बिहार में नीतीश कुमार के महागठबंधन तोड़ने से नाराज चल रहे जनता दल (युनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने यहां गुरुवार को कहा कि वोट और वोटर लोकतंत्र के इंजन हैं और इन्हें तोड़ना लोकतंत्र को तबाह करना है। उन्होंने कहा कि एक गठबंधन तोड़ना और जिसके खिलाफ जनादेश मिला, उस पार्टी से गठबंधन कर फिर सरकार बना लिए जाने की घटना के कारण लोकतंत्र के विश्वास पर संकट उत्पन्न हो गया है। अपने तीन दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुंचे शरद ने यहां कहा, “70 वर्ष के इतिहास में कभी ऐसा नहीं देखा गया कि चुनाव में दो दल आमने-सामने लड़े हों, दोनों के ‘मेनिफेस्टो’ बिल्कुल अलग तरह के हों और दोनों मिलकर सरकार बना लिए हों। इस घटना से लोकतंत्र के विश्वास पर संकट उत्पन्न हो गया है।”

पटना के बाद शरद ने सारण जिले के सोनपुर और वैशाली जिले के हाजीपुर, सराय सहित कई स्थानों पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “एक सरकारी जनता दल है, जिसके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, एक जनता का जनता दल है, जिसके साथ बिहार की जनता है।नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास तोड़ा गया है। 11 करोड़ लोगों का विश्वास टूटा है। हम इस मुद्दे को लेकर सड़क पर लड़ेंगे।

जद (यू) के नेता ने आगे कहा, “बिहार में लोगों के विश्वास पर आघात हुआ है। इससे मुझे भी दुख पहुंचा है। जनता की राय से जो गठबंधन बना था और जनता से जो करार किया गया था, उसके साथ विश्वासघात हुआ है।” उन्होंने कहा कि आज से तीन दिनों तक वह जनता के बीच जाएंगे और उनसे इस विषय पर बात करेंगे। यादव ने कहा कि इस दौरे की सूचना जनता दल के वरिष्ठ कुछ सहयोगियों को छोड़कर किसी को नहीं दी गई है और न ही इसे लेकर कोई तैयारी की गई है।

शरद यादव अपने दौरे के क्रम में मुजफ्फरपुर, मधुबनी और मधेपुरा जाने वाले हैं। इससे पहले, पटना हवाईअड्डा पहुंचने पर शरद के समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इन मौकों पर हालांकि जद (यू) के कार्यकर्ताओं की संख्या कम दिखी, लेकिन सभी जगह राजद के कार्यकर्ताओं ने मुकम्मल तैयारी कर रखी थी। कई स्थानों पर शरद के समर्थकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की। बिहार के पूर्व मंत्री रमई राम भी शरद के साथ दिखे। सत्ताधारी जद (यू) ने शरद के इस दौरे से किनारा कर लिया है।

शरद यादव के बिहार दौरे और उनके बयानों से स्पष्ट है कि उन्होंने नीतीश से दूरी बना ली है और अपनी राह अलग कर ली है। नीतीश के महागठबंधन तोड़ने के कारण जद (यू) भी टूट चुका है। शरद समर्थक गुजरात के विधायक ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता अहमद पटेल को वोट दिया, जिससे पटेल को राकने में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह विफल हो गए।