मध्य प्रदेश के सबसे बड़े और बहुचर्चित व्यापमं घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को 592 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।
सीबीआइ के आरोप पत्र में व्यापमं के तत्कालीन निदेशक पंकज त्रिवेदी समेत व्यापमं के चार पूर्व अधिकारियों को भी नामजद किया गया है। इस मामले में सीबीआइ की जांच 28 महीने तक चली। आरोप पत्र पीएमटी 2012 परीक्षा की सीबीआइ जांच के सिलसिले में दायर किया गया। आरोपियों में कई प्राइवेट कॉलेजों के चेयरमैन भी शामिल हैं। आरोपियों में से कई ने अग्रिम जमानत की अर्जी अदालत में जमा कराई है। सीबीआइ के आरोप पत्र पर विसल ब्लोअर आनंद राय ने सवाल खड़े किए और आरोप लगाया है कि इस मामले में बड़े और रसूखदार लोगों को बचाया जा रहा है।

सीबीआइ ने यहां बताया कि भोपाल के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रमोटर-एल एन मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष जेएन चौकसे, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के एसएन विजयवर्गीय, चिरायु मेडिकल कॉलेज के अजय गोयनका और इंदौर स्थित इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के सुरेश सिंह भदौरिया समेत अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। जांच एजंसी ने इस चार्जशीट में व्यापमं के निदेशक रहे पंकज त्रिवेदी के अलावा पूर्व सीनियर सिस्टम ऐनालिस्ट नितिन मोहिंद्रा, पूर्व डेप्युटी सिस्टम ऐनालिस्ट अजय कुमार सेन और पूर्व प्रोग्रामर अधिकारियों के अतिरिक्त सीबीआइ ने कई प्राइवेट कॉलेजों के चेयरमैन को भी आरोपी बनाया गया है।

बीते 31 अक्तूबर को व्यापमं घोटाले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में शिवराज सिंह चौहान को क्लीनचिट दे दी थी। सीबीआइ ने अपनी जांच में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हार्ड डिस्क से छेड़छाड़ के आरोपों को भी खारिज कर दिया था। मध्य प्रदेश में दाखिले और भर्ती घोटाले में शामिल संदिग्धों को बचाने की कथित साजिश की जांच सीबीआइ को सौंपी गई थी। जांच एजंसी को 24 लोगों की मौत की जांच करने के लिए कहा गया था। 20 सितंबर को व्यापमं घोटाले में सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी क्लोजर रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि व्यापमं की वजह से किसी संदिग्ध की मौत नहीं हुई है। मौतों का संबंध घोटालों से नहीं है। सीबीआइ ने व्यापमं घोटालों में लगभग चार दर्जन मामलों में एफआइआर दर्ज की।

इस बीच व्यापमं द्वारा आयोजित पीएमटी परीक्षा 2012 फर्जीवाड़े मामले में चिरायु अस्पताल संचालक अजय गोयनका, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज संचालक डॉ एसएन विजयवर्गीय समेत 13 डॉक्टरों और आठ अन्य लोगों ने अपनी अग्रिम जमानत अर्जी पेश की है। जब सीबीआई ने मामले में आरोपी बनाए गए चिकित्सकों को नोटिस भेजा तो उन्होंने अग्रिम जमानत अर्जी दायर की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने 15 जुलाई 2015 को व्यापमं घोटाले में जांच शुरू की थी। व्यापमं घोटाले का खुलासा होने के बाद पहले मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी थी, लेकिन भारी राजनीतिक विरोध और घोटाले में सरकार को बचाने के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले की जांच सीबीआइ ने शुरू की थी।

सीबीआई के अधिकारियों के अनुसार, व्यापमं में ‘इंजन-बोगी’ बन परीक्षार्थिर्यों ने सामूहिक नकल के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया था। नकल के इस तरीके में परीक्षा में आगे वाला परीक्षार्थी पीछे बैठने वाले को नकल करवाकर उसे पास होने में मदद करता था। व्यापमं परीक्षा में रोल नंबर सॉफ्टवेयर के जरिए आॅटोमैटिक जनरेट होते थे, ऐसे में दो परिचितों का एक साथ परीक्षा सेंटर पर आगे-पीछे रोल नंबर आना संभव नहीं था। व्यापमं के आरोपियों ने साजिश रचकर परीक्षा में नकल कराने में मदद करने वाले स्कोरर और नकल करने वाले परीक्षार्थी के रोल नंबर एक-दूसरे के करीब अलॉट कराए। सॉफ्टवेयर फॉर्मूले और गाइडलाइन को ही हथियार बनाकर पीएमटी फर्जीवाड़ा किया गया।