अंबेडकरनगर में यूपी विधानसभा चुनाव (UP Elections 2022) के छठे चरण के तहत मतदान होना है। जानकार जिले की सभी सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई मान रहे हैं। उधर मतदाताओं की चुप्पी ने प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दी है। यहां का चुनाव बागियों के कारण भी दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। अपनी पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वालों की संख्या अंबेडकरनगर में बहुत है। ऐसे में यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है कि किस पार्टी का उम्मीदवार अन्य उम्मीदवारों पर भारी पड़ रहा है।
अकबरपुर सीट
बगावत की ऐसी ही कहानी अकबरपुर सीट ही नहीं बाकी सीटों पर भी दिखाई दे रही है। इस सीट पर पिछले छह चुनावों में बसपा ने पांच बार बाजी मारी है। बसपा के रामअचल राजभर पांच बार विधायक रहे, लेकिन अबकी उन्होंने अखिलेश यादव की पार्टी का दामन थाम लिया है। वहीं, बसपा ने भाजपा छोड़कर आए चंद्रप्रकाश वर्मा को टिकट दिया है। जबकि भाजपा ने भी बसपा छोड़कर आए पूर्व मंत्री धर्मराज निषाद को अपना उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में यहां पर लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है।
जलालपुर सीट
जलालपुर सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने कब्जा किया था। लेकिन, 2019 के उपचुनाव में सपा ने इस सीट पर कब्जा कर लिया। इस सीट पर अबकी सपा ने बसपा से आए पूर्व सांसद राकेश पांडेय को टिकट दिया है तो बसपा ने भाजपा छोड़कर आए राजेश सिंह को उम्मीदवार बनाया है। सपा छोड़कर आए वर्तमान विधायक सुभाष राय भाजपा से चुनाव लड़ रहे है। बदले हालात में यहां पर जातीय समीकरण भी राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
आलापुर सीट
आलापुर सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से अनीता कमल ने चुनाव जीता था। लेकिन अबकी पार्टी ने अनीता कमल की जगह उनके ससुर पूर्व विधायक त्रिवेणी राम को टिकट दिया है। वहीं, सपा ने बसपा से आए त्रिभुवन दत्त को चुनाव लड़ाया है। जबकि बसपा ने इस सीट पर केडी गौतम के तौर पर नया चेहरा उतारा है। ऐसे में यहां भी मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है।
कटेहरी सीट
2017 के चुनाव में कटेहरी सीट से बसपा के लालजी वर्मा ने चुनाव जीता था लेकिन अबकी वह समाजवादी पार्टी का झंडा थामे हुए हैं। गठबंधन में निषाद पार्टी ने यहां से भाजपा नेता अवधेश द्विवेदी को उम्मीदवार बनाया है। जबकि बसपा ने विधायक पवन पांडेय के बेटे प्रतीक पांडेय को उम्मीदवार बनाया है। बदले समीकरणों में लालजी वर्मा को सीट बचाने में अन्य दलों की तरफ से तगड़ी चुनौती मिलती दिखाई दे रही है।
टांडा सीट
टांडा सीट से 2017 में भाजपा की संजू देवी ने चुनाव जीता था। लेकिन अबकी भाजपा ने संजू देवी का टिकट काट कर कपिलदेव वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। इस बार सपा ने यहां से पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा को टिकट दिया है। वहीं, बसपा ने शबाना खातून को मैदान में उतारा है। मुस्लिम बाहुल सीट होने के कारण यहां भी मुकाबला बहुत दिलचस्प हो गया है।
