योगी सरकार के एक और मंत्री ने दिया विवादित बयान। बरेली में एक जनसभा के दौरान योगी कैबिनेट के मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘चूहा अन्न हमारा खाता है, मोटा हो जाता है और कालीन भी हमारा ही काटता है। चूहे का काम नहीं होना चाहिए।’ बरेली के मंडल के प्रभारी ने इस बयान में चूहा किसको कहा ये एक बार फिर से कौतुहौल का विषय बना हुआ है। आपको बता दें कि योगी सरकार ने मंगलवार को ही बैठक कर मंत्रियों को विवादित बयानों से बचने का निर्देश दिया था और साथ ही ये कहा था कि वो राज्य में होने वाले उपचुनावों में अपने ध्यान लगाएं।
योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने जनसभा को संबोधित करते हुए चूहा किसे कहा? ये सवाल तो हर किसी के दिमाग में गूंज रहा था। क्या मंत्री जी अपने घर के चूहों की बात कर रहे थे या फिर वो सियासी लहजे में किसी और को चूहा बोलकर हमला बोल रहे थे। हालांकि मंच पर ही उन्होंने ये बात खुद ही स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा जिन लोगों के इस देश में पैदा होने के बाद सबको बराबर समस्त सुविधाएं मिलने के बाद यदि कोई देश के विकास में सहयोग की बात नहीं करता है तो उसे मैं क्या कहूं?
योगी के मंत्री ने बताया ये चूहे कौन हैं
मंत्री जी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ऐसे लोगों को तो यही कहा जाता है, ‘घर में चूहा होता है अन्न हमारा खाता है मोटा हो जाता है और कालीन भी हमारा काटता है। चूहे का काम नहीं होना चाहिए।’ जनसभा चलती रही लेकिन लोगों के जेहन में चूहा अभी भी कूद रहा था। जैसे ही जनसभा समाप्त हुई मीडिया ने आखिरकार मंत्री जी से चूहे के बारे में पूछ ही लिया। जवाब में मंत्री जी ने भी चूहे के बारे में स्पष्ट करते हुए कहा, ‘चूहे वो हैं जो हिन्दुस्तान का अन्न खाकर वफादारी किसी दूसरे की करते हैं। वो कोई भी हो सकता है वो पत्थरबाज हो सकता है, वो ईंटबाज हो सकता है, वो गोली बाज हो सकता है।’ तो अब तो आप समझ गए होंगे कि मंत्री जी किसको चूहा बोल रहे हैं।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
योगी के मंत्री के इस बयान पर सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने जमकर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने अपने ट्विटर हैंडल से योगी के मंत्री पर निशाना साधते हुए लिखा, ‘अपने देश के नागरिकों की अपमानजनक उपमा करना संकीर्ण सोच का प्रतीक है। जहाँ लोगों के पास खाने को अन्न नहीं है, वहीं सत्ताधारी ख़ुद क़ालीन का ऐश्वर्य-भोग करने की बात कह रहे हैं। ये विभेद जनतांत्रिक-भ्रष्टाचार है। इतिहास गवाह है कि जनता अंहकारी सत्ता के नीचे से क़ालीन खींच लेती है।’
