बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रात में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। अब अलंकार अग्निहोत्री ने कलक्ट्रेट के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था को बहाल करने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए, आम जनता सरकार के खिलाफ हो गई है।

अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने कल ही अपना इस्तीफा दे दिया था और डीएम के कैंप कार्यालय में कल ही रची गई साजिश नाकाम हो गई, जहां डीएम महोदय को फोन आया कि इस पंडित को यहीं बैठाए रखा जाए और उसे पूरी रात यहीं से जाने न दिया जाए। मैंने बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडे को फोन किया और उनसे कहा कि मीडिया को सूचित करें कि मुझे बंधक बनाने का आदेश जारी किया गया है। जब उन्हें पता चला कि मीडिया को मुझे बंधक बनाने की साजिश के बारे में जानकारी है, तो मुझे जाने दिया गया। यह एक रची गई साजिश थी, जिसके तहत मैं एक बयान जारी करता और मुझे किसी अन्य आरोप में निलंबित कर दिया जाता। हम इस निलंबन आदेश के संबंध में अदालत का रुख करेंगे। एक विशेष जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए और फोन पर हुई पूरी बातचीत की जांच की जानी चाहिए। हम जल्द ही आगे की कार्रवाई तय करेंगे।”

यूपी सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा पर काम कर रही- अलंकार अग्निहोत्री

अलंकार अग्निहोत्री ने डीएम से सवाल करते हुए कहा, “मैं जिला मजिस्ट्रेट से पूछना चाहता हूं कि कल रात उन्हें किसने फोन किया था और कौन मुझे पंडित कहकर गाली दे रहा है और वह किस विचारधारा से संबंध रखता है। मैं भारत की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह से निवेदन करूंगा कि संवैधानिक व्यवस्था को बहाल करने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए। हम बार-बार आप से बोल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा पर काम कर रही है।”

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अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड

उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए। अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों की कड़ी आलोचना और प्रशासनिक दबाव के आरोपों के बीच सेवा से इस्तीफा दे दिया था। राज्य सरकार ने 26 जनवरी को एक आधिकारिक आदेश जारी किया। इसके मुताबिक, बरेली के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर अग्निहोत्री को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियम, 1999 के नियम 4 और नियम 7 के तहत कार्रवाई करते हुए, सरकार ने उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया और बरेली मंडल के आयुक्त को आरोपों की जांच करने के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस पूरे घटनाक्रम पर सियासी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी के सांसद दिनेश शर्मा ने विवाद से खुद को अलग करते हुए कहा, “मैं न तो उन्हें जानता हूं और न ही उनके बारे में सुना है। कई लोग ऐसे होते हैं जिनमें राजनीति की बू आने लगती है और फिर वे बहाने ढूंढने लगते हैं।” हालांकि, विपक्षी नेताओं ने इस घटनाक्रम को गंभीर बताया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि इस्तीफे और निलंबन से बीजेपी सरकार के अधीन प्रशासनिक दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंताएं बढ़ गई हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रवीण सिंह आरोन ने कहा कि यह मुद्दा जाति का नहीं, बल्कि अधिकारियों की गरिमा और संवैधानिक शासन का है।

यूजीसी के नए नियम क्या है?

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