से 05 बजकर 12 मिनट तक
विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 48 मिनट से 07 बजकर 10 मिनट तक
इस दिन निशिता मुहूर्त रात 12 बजे 12 बजकर 45 मिनट तक
गणेश चतुर्थी 2025 पर शुभ योग (Ganesh Chaturthi 2025)
ज्योतिषियों की मानें तो इस साल गणेश चतुर्थी पर बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन प्रीति योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि के साथ इंद्र, ब्रह्म योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही चतुर्थी का पर्व बुधवार को पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ जाएगा। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, ऐसे संयोग में भगवान गणेश की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2025 Shubh Muhurat)
ज्योतिषियों के मुताबिक गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना के लिए 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 04 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। आप इस अवधि में गणपति जी की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।
गणेश चतुर्थी 2025 तिथि (Ganesh Chaturthi Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी 27 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक है। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से गणेश उत्सव 27 अगस्त, बुधवार से आरंभ होगा।
चंद्र दर्शन का समय (Ganesh Chaturthi 2025 Moon Timing)
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना अशुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से किसी न किसी प्रकार के कलंक का सामना करना पड़ता है। इसलिए एक दिन पूर्व यानी 26 अगस्त से लेकर 27 अगस्त तक चंद्रमा देखने की मनाही है।
वर्जित चन्द्र दर्शन का समय – 26 अगस्त 01:54 पी एम से 08:29 पी एम
अवधि – 6 घंटे 34 मिनट
वर्जित चन्द्र दर्शन का समय – 27 अगस्त 09:28 ए एम से 08:57 पी एम
अवधि – 11 घंटे 29 मिनट
गणेश चतुर्थी चौघड़िया मुहूर्त (Ganesh Chaturthi Choghadiya Muhurat 2025)
लाभ – उन्नति – 05:12 पी एम से 06:48 पी एम
लाभ – उन्नति – 05:57 ए एम से 07:33 ए एम
अमृत – सर्वोत्तम – 07:33 ए एम से 09:09 ए एम
शुभ – उत्तम – 10:46 ए एम से 12:22 पी एम
गणेश चालीसा (Ganesh Chaturthi 2025)
॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन,
कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण,
जय जय गिरिजालाल ॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू ।
मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
जै गजबदन सदन सुखदाता ।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
राजत मणि मुक्तन उर माला ।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।
चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।
गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।
मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।
अति शुची पावन मंगलकारी ॥
एक समय गिरिराज कुमारी ।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।
बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।
पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।
पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा ।
देखन भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।
बालक, देखन चाहत नाहीं ॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।
काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो ।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
चले षडानन, भरमि भुलाई ।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।
शेष सहसमुख सके न गाई ॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥
॥ दोहा ॥
श्री गणेश यह चालीसा,
पाठ करै कर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै,
लहे जगत सन्मान ॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,
ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो,
गणेश चतुर्थी पर इस कथा को पढ़ने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होने की है मान्यता (Ganesh Chaturthi 2025)
गणेश चतुर्थी के दिन पूजा- अर्चना करने के बाद व्रत कथा पढ़ना जरूरी माना जाता है। वरना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं इस व्रत कथा के बारे में…
Ganesh Chaturthi Vrat Katha: इस व्रत कथा के बिना अधूरा है गणेश चतुर्थी का व्रत, यहां पढ़ें संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
गणेश चतुर्थी पर अवश्य पढ़ें गणेश जी की ये आरती, जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…
ॐ नमस्ते गणपतये।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।।
त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।
त्वमेव केवलं धर्तासि।।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।।
त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।
ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।।
अव त्वं मां।। अव वक्तारं।।
अव श्रोतारं। अवदातारं।।
अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।।
अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।।
अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।।
अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।।
सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।।
सर्व जगदिदं त्वत्तो जायते।
सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।
सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।
त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।
त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।
त्वं गुणयत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
त्वं देहत्रयातीत: त्वं कालत्रयातीत:।
त्वं मूलाधार स्थितोऽसि नित्यं।
त्वं शक्ति त्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्।
त्वं शक्तित्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं।
वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।।
गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।।
अनुस्वार: परतर:।। अर्धेन्दुलसितं।।
तारेण ऋद्धं।। एतत्तव मनुस्वरूपं।।
गकार: पूर्व रूपं अकारो मध्यरूपं।
अनुस्वारश्चान्त्य रूपं।। बिन्दुरूत्तर रूपं।।
नाद: संधानं।। संहिता संधि: सैषा गणेश विद्या।।
गणक ऋषि: निचृद्रायत्रीछंद:।। गणपति देवता।।
ॐ गं गणपतये नम:।।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2025 Shubh Muhurat)
ज्योतिषियों के मुताबिक गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना के लिए 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 04 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। आप इस अवधि में गणपति जी की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।
गणेश जी का प्रिय मंत्र (Ganesh Chaturthi 2025)
गणेश जी के कई प्रिय मंत्र हैं, लेकिन “ॐ गं गणपतये नमः” और “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” ये दो मंत्र विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।
गणपति की मूर्ति स्थापित करने से पहले जरूर जान लें ये बातें (Ganesh Chaturthi 2025)
गणेश जी की ऐसी मूर्ति बाजार से जब घर लाएं जिसमें उनकी सूंड बाई ओर हो। साथ ही गणेश जी का एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में हो। इसके साथ ही गलती से भी ऐसी मूर्ति घर न लाएं जो किसी भी तरह से खंडित हो।
गणेश जी की मूर्ति घर में किस दिशा में स्थापित करनी चाहिए? (Ganesh Chaturthi 2025)
वास्तु के अनुसार, गणेश जी की मूर्ति आपको ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करनी चाहिए। यह दिशा ईश्वर का स्थान कही जाती है। गणेश जी की प्रतिमा यहां स्थापित करने से गणेश जी की विशेष कृपा आप पर रहेगी।
गणेश आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी.
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी.
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा.
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
अँधे को आँख देत, कोढ़िन को काया.
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया.
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी.
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
Ganesh Sthapana Time 2025 City Wise: शहर के अनुसार गणेश स्थापना का समय
पुणे- 11:21 ए एम से 01:51 पी एम
नई दिल्ली- 11:05 ए एम से 01:40 पी एम
चेन्नई- 10:56 ए एम से 01:25 पी एम
जयपुर- 11:11 ए एम से 01:45 पी एम
हैदराबाद- 11:02 ए एम से 01:33 पी एम
गुरुग्राम- 11:06 ए एम से 01:40 पी एम
चंडीगढ़- 11:07 ए एम से 01:42 पी एम
कोलकाता- 10:22 ए एम से 12:54 पी एम
मुंबई- 11:24 ए एम से 01:55 पी एम
बेंगलुरु- 11:07 ए एम से 01:36 पी एम
गणेशजी की मूर्ति घर लाते समय इन बातों का रखें ध्यान
भक्तों को गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए। साथ ही जल्दी स्नान करके भगवान गणेश की मूर्ति लानी चाहिए। वहीं आपको बता दें कि उन्हें घर लाते समय आंखों पर लाल रंग का साफ कपड़ा जरूर बांध दें। साथ ही इसके बाद पूरे गाजे बाजे के साथ उन्हें अपने घर में प्रवेश कराएं।
