आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने बुधवार को कहा कि वह पाकिस्तान के साथ वार्ता जारी रखेगा क्योंकि युद्ध कोई विकल्प नहीं है। भारत ने पाकिस्तान को यह भी साफ कर दिया है कि वार्ता और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में कहा कि 30 नवंबर को पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच कॉप-21 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई बातचीत, उससे पहले रूस के उफा और हाल में पेरिस में दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति के बाद भारत और पाकिस्तान ने आतंकवाद पर वार्ता का फैसला किया है। इसी क्रम में बैंकाक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तरीय वार्ता हुई। उन्होंने कहा कि एक ही बैठक में सभी समस्याओं का समाधान नहीं निकल सकता। इसलिए हम वार्ता जारी रखेंगे।
उन्होंने प्रश्नकाल में सदस्यों के सवालों के जवाब में कहा कि वार्ता की नई पहल हुई है। शुभकामनाएं दें कि इससे रास्ता निकल सके ताकि आतंकवाद का साया हमारे सिर से उठ सके। अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी उसामा बिन लादेन को अमेरिका द्वारा पाकिस्तान में मार गिराने और पेरिस हमलों के बाद सीरिया में आतंकियों के खिलाफ की जा रही युद्धक कार्रवाई जैसा कोई कदम उठाने संबंधी भाजपा के गणेश सिंह के सवाल के जवाब में सुषमा ने कहा कि पाकिस्तान के साथ पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी शिविरों पर भी भारत बात कर रहा है क्योंकि युद्ध अकेला रास्ता नहीं है।
उन्होंने कहा कि बहुत पहले ही आतंकवाद की समाप्ति पर भारत ने वार्त प्रक्रिया शुरू कर दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को काफी पहले साफ कर दिया था कि बम धमाकों में वार्ता के स्वर दब जाते हैं। इसलिए पहले आतंकवाद पर वार्ता करें। सुषमा ने कहा कि यह तय हो चुका है कि वार्ता में कोई तीसरा देश मध्यस्थता नहीं करेगा। वार्ता हमें ही करनी है।
अपनी हालिया पाक यात्रा के बारे में उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने फैसला किया कि आतंकवाद संबंधी सभी मुद्दों के समाधान के लिए एनएसए स्तरीय वार्ता जारी रहेगी। पाकिस्तान ने भारत को आश्वासन दिया है कि मुंबई हमलों संबंधी मामले की सुनवाई को जल्द पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार देश और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाना जारी रखेगी।
संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की ओर से आतंकवाद का मुद्दा उठाए जाने के बारे में पूछने पर विदेश मंत्री ने कहा कि 1996 से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौता (सीसीआइटी) संयुक्त राष्ट्र में पारित होने के इंतजार में है। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को पिछले साल उठाया। उसके बाद जिन भी देशों के प्रमुखों से वह मिले, उनके साथ इस मुद्दे को उठाया। यह सुखद बात है कि अब हमें कई देशों से इस पर समर्थन मिल रहा है। हमें उम्मीद है कि सीसीआइटी समझौता संयुक्त राष्ट्र में मंजूर कर लिया जाएगा। सीसीआइटी एक संधि है जिसका प्रस्ताव 1996 में भारत ने किया था। इसका मकसद आतंकियों को प्रतिबंधित करना और उन्हें वित्त पोषण से इनकार को देशों के लिए बाध्यकारी बनाना शामिल है।
सुषमा ने कहा कि भारत ने सीमापार आतंकवाद पर अपनी चिंता को पाक के साथ दोतरफा स्तर पर और जहां जरूरत हुई, वहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भी उठाया है। सरकार के इन्हीं लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप हाफिज सईद जैसे आतंकी और लश्कर व जमात उद दावा जैसे संगठनों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1267 के तहत सूचीबद्ध किया गया है जो अल कायदा और अन्य संबंधित संगठनों के मामलों से संबद्ध है। उन्होंने कहा कि पाक ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले की साजिश रचने वालों को गिरफ्तार किया है और उन पर वहां मुकदमा चल रहा है।

