उत्तर प्रदेश में योगी 2.0 सरकार के गठन के बाद आज विधानसभा के अध्यक्ष पद पर कानपुर से विधायक सतीश महाना को सर्वसम्मति से चुना गया। इस दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें बधाई दी। साथ में तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि आप राइट साइ़ड (दक्षिणपंथी) से आए हैं, लेकिन आपको लेफ्ट (विपक्ष) की तरफ से भी आपको देखना होगा। इस पर सतीश महाना ने उन्हें जवाब भी दिया।
अखिलेश ने स्पीकर से कहा, “कई बार हमें आपकी जरूरत पड़ेगी। आपके बगैर स्वस्थ लोकतंत्र नहीं चल सकता। हालांकि, आप राइट साइड से हैं,लेकिन ध्यान आपको लेफ्ट का रखना होगा। अब आपको आपको छोड़ दिया है। उम्मीद है निष्पक्ष हैं आप। आपको उस स्थान पर बैठाकर उन्होंने आपको छोड़ दिया है। अब आप राइट की ओर नहीं देखेंगे। अब केवल लेफ्ट की ओर देखिए।”
अखिलेश ने स्पीकर से कहा, “हाउस के रेफरी हैं आप कभी गेम का हिस्सा मत बन जाइएगा, क्योंकि आप राइट से आए हैं। नेता सदन ने कोरोना पर बात की है। समय आएगा तो इसपर भी मैं बात करूंगा। वो बहस का समय नहीं है। अभी तो केवल इतना कहना चाहते हैं कि समय-समय पर आपकी संरक्षण की जरूरत पड़ेगी। जितना आप विपक्ष को मौका देंगे उतना लोकतंत्र मजबूत होगा।”
अखिलेश ने आगे कहा, “आपको ध्यान होगा कि चुनी हुई सरकार तानाशाह न बन जाए। मुझे पता चला आप लगभग 35 देशों में घूम करके आए हैं। अध्यक्ष महोदय यह बात तो मुझे पहले से पता होनी चाहिए थी।” इसका तुरंत जवाब देते हुए महाना ने कहा, ” आपने पहले पता करने का प्रयास नहीं किया न।” फिर अखिलेश ने कहा, “मुझे खुशी है कि अध्यक्ष ऐसे हमारे बने हैं जो अब जब भी विदेश यात्रा हमारी होगी तो हम लोगों को भूलेंगे नहीं। ये न करना कि राइट वालों को बैठाकर ले जाना।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सतीश महाना के बधाई देते हुए कहा, ” हमारे शास्त्र हमें एक बात की प्रेरणा देते हैं कि जब भी हमें महान बनने का अवसर मिले तो इससे वंचित नहीं रहना चाहिए। महान बनने के अवसर से चूकना नहीं चाहिए और आपके नाम से तो महाना ही जुड़ा हुआ है। स्वभाविक रूप से लोकतंत्र के इस गौरवपूर्ण आसन पर विराजमान होना किसी भी सदस्य के लिए न केवल अभिनंदनिय है, बल्कि गौरवपूर्ण भी है। इस पीठ पर एक अनुभवी सदस्य का चयन सर्वानुमित से हो तो यह अत्यंत सुखद अनुभुति कराता है। खासकर तब जब विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं हुआ। मार्च की शुरुआत तक दोनों तरफ से मिसाइलें चल रही थीं।”
सीएम आदित्यनाथ ने इस पद के लिए महाना के नामांकन का प्रस्ताव रखा था, जिसका वरिष्ठ मंत्री सुरेश खन्ना ने समर्थन किया। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने भी महाना के नाम का प्रस्ताव रखा था और उनकी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने इसका समर्थन किया था।
